राजस्थान लोक सेवा आयोग यानी RPSC की भर्ती परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी की है. इस मामले में आरोपियों की तरफ से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि ‘इस मामले में उम्मीदवारों से ज्यादा तो आरोपी हैं.’
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस केवी विश्वनाथन और एन कोटिश्वर सिंह की बेंच के सामने दो मुख्य याचिकाएं पेश की गई थीं. इनमें से एक आरोपी की जमानत याचिका और दूसरी परीक्षा को स्थगित करने की मांग से जुड़ी थी. कोर्ट ने याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की मांग को स्वीकारते हुए कहा कि RPSC से जुड़े मामलों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जिन पर न्यायिक नजर रखना आवश्यक है.
आयोग ने लिया यू-टर्न, परीक्षा तारीखों में बदलाव
दिलचस्प बात यह रही कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से ठीक एक दिन पहले, 23 जून को RPSC ने 2025 की प्राध्यापक भर्ती परीक्षा की कुछ तारीखों में संशोधन कर दिया. आयोग ने यह कदम यूजीसी नेट की परीक्षा तिथियों से टकराव के कारण उठाया. लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में संभावित कानूनी कार्रवाई के दबाव में भी लिया गया हो सकता है.
पेपर लीक और घोटालों की कड़ी
RPSC पर पहले भी परीक्षा संचालन में अनियमितताओं, पेपर लीक और घोटालों के आरोप लगते रहे हैं. कई मौकों पर आयोग के अधिकारियों और बाहरी एजेंटों की मिलीभगत से प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता पर सवाल उठे हैं. इस बार भी, जिस तरह से कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे हैं, उससे पूरे भर्ती तंत्र की पारदर्शिता पर गहरा संदेह खड़ा हो गया है.
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी से स्पष्ट है कि वह RPSC जैसे संवैधानिक निकायों की निष्पक्षता से समझौता नहीं करना चाहता. अदालत ने न केवल जमानत याचिकाओं पर सख्ती दिखाई बल्कि यह संकेत भी दिया कि ऐसे मामलों में न्यायपालिका सक्रिय भूमिका निभाएगी.




















