अजमेर: विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैहि के सालाना उर्स का कार्यक्रम जारी कर दिया गया है. देश- विदेश में अब ख्वाजा साहब के 814वां उर्स का न्यौता भी भेजा जा रहा है. इस सिलसिले में दरगाह के खादिम सैय्यद कुतबुद्दीन सखी ने बताया कि उर्स 2025 झंडे की रस्म के साथ शुरू होगा और परंपरागत 10 दिन तक उर्स का आयोजन चलेगा जिसमें लाखों ज़ायरीन श्रद्धालु अजमेर आएंगे.
हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह जहां हर धर्म जाति के ज़ायरीन श्रद्धालु अपनी गहरी आस्था रखते हैं. अजमेर शरीफ दरगाह से सब की मन्नतें मुरादें पूरी होती हैं. ऐसे में देश-विदेश तक मे ख्वाजा गरीब नवाज़ के लाखों चाहने वाले रहते हैं. यही वजह हैं कि उन तक उर्स 2025 का न्योता भेजा जाना शुरू हो गया है. अजमेर शरीफ दरगाह के खादिम व बॉलीवुड दुआग़ो सैय्यद कुतबुद्दीन सखी ने बताया कि वाट्सअप, ईमेल और फ़ोन के साथ साथ डाक के ज़रिए भी ख्वाजा साहब के सालाना उर्स कार्यक्रम की समस्त जानकारियां दी जा रही हैं. इस्लामिक उर्दू कलेंडर के अनुसार ख्वाजा गरीब नवाज का 2025 में आने वाला उर्स 814वां उर्स मुबारक़ होगा.
814वां उर्स 2025 कार्यक्रम :-
- 16 दिसंबर: दरगाह के बुलंद दरवाज़ा पर झंडे की रस्म होगी
- 19 दिसंबर: सालाना संदल की रस्म अदा की जाएगी
- 20 दिसंबर: देश भर के मलंगों का जुलूस, छड़ी मुबारक़ की रस्म
- 20 दिसंबर: जन्नती दरवाज़ा खुलेगा, वीवीआइपी चादर कार्यक्रम
- 20 दिसम्बर: शाही महफ़िल और उर्स में मज़ार मुबारक़ के विशेष ग़ुस्ल व खिदमत का आगाज़
- 22 दिसंबर: बॉलीवुड की चादर पेश होगी
- 23 दिसम्बर: वीआईपी राजनीतिक पार्टियों की चादर का सिलसिला शुरू
- 24 दिसंबर: सूफ़ियाना महफ़िल-ए- क़व्वाली
- 26 दिसंबर: उर्स नमाज़ ए जुमा
- 27 दिसंबर: उर्स की शाही महफ़िल
- 27 दिसंबर: छठी शरीफ़ उर्स का खास दिन कुल की रस्म
- 27 दिसंबर: अंजुमन सैय्यद ज़ादगान कि चादर, दागोल मलंगों की हाजरी
- 27 दिसंबर: जन्नती दरवाज़ा वापस बंद हो जाएगा
- 30 दिसंबर: बड़े कुल की रस्म, ज़ायरीन केवड़ा, गुलाब जल, इत्र से पूरी दरगाह को महकाएंगे
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार रजब महीने का चांद दिखाई देने के बाद अजमेर दरगाह में शाही महफ़िल का आगाज़ हो जाता है. दरगाह के महफ़िल खाना में देश- विदेश के क़व्वाल ख्वाजा ग़रीब नवाज़ की शान में सूफ़ियाना क़व्वाली पेश करते हैं. इसी तरह आम दिनों में ख्वाजा साहब की मज़ार पर होने वाली खिदमत का समय भी बदल जाता है और मज़ार शरीफ़ पर चांद रात से ग़ुस्ल भी दिया जाता है. इस मौके पर सालाना संदल की रस्म भी अदा की जाती है. परंपरागत दरगाह में होने वाली उर्स की तमाम रस्म उर्दू महीना रजब का चांद दिखाई देने के अनुसार होती है.




















