अजमेर: शहर की आधा दर्जन कॉलोनियां चार दिन बाद भी जलमग्न है. इन कॉलोनियों में बारिश का पानी नहीं, बल्कि बरसात में ओवरफ्लो हुए आनासागर का पानी भरा है. ऐसा बरसों से होता आया है, जब आनासागर के ओवरफ्लो होते ही इन कॉलोनियों में पानी भर जाता है. वर्ष 1980 से बसावट के बावजूद यहां से पानी की निकासी का स्थायी समाधान ना कोई जनप्रतिनिधि कर पाया और ना ही प्रशासनिक अधिकारी. हां, हर चुनाव में यह पानी मुद्दा जरूर बनता है. ईटीवी भारत की टीम पानी से घिरे लोगों के बीच पहुंची और जाना उनका दर्द…
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने बताया कि आनासागर में पानी की आवक पहले से कम हुई है. झील से लगातार पानी निकल रहा है. इस कारण से जलभराव क्षेत्र में पानी कम हुआ. जल्द ही प्रभावित क्षेत्र में जलभराव नहीं रहेगा. देवनानी ने जेएलएन मेडिकल कॉलेज परिसर, यूरोलॉजी विभाग, कार्डियोलॉजी विभाग के परिसर में भरे पानी का जायजा लिया. कालाबाग और अन्य प्रभावित क्षेत्र का भी प्रशासनिक अधिकारियों के साथ दौरा किया. देवनानी ने जल भराव से प्रभावित क्षेत्रों में मड पंप लगाने के निर्देश दिए. इधर कलेक्टर लोकबंधु ने कहा कि आनासागर से पानी कम होते ही स्थिति नियंत्रण में होगी.
दायरा घट रहा: अजमेर में दो प्रमुख ऐतिहासिक झीलें हैं-फॉयसागर (वरुण सागर ) और आनासागर. इनका दायरा चार दशक में घट रहा है. आनासागर का क्षेत्र तो असल से 60 प्रतिशत घट गया. इसे घटाने में प्रशासन का भी हाथ है. झील क्षेत्र में दर्जनों कॉलोनियां बस गई. रही सही कसर स्मार्ट सिटी ने पूरी कर डाली. आनासागर के चारों और पाथवे बनाया. इसके लिए लाखों टन मिट्टी आनासागर में डाली और झील क्षेत्र में बसी कॉलोनी को जायज ठहरा दिया. पॉश कॉलोनियों में रहने वालों को राहत मिल गई, लेकिन मध्यम वर्ग की कॉलोनियों में जलभराव की स्थितियां पैदा कर दी.
फॉयसागर का ओवरफ्लो पानी बांडी नदी के जरिए आनासागर में आता है. बांडी नदी की चौड़ाई 80 फीट थी, जो शहर के विस्तार के साथ बसी कॉलोनियों के चलते घटाकर 20 से 25 फीट कर दी गई. 1980 में हाउसिंग बोर्ड ने यहां मकान बनाकर बेचे. इसके बाद तत्कालीन यूआईटी ने हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पास प्लाटिंग कर दी. इसके बाद भूमाफिया ने साहू का कुआं क्षेत्र में प्लाटिंग कर दी, लेकिन पानी की निकासी के इंतजाम नजरअंदाज कर दिए. लिहाजा वैशाली नगर, गुलमोहर कॉलोनी, सागर विहार कॉलोनी समेत डेढ़ दर्जन कॉलोनियां हर बार आनासागर के ओवरफ्लो होने का खमियाजा भुगतती रही है. इस बार क्षेत्र में सन 1975 की बाढ़ की यादें ताजा करा दी.
हाउसिंग बोर्ड ने बसाई थी सबसे पहले झील क्षेत्र में आबादी: क्षेत्र में जलभराव की समस्या रहती है लेकिन इस बार पानी दोगुना है. पिछले शुक्रवार को मूसलादार बारिश से फॉयसागर में चादर चली. बांडी नदी और चौरसियावास तालाब से पानी की आनासागर में आवक बनी रही. इस कारण 4 दिन से क्षेत्र में जलभराव है. क्षेत्रवासी बताते हैं कि चार दिन से अंधेरे में हैं. करंट के डर से बिजली निगम ने पावर कट कर दिया. क्षेत्र में 4 से 5 फीट पानी था. आनासागर का दायरा घटने से क्षेत्र में जलभराव की स्थिति बनी है. स्थायी समाधान के लिए आनासागर से मिट्टी निकालनी होगी. क्षेत्रवासियों की मांग है कि 1980 से यहां आबादी बसी है. जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को मिलकर स्थायी समाधान निकालना चाहिए. प्रशासन ने हर बार की तरह राहत के नाम पर इस बार भी दूध और फूड पैकेट बांटकर इतिश्री कर ली. क्षेत्रवासी बताते हैं कि इस बार बारिश में लोगों के घरेलू सामान, फर्नीचर व वाहन भी डूब गए. क्षेत्र में 75 फीसदी लोग रिश्तेदारों के घर चले गए. 25 फीसदी ने घरों की ऊपरी मंजिल में शरण ले रखी है. प्रशासन को लोगों की तकलीफ समझना चाहिए.
घरेलू सामान खराब, लोग परेशान: जल भराव क्षेत्र में सन 1980 से रह रहे जगदीश प्रसाद साहू ने कहा कि प्रशासन मड पंप की सहायता से पानी निकालने का प्रयास कर रहा है. कर्मचारी डीजल की कमी के कारण पंप बंद कर देते हैं या आराम करने चले जाते हैं. इससे पंप घंटों बंद रहता है. इसी कारण चार दिन से क्षेत्र से पानी की निकासी नहीं हो पाई. स्मार्ट सिटी ने पाथवे के जरिए आनासागर झील के चारों ओर दायरा कम कर दिया. तीस वर्षों से आनासागर की खुदाई नहीं हुई, जबकि इसमें लाखों टन मिट्टी ठूंस दी गई. नगर निगम, अजमेर विकास प्राधिकरण झील की खुदाई करता है तो मिट्टी ले जाने वाले किसानों को भी फायदा होगा और आनासागर की भराव क्षमता बढ़ेगी. बिपरजॉय के वक्त भी आनासागर ओवरफ्लो हो गई. तब आधा दर्जन कॉलोनियों में पानी भर गया था. हमारे घर के आसपास 30 घरों में पानी भरा है. लोगों का घरेलू सामान खराब हो गया. साहू ने मड पंप की संख्या बढ़ाने की मांग की.अधिकारियों पर विधायक, मंत्री और सरकार को गुमराह करने का आरोप लगाया.बोले, चार दिन से बिजली बंद थी. यहां इंसान मरे या जिए, इनको फर्क नहीं पड़ता. क्षेत्रवासी कपिल व्यास ने कहा कि 18 जुलाई को बारिश हुई थी तब मकानों में 5 से 6 फुट पानी भरा था. क्षेत्र के लोगों को काफी नुकसान हुआ. सन् 1975 में इससे भयानक स्थिति थी अब वर्तमान में भी हालात खराब है. 1980 से यहां आबादी बसी है. लोग शासन व प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं.
हाल-ए-अजमेर
- सागर विहार, वन विहार, कच्ची बस्ती, गुलमोहर कॉलोनी समेत डेढ़ दर्जन कॉलोनियां जलमग्न
- 1980 में झील क्षेत्र में हाउसिंग बोर्ड ने लोगों को दिए थे मकान
- यूआईटी ने प्लाटिंग कर बेचे लोगों को भूखंड
- भूमाफिया ने भी काटी कॉलोनियां
- हर बार आनासागर ओवरफ्लो होने पर टूटती है लोगों पर मुसीबत
- इस बार 1975 जैसी बाढ़ के हालात
- अन्य वर्षों की तुलना में इस बार क्षेत्र में पानी दोगुना हुआ जमा




















