जयपुर: बीते दिनों प्रदेश की भाजपा सरकार ने शिविरा कैलेंडर में वीर सावरकर की जयंती को उत्सव के रूप में मनाने का जिक्र किया. वहीं, प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर नए पाठ्यक्रम में वीर सावरकर को पढ़ाए जाने की ओर इशारा भी कर चुके हैं. इसके इतर राजधानी जयपुर के एक सरकारी विद्यालय के प्राचार्य ने कैंपस में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बड़े-बड़े चित्र लगवाए हैं. इसमें महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर के साथ वीर सावरकर का चित्र भी शामिल किया गया है.
प्राचार्य का कहना है कि बच्चे ‘नन्ही पौध’ हैं और राष्ट्र का भविष्य इन्हीं पर टिका है. विद्यालय में महापुरुषों की जीवनियों को पुस्तकालय में रखा गया है, साथ ही प्रतिदिन की प्रार्थना सभा में उनके प्रेरणादायक प्रसंग सुनाए जाते हैं. उन्होंने कहा- सावरकर जैसे आदर्श महापुरुष के जीवन से नई ऊर्जा और प्रकाश मिलता है. उन्हें न पढ़ाना दुर्भाग्यपूर्ण होगा, लेकिन इस कदम ने राजनीतिक हलकों में नया विवाद खड़ा कर दिया है.
बहरहाल, नतीजा ये है कि सावरकर का नाम एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा की वैचारिक जंग का केंद्र बन गया है. विद्यालय का प्रयास जहां ‘देशभक्ति के माहौल’ के निर्माण के तौर पर देखा जा रहा है. वहीं, विपक्ष इसे सत्ता का दबाव और इतिहास से छेड़छाड़ करार दे रहा है.
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