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17 सितंबर से लगेंगे शहरी सेवा शिविर: भू-उपयोग परिवर्तन, पट्टे और बकाया लीज राशि पर मिलेगी छूट

जयपुर: राज्य सरकार ने शहरी सेवा शिविरों में राहतों का सबसे बड़ा पैकेज खोला. रविवार को जारी अधिसूचना और तैयार प्रस्ताव के अनुसार, 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले शिविरों में भू-उपयोग परिवर्तन से लेकर पट्टे, भवन निर्माण स्वीकृति और बकाया लीज राशि तक के मामलों में बड़ी छूट दी जाएगी. खासतौर पर छोटे भूखंडधारियों और गरीब वर्ग को सर्वाधिक लाभ मिलेगा. मध्यम वर्ग को आंशिक और उच्च वर्ग को न्यूनतम राहत का प्रावधान है. इसके साथ ही महापौर और आयुक्त के अधिकार भी बढ़ाए गए हैं.

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने प्रशासन शहरों के संग अभियान में कई बड़ी छूट दी थी. जारी अधिसूचना में भाजपा सरकार ने शहरी सेवा शिविर में बाशिंदों को बड़ी राहत का ऐलान किया. नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग के तैयार प्रस्ताव में सरकार ने इस बार बकाया लीज राशि पर ब्याज की 100 फीसदी, छोटे भूखंडधारकों को रिन्यूअल और रूपांतरण शुल्क में 75 प्रतिशत तक की छूट, प्रीमियम दरों में कमी और भवन निर्माण स्वीकृति के लिए आसान शर्तें रखी हैं. खास बात ये है कि 69ए के पट्टे के लिए 200 की जगह 100 रुपए प्रति वर्गमीटर शुल्क ही लिया जाएगा. अब कोई भी अफसर मौका निरीक्षण करने नहीं जाएंगे.

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राहत का पिटारा

भू-उपयोग परिवर्तन

  • गैर-व्यावसायिक से व्यावसायिक में परिवर्तन पर 250 वर्गमीटर तक के भूखंड पर 50% छूट
  • शुल्क केवल आरक्षित दर का 20% या डीएलसी दर का 10% होगा
  • 250-500 वर्गमीटर पर 25% छूट मिलेगी
  • व्यावसायिक छोड़कर अन्य उपयोग में परिवर्तन पर 500 वर्गमीटर तक 50% छूट
  • 500 से 1000 वर्गमीटर तक 25% छूट रहेगी
  • इसके बाद शुल्क केवल आरक्षित दर का 10% या डीएलसी दर का 5% देना होगा

बकाया लीज राशि पर

  • वर्ष 2025–26 तक की बकाया लीज राशि एकमुश्त जमा कराने पर 100% ब्याज माफ
  • 31 दिसंबर 2025 तक फ्रीहोल्ड प्रमाण पत्र लेने पर बकाया राशि में 60% तक छूट

पुनर्ग्रहण शुल्क (तय समय पर निर्माण नहीं करने पर जुर्माना)

  • 250 वर्गमीटर तक : 75% छूट
  • 251-500 वर्गमीटर : 50% छूट
  • 501-1000 वर्गमीटर : 25% छूट

प्रीमियम दरों में कमी: 1 अप्रैल 2021 से बढ़ी दरें घटाई

  • 100 वर्गमीटर तक : 25% छूट
  • 101-200 वर्गमीटर : 15% छूट

भवन निर्माण स्वीकृति

  • जी+1 मंजिल तक मकान निर्माण स्वीकृति पर मानचित्र शुल्क में 50% छूट
  • नक्शा स्वीकृति शुल्क घटाकर केवल 30 रुपए प्रति वर्गमीटर किया

उपविभाजन व पुनर्गठन शुल्क

  • आवासीय भूखंडों में 75% तक छूट
  • 250 वर्गमीटर तक : ₹19 प्रति वर्गमीटर
  • 251-500 वर्गमीटर : ₹38 प्रति वर्गमीटर
  • 501-1000 वर्गमीटर : ₹57 प्रति वर्गमीटर

व्यावसायिक और औद्योगिक भूखंड

  • गैर-आवासीय से व्यावसायिक रूपांतरण पर 20-40% तक राहत
  • औद्योगिक भूखंडों में रूपांतरण शुल्क में 50% तक कमी

फ्रीहोल्ड, लीज प्रमाण पत्र और रजिस्ट्री

  • फ्रीहोल्ड सर्टिफिकेट के लिए केवल 10 वर्ष की न्यूनतम राशि जमा करानी होगी
  • पंजीकरण शुल्क और स्टाम्प ड्यूटी पर भी राहत
  • 69ए पट्टों के लिए शुल्क ₹200 की जगह ₹100 प्रति वर्गमीटर होगा

तकनीकी परीक्षण की नई व्यवस्था

  • 500 वर्गमीटर तक और 15 मीटर ऊंचाई तक वरिष्ठ प्रारूपकार, टाउन प्लानर सहायक और कनिष्ठ अभियंता जांच करेंगे
  • 1000 वर्गमीटर तक अधीनस्थ अधिकारी देखेंगे
  • इससे बड़े प्रकरण वरिष्ठतम नगर नियोजक के पास भेजे जाएंगे
  • ले-आउट प्लान 2 हेक्टेयर तक कनिष्ठ स्तर के अधिकारी, उससे बड़े मामले वरिष्ठतम नगर नियोजक देखेंगे

महापौर-आयुक्त को अधिकार, बनेगी एंपावर्ड कमेटी: भू-आवंटन, पट्टा जारी करने, भवन स्वीकृति, भू-उपयोग परिवर्तन और ले-आउट प्लान जैसे सभी कार्यों के लिए अब एक ही एंपावर्ड कमेटी होगी. इसके अध्यक्ष महापौर, सभापति या अध्यक्ष होंगे. कमेटी में सदस्य आयुक्त, नगर नियोजक, अभियंता और विधि अधिकारी होंगे. निर्णय के बाद आयुक्त एकल हस्ताक्षर से पट्टे और आदेश जारी कर सकेंगे.

कच्ची बस्तियों और 90ए-90बी कॉलोनियों को राहत :31 दिसंबर 2021 से पहले कब्जे वाले मामलों में कच्ची बस्तीवासियों को पट्टे दिए जाएंगे. पहले अहस्तांतरणीय पट्टे अब 3 साल बाद हस्तांतरणीय हो जाएंगे. मूल पट्टाधारी ने भूखंड बेच दिया हो और वो बार-बार पंजीकृत दस्तावेजों से बिका हो तो अंतिम खरीदार को 10 प्रति वर्गमीटर रुपए की दर से राशि जमा कर पट्टा मिलेगा. 90ए या 90बी प्रक्रिया पूरी कर चुके कृषि भूमि पर बसे कॉलोनियों को ब्याज में 100% छूट मिलेगी. अपंजीकृत दस्तावेजों से खरीदे भूखंडों पर पट्टा देते समय कोई पेनल्टी नहीं लगेगी.

आवेदन प्रक्रिया :आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से स्वीकार होंगे. ऑफलाइन आवेदन को निकाय पहले ऑनलाइन दर्ज करेगा तभी छूट का लाभ मिलेगा. पुराने लंबित ऑफलाइन प्रकरण भी पहले ऑनलाइन किए जाएंगे. बहरहाल, सरकार के इस कदम ने गरीब और मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा राहत दी. महापौर-आयुक्त को मिले नए अधिकार और तकनीकी परीक्षण की स्पष्ट व्यवस्था से प्रकरणों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है.

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