जयपुर: राज्य सरकार ने सरकारी कॉलेजों के लिए अस्थाई शिक्षकों की भर्ती करने की घोषणा की है. इस घोषणा का विपक्ष और वर्तमान में विद्या संबल योजना से जुड़े सहायक आचार्यों ने विरोध किया है. विपक्ष ने इसे गुजरात मॉडल की तर्ज पर ‘शिक्षा वीर’ बनाकर शिक्षकों को अग्निवीर की राह पर धकेलने की बात कही, तो वहीं विद्या संबल से जुड़ें सहायक आचार्यों ने कहा कि जिन शिक्षकों ने प्रदेश के सरकारी कॉलेजों को स्थापित करने में अपने 5 साल लगाए, सरकार अब उन्हें ही बेरोजगार करने जा रही है और आगे फिर अस्थाई भर्ती करने जा रही है. यह उचित नहीं है.
बता दें कि राज्य सरकार की ओर से प्रदेश के 376 महाविद्यालयों में 5299 शैक्षणिक पदों की तुलना में 3540 पदों पर भर्ती करने की घोषणा की गई थी, लेकिन ये भर्तियां अस्थाई होगी. अब सरकार विपक्ष और विद्या संबल योजना से जुड़े सहायक आचार्यों के निशाने पर है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे उच्च शिक्षा के लिए काला अध्याय बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार स्थाई भर्ती की जगह गुजरात मॉडल की तर्ज पर शिक्षा वीर बनाकर कॉलेजों में शिक्षकों को अग्निवीर की राह पर धकेलने जा रही है. वहीं, जितेंद्र सिंह ने कहा कि राजस्थान सरकार नेट/सेट/पीएचडी प्राप्त युवाओं को परमानेंट नौकरी नहीं दे पा रही, जो बेहद शर्मनाक है. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इसे युवाओं के साथ बड़ा धोखा बताया.
विद्या संबल योजना से जुड़े सहायक आचार्य डॉ. राम सिंह सामोता ने कहा कि बीते 5 साल से विद्या संबल योजना के तहत शिक्षक कॉलेजों में पढ़ा रहे हैं, उन्हें हटा दिया जाएगा. यानी वो बेरोजगार हो जाएंगे और जो भर्ती की जाएगी वो भी 5 साल के लिए की जाएगी. ऐसे में जिन शिक्षकों ने कॉलेजों को स्थापित करने में काम किया, वो शिक्षा वीर बनकर रह जाएंगे. इसे लेकर उपमुख्यमंत्री खुद कशमकश की स्थिति में हैं. कह रहे हैं कि इन्हें नियमित भी कर सकते हैं. ऐसे में उन्हें खुद नहीं पता है कि इस योजना का भविष्य क्या है.
राजस्थान की उच्च शिक्षा के लिए आज का दिन काले अध्याय में लिखा जाएगा।
भाजपा सरकार स्थायी भर्ती की जगह गुजरात मॉडल की तर्ज पर ” शिक्षा वीर” बनाकर कॉलेजों के शिक्षकों को अग्निवीर की राह पर धकेलने जा रही है।
प्रदेश के 376 महाविद्यालयों में 5,299 शैक्षणिक पद हैं, लेकिन सरकार सिर्फ…<=”” p>— govind singh dotasra (@govinddotasra) August 31, 2025
सवाल ये है कि जो लोग मेरिट के आधार पर कॉलेजों में पढ़ाने पहुंचे, उनका न तो समायोजन किया जा रहा है, न उन्हें अनुभव प्रमाणपत्र (एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट) दिया जा रहा है और न ही किसी तरह के बोनस अंक दिए जा रहे हैं. अब जब भर्ती कर रहे हैं तो अस्थाई भर्ती का क्या औचित्य? आरपीएससी पैटर्न पर एग्जाम होगा तो फिर नियमित भर्ती क्यों नहीं निकाली गई? उन्होंने कहा कि एक तरफ यूजीसी कह रहा है कि 57 हजार 700 वेतन दी जाए, ये 28 हजार 500 की बात कर रहे हैं. ऐसे में ये केंद्र के अग्निवीर मॉडल की तरह राजस्थान का शिक्षा वीर मॉडल है. इससे ये स्पष्ट है कि सरकार को पढ़ाई करने वाले और पढ़ाई कराने वालों के भविष्य को लेकर किसी भी तरह की चिंता नहीं है.
यूजीसी के अनुसार दें वेतन: सामोता ने कहा कि हाल ही में गुजरात के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि शिक्षक राष्ट्र के निर्माता हैं, राष्ट्र का भविष्य निर्माण करने का काम करते हैं. उनके साथ दुर्व्यवहार न करें, उन्हें यूजीसी पे-ग्रेड के अनुसार वेतन दें और स्थाई रोजगार दें. बावजूद इसके राजस्थान में अस्थाई भर्ती करने की प्लानिंग की जा रही है. वहीं, सरकार कह रही है कि 10 हजार 594 शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पद हैं. इनमें से 5299 पद शिक्षकों के हैं. इनमें से भी केवल 3540 पदों पर ही भर्ती करने जा रहे हैं. ऐसे में सरकार खुद नहीं जानती कि वो करना क्या चाहती है और भविष्य में जो छात्र नेट/पीएचडी/पीजी करके आएंगे, उनके रास्ते तो बंद ही हो जाएंगे.
विधानसभा में उठवाएंगे मुद्दा: उन्होंने बताया कि पहले जब इस योजना को लाने की योजना बनाई जा रही थी, तब भी विरोध दर्ज कराया गया था. अभी भी सरकार से यही अनुरोध है कि पहले से जो शिक्षक काम कर रहे हैं, उन्हें ‘शिक्षा वीर’ ना बनाएं. उनकी बात सुने और आने वाले समय में सबको मौका मिले, ऐसा कोई रास्ता निकालना चाहिए. यदि सरकार फिर भी नहीं सुनती है तो विपक्ष के माध्यम से इस मुद्दे को सदन में उठवाया जाएगा और सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे.




















