अलवर: शहर की सड़कों पर घूमने वाला गोवंश बेसहारा नहीं है. इनमें ज्यादातर गोवंश को पशुपालक सुबह-शाम दूध निकाल निराश्रित छोड़ देते हैं. गोवंश को खुला छोड़ने पर जब नगर निगम इन्हें पकड़ता है, तो कम पेनल्टी के चलते वे आसानी से गोवंश को छुड़ा लेते हैं. यह कहना है वन मंत्री और शहर विधायक संजय शर्मा का. उन्होंने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि इस समस्या के निराकरण के लिए वे सीएम से मिलेंगे और इस संबंध में कानून को सख्त बनाया जाएगा.
प्रदेश के वन मंत्री एवं अलवर शहर विधायक संजय शर्मा का कहना है कि अलवर में घूमने वाला गोवंश बेसहारा नहीं है. बल्कि यह गोवंश गोपालकों का है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पशुपालक इन गोवंश का दूध निकाल कर बेसहारा घूमने के लिए सड़कों पर छोड़ देते हैं, जिसके चलते कई बार दुर्घटना भी हो जाती है. हालांकि नगर निगम की ओर से सड़कों पर बेसहारा घूमने वाले पशुओं को पकड़ने की कार्रवाई भी करती है, लेकिन ऐसे पशुओं पर लगाई गई पेनल्टी इतनी कम है कि पशुपालक आसानी यह चुकाकर गोवंश ले जाते हैं.
बनाएंगे सख्त कानून: वन मंत्री शर्मा ने माना कि सड़कों पर बेसहारा घूमने वाले पशुओं को पकड़ने की कार्रवाई करने पर स्थानीय जनप्रतिनिधि अधिकारियों को उन्हें छुड़वाने के लिए फोन भी करते हैं. उन्होंने कहा कि वे इस समस्या के निराकरण के लिए मुख्यमंत्री से मिलकर ऐसे पशुपालकों के खिलाफ लगाई जाने वाली पेनल्टी व कानून इतना सख्त हो कि लोगों में कार्रवाई का डर रहे, जिससे कोई भी गोपालक सिर्फ दूध के लिए गोवंश नहीं पाले और उसे अपने घरों पर अच्छी तरह से उनका पालन करे और सड़कों पर नहीं छोड़ें.
नगर निगम को सख्त कार्रवाई की जरुरत: नगर निगम अलवर के आयुक्त जितेन्द्र नरूका ने बताया कि विभाग की ओर से समय-समय पर सड़कों पर घूमने वाले गोवंश पर कार्रवाई की जाती है. निगम की पशु पकड़ टीम इस कार्य को अंजाम देती है. उन्होंने बताया कि अब नगर निगम की ओर से सड़कों पर निराश्रित घूमने वाले गोवंश के खिलाफ सघनता से अभियान चलाया जाएगा, जिससे गोवंश भी सुरक्षित व इनसे होने वाली परेशानी से भी लोगों को निजात मिल सके.
निगम का कंटोल रूम चलता है 24 घंटे: नगर निगम की ओर से निराश्रित गोवंश को पकड़ने के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम संचालित किया जा रहा है. सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित पशुओं को पकड़ने के लिए एक पिंजरा गाड़ी है और पांच कर्मचारी तैनात हैं. इन कर्मचारियों की ओर से निराश्रित गोवंश को पकड़ कांजी हाउस में रखा जाता है, जहां उसकी देखभाल की जाती है. अलवर के मालाखेड़ा बाजार स्थित कांजी हाउस संरक्षक नवीन कुमार ने बताया कि ज्यादा संख्या में निराश्रित गोवंश के पकड़े जाने पर उन्हें बुधविहार स्थित कांजी हाउस में भेजा जाता है.
दो लाख से ज्यादा गोवंश का हटाया टैग: पशुपालन विभाग की ओर से शहर की सड़कों पर घूम रहे करीब दो लाख 26 हजार 522 निराश्रित गोवंश को पिछले 5 साल में टैग लगाए गए. गोवंश को लगाया जाने वाला टैग व्यक्ति के आधार नम्बर की तरह 12 अंकों का रहता है. इस टैग पर गोपालक व पशु की डिटेल अंकित रहती है. इसे गोवंश के कान पर लगाया जाता है. इस टैग के माध्यम से गोवंश के बारे में पूरी जानकारी लेने के साथ ही गोपालक का भी पता लगाया जा सकता है. साथ ही गोवंश को लगे टैग से उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने के अलावा टीकाकरण की जानकारी भी मिलती है. गोपालकों के बारे में जानकारी उजागर होने के भय से लोगों ने सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित गोवंश के लगे टैग हटा दिए. इस कारण नगर को गोवंश और पशुपालक की जानकारी नहीं मिल पाती. जिससे निगम ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं कर पाती.




















