टोंक : जिले के ककोड़ उच्च माध्यमिक सरकारी स्कूल के एक कमरे की छत मंगलवार को स्कूल शुरू होने के साथ ही अचानक गिर गई. धमाके की आवाज सुनकर छात्राएं और स्टाफ दहशत में आ गए. गनीमत यह रही कि इस दौरान कोई हादसा नहीं हुआ, जबकि जिस स्कूल की छत गिरी है उस स्कूल में 17 कक्षों में से लगभग 15 कक्ष जीर्ण-श्रीण अवस्था में हैं. वहीं, हादसे के समय पास वाले कक्ष में छात्राओं की क्लास चल रही थी. सूचना पर अभिभावकों से लेकर उपखण्ड अधिकारी उनियारा और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पंहुचे.
पानी रिसाव की समस्या आम : प्रिंसिपल रतन कंवर ने कहा कि उन्होंने पहले ही प्रसाशन और शिक्षा विभाग को स्कूल की हालत को लेकर लिखकर दिया हुआ है. पूरा स्कूल भवन बहुत पुराना और जर्जर हालत में है. बारिश के दौरान पानी का रिसाव होना यहां एक आम समस्या है. जिस कक्ष की छत गिरी है, उसे खतरा मान पहले ही तीन वर्ष से ताला लगाया हुआ था. कुछ कक्षाएं पहले से पास के विद्यालय भवन व इस विद्यालय के बरामदे में संचालित की जा रही हैं.
कोटा से गया तक चलेगी स्पेशल ट्रेन ‘पितृपक्ष एक्सप्रेस’, जोधपुर दिल्ली के बीच वंदे भारत चलाने का आग्रह
प्रशासन सतर्क : वहीं, उनियारा उपखण्ड अधिकारी शत्रुघ्न गुर्जर ने कहा कि बरसात के दौरान ऐसे स्कूलों को लेकर हमने शाला प्रधानों को छात्र-छात्राओं की सुरक्षा का ध्यान रखने को निर्देश दिए हुए हैं. ककोड़ के इस स्कूल के हालातों की बात की जाए तो अधिकांश कक्षों पर ताले लगे हुए हैं. जिला प्रशासन पहले से ही सतर्क है और जिस स्कूल में भी जर्जर कक्ष हैं, उन्हें खाली कर तालाबंदी कराए जाने के अलावा उधर विद्यार्थियों और स्टाफ को नहीं जाने के लिए चेतावनी दी हुई है.
शाला प्रबंधन समिति की रही लापरवाही : जांच के लिए जिला मुख्यालय से ककोड़ पहुंची सीडीईओ सुशीला करणानी ने बताया कि स्कूल भवन बहुत पुराना है और काफी खस्ताहाल है. शाला प्रबंध समिति को चाहिए था कि वह जर्जर कक्ष को प्रस्ताव लिए जाने के बाद उसे ध्वस्त कराएं, लेकिन उन्होंने तीन वर्ष से कक्ष पर ताला तो लगाए रखा और ध्वस्त कराए जाने को लेकर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की. अगर जरूरत होगी तो इस जर्जर भवन की सभी कक्षाएं दूसरे स्कूल में संचालित की जाएंगी.
IIIT कोटा में 20 अगस्त से होगी बीटेक के नए बैच की रिपोर्टिंग, हॉस्टल में जगह की कमी बनी चुनौती
झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद भी सिलसिला जारी : 25 जुलाई को झालावाड़ के पिपलोदी में स्कूल की छत गिर गई थी. इसमें 7 बच्चों की मौत हो गई थी, जिसमें सगे भाई-बहन भी शामिल थे. हादसे के बाद कई स्थानों पर स्कूल की छत गिरने के मामले सामने आए हैं. इनमें से कुछ हादसों में बच्चों की मौत भी हुई है.




















