जयपुर : विधानसभा के एक सितंबर से शुरू हो रहे मानसून सत्र को लेकर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को घेरने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है. मानसून सत्र की शुरुआत से पहले कांग्रेस विधायक दल की बैठक में भी कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा होगी. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी इसके संकेत दिए हैं.
इस मामले में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का कहना है कि पूरी सरकार ही एक मुद्दा है. एक भी विभाग ऐसा नहीं है, जिसमें कोई ढंग का काम हुआ हो. प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है, डेढ़ साल बीतने के बावजूद भी सरकार निकाय और पंचायत चुनाव नहीं करा पा रही है. पूरे प्रदेश में सड़कों की हालत जर्जर है, किसानों के लिए हमारी सरकार ने जो योजनाएं चलाई थी, उन सबको बंद कर दिया गया है. नई योजना कोई नहीं चलाई गई है. किसानों को न खाद मिल रही है, न ही बिजली मिल रही है. इसके अलावा ईस्टर्न कैनाल परियोजना और यमुना जल परियोजना में भी अभी तक कोई प्रोग्रेस नहीं हुई है. जूली ने कहा कि सरकार ने बजट में जो घोषणाएं की थी और जो वादे जनता से किए थे, उन पर भी अभी तक कोई काम नहीं हुआ है. ऐसे में जल्द ही विधायक दल की बैठक बुलाकर इन मुद्दों पर चर्चा करेंगे और सरकार को जनहित के मुद्दों पर सदन में और सदन के बाहर घेरने का काम करेंगे.
निकाय-पंचायत चुनाव और कानून व्यवस्था बड़ा मुद्दा : वहीं, प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनाव के साथ ही कानून व्यवस्था सबसे बड़ा मुद्दा है. हमने जनता से वादा किया है कि हम निकाय और पंचायत चुनाव का मुद्दा सदन में जोर-जोर से उठाएंगे और सरकार को चुनाव कराने पर मजबूर करेंगे. कानून व्यवस्था की स्थिति प्रदेश में बदतर हो चुकी है. आए दिन हत्याएं, लूटमार, डकैती और रेप हो रहे हैं. बजरी माफिया, भू माफिया और खनन माफिया प्रदेश में हावी है. सरकार का इकबाल खत्म हो चुका है. अपराधियों में पुलिस का कोई खौफ नहीं है. इन मुद्दों पर सरकार को घेरने का काम करेंगे. प्रदेश में सरकार को 2 साल होने को है, लेकिन एक भी नई योजना नहीं लाई गई है और जो हमारे समय की योजनाएं थीं उन्हें बंद कर दिया है. इससे जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
शैडो केबिनेट के जरिए भी सदन में घेरेंगे : वहीं, सरकार को घेरने के लिए प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस शैडो केबिनेट का भी सहारा लेगी. दरअसल, इसके जरिए जो विधायक पूर्व में किसी विभाग का मंत्री रहा है वो सदन में उस विभाग से जुड़े मामलों को लेकर मंत्री को घेरने का काम करेंगे. उदाहरण के तौर पर गोविंद सिंह डोटासरा शिक्षा मंत्री रहे हैं. टीकाराम जूली सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री रहे हैं. अशोक चांदना खेल और युवा मामलों के मंत्री रहे हैं. इसी तरह से राजेंद्र पारीक उद्योग, हरेंद्र मिर्धा सार्वजनिक निर्माण विभाग, सचिन पायलट सार्वजनिक निर्माण विभाग और पंचायती राज और हरीश चौधरी राजस्व विभाग के मंत्री रहे हैं. ऐसे में इन नेताओं को शैडो केबिनेट के जरिए संबंधित विभाग के मंत्रियों से सवाल करने और उन्हें उनके विभाग से जुड़े मामलों पर घेरने की जिम्मेदारी दी जाएगी.




















