जयपुर: दिल्ली-जयपुर रोड पर स्थित लाल डूंगरी क्षेत्र हो या फिर परकोटे में बने पुराने आवास राजधानी में बारिश ने इन घरों की नींव हिला दी है. कहीं मकानों के नीचे से मिट्टी बह गई है तो कहीं चूने और पत्थर से बने मकान गिरने की कगार पर हैं. ऐसे में कभी भी दुर्घटना हो सकती है, हालांकि, सुभाष चौक क्षेत्र में हुए हादसे के बाद निगम प्रशासन ने सख्ती जरूर दिखाई है और अब नोटिस देने के बाद भी जर्जर इमारत को ठीक नहीं कराने या खाली नहीं करने पर भवन मालिक और रहवासियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा. सुभाष चौक क्षेत्र में हुए हादसे के बाद निगम ने टीमें बनाकर मुनादी शुरू कर दी है. लाउडस्पीकर से कहा जा रहा है कि जर्जर इमारतों में न रहें. क्षेत्र में दोबारा सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है. जर्जर भवनों के मालिकों को नोटिस दिए जा रहे हैं.
हेरिटेज नगर निगम की महापौर कुसुम यादव ने बताया कि लगभग 165 इमारतों को जर्जर अवस्था में होने की वजह से नोटिस दिया गया है कि या तो वे उनकी मरम्मत करवाएं, या अपने स्तर पर तोड़ दें. अन्यथा निगम कार्रवाई करेगा. नोटिस को अनदेखा कर मकान मालिक उचित कार्रवाई नहीं करता है या फिर उसमें रहने वाले लोग भवन को खाली नहीं करते हैं, तो निगम प्रशासन उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाएगा. मेयर ने कहा कि ये भवन पूरी तरह असुरक्षित हैं और किसी की जान पर भारी पड़ सकते हैं. भवन मालिक थोड़े से किराए के लिए ऐसे असुरक्षित भवनों को किराए पर दे देते हैं. अधिकतर ऐसे घरों में किराएदार ही रहते हैं. ऐसे में उनकी जान से खेलना बिल्कुल गलत है. सभी पर नियम बराबर लागू होते हैं और कोई भी नियम की पालना नहीं करता है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
परस्पर विवाद बना भवन खाली कराने में चुनौती: उन्होंने बताया कि वह खुद जहां रहती हैं, उसके आसपास भी करीब 10 से 12 जर्जर इमारतें हैं, जिन्हें चिह्नित किया गया और नोटिस भी दिए गए, लेकिन इनमें से कुछ इमारतें ऐसी हैं जो परिवार के आपसी विवाद के चलते कोर्ट स्टे पर हैं. वहीं, कुछ में मकान मालिक और किराएदार के बीच इसी तरह का प्रकरण है. ऐसे भवनों को खाली कराना एक बड़ी चुनौती बन जाता है. इसके साथ ही अब दोबारा सर्वे भी करवाया जा रहा है, ताकि ऐसी इमारतें जो जर्जर अवस्था में हैं और गिर सकती हैं, उन्हें चिह्नित कर जल्द से जल्द खाली करवाया जाए. इसके साथ ही ऐलान करवाया जा रहा है. लोगों से भी मदद ली जा रही है कि यदि उनके घर के आसपास कोई जर्जर इमारत है तो सूचित करें.
रेस्क्यू सेंटर बनाए: उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल ही में सुभाष चौक क्षेत्र में जो हादसा हुआ, उस इमारत में रह रहे अन्य लोगों को पार्षद कार्यालय में शिफ्ट किया गया है. ऐसे और भी कोई लोग हैं जो जर्जर इमारत से शिफ्ट होना चाहते हैं, तो उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर स्थानीय सामुदायिक केंद्र, पार्षद कार्यालय के साथ-साथ रेस्क्यू सेंटर भी बनाए जाएंगे, जहां उन्हें ठहरने की व्यवस्था के साथ-साथ भोजन भी उपलब्ध कराया जाएगा.
आपको बता दें कि सुभाष चौक में हुए हादसे से पहले तक निगम प्रशासन की ओर से 178 जर्जर मकानों को नोटिस दिए गए थे. इनमें से तीन पर कार्रवाई करते हुए उन्हें ढहाया भी गया, जबकि 33 भवन मालिकों ने अपनी इमारत की मरम्मत करना सुनिश्चित किया. वहीं, अब दोबारा सर्वे करते हुए कुछ नए नोटिस जारी किए गए हैं और करीब 23 जर्जर भवनों को तुरंत खाली करने के निर्देश जारी किए गए हैं. निगम के निर्देशों को नहीं मानने पर भवन मालिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा.
ग्रेटर निगम भी चेता: उधर, ग्रेटर नगर निगम ने भी जर्जर मकानों की सुध लेते हुए कार्रवाई शुरू की है. निगम प्रशासन की ओर से मानसरोवर जोन में कार्रवाई करते हुए पांच मकानों को ध्वस्त किया गया है. वहीं, 17 जर्जर मकानों के मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं. इसके अलावा 27 मकानों को सील भी किया गया है. इस संबंध में आयुक्त गौरव सैनी ने बताया कि जर्जर भवन में रहने वाले दो परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है. एक जर्जर आंगनबाड़ी भवन को भी सील किया गया है. इसके अलावा ऐसे 10 जर्जर भवन हैं, जहां पहले नोटिस देने के बावजूद रहवासियों ने भवन खाली नहीं किया, तो अब मकान सील किए गए हैं.




















