राजसमंद : देशभर में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव शनिवार को बड़े हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है. राजस्थान के प्रसिद्ध श्रीकृष्ण मंदिर सीकर जिले के खाटूश्यामजी और राजसमंद जिले के नाथद्वारा में श्रीनाथजी मंदिर में जन्माष्टमी पर विशेष आयोजन किए जा रहे हैं. इस पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर और आसपास की गलियों को भव्य रूप से सजाया गया. खास बात है कि इस बार बाबा श्याम का शृंगार विशेष किस्म के विदेशी फूलों से किया गया. इन फूलों की अद्भुत खुशबू मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है. उधर, नाथद्वारा में शनिवार रात्रि 12 बजे भगवान के जन्म की खुशियां 21 तोपों की सलामी दे कर मनाई जाएगी.
श्याम मंदिर से दूसरे मंदिरों में जाएगा प्रसाद: खाटूश्याम जी में श्री श्याम मंदिर कमेटी के व्यवस्थापक संतोष कुमार ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी जन्माष्टमी पर खाटू क्षेत्र के लगभग 60–70 मंदिरों में विशेष प्रसाद भेजा जाएगा. इसमें पंचामृत, पंजीरी और अन्य मिठाइयां शामिल होंगी. साथ ही रात को रंग-बिरंगी आतिशबाजी से आकाश जगमगाएगा. इस अवसर पर शनिवार को खाटूधाम में विशेष भजन संध्या होगी. देशभर के प्रसिद्ध गायक बाबा श्याम की महिमा का गुणगान करेंगे और वातावरण को कृष्णमय बनाएंगे.
पारंपरिक प्रसाद का वितरण: जन्माष्टमी पर बाबा श्याम को पंचामृत, माखन-मिश्री और मावे का भोग लगाया जाएगा. भक्तों के बीच पारंपरिक प्रसाद धनिया की पंजीरी, पंचामृत और माखन-मिश्री का वितरण किया जाएगा. देर रात बारह बजे जब भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की वेला होगी, तब पूरे मंदिर परिसर में शंखनाद और घंटियों की गूंज के बीच महाआरती होगी. इसके बाद विशेष प्रसाद भक्तों को वितरित किया जाएगा.
VIP दर्शन रहेंगे बंद: जन्माष्टमी पर भारी भीड़ को देखते हुए शनिवार को खाटूश्यामजी मंदिर में वीआईपी दर्शन पूरी तरह से बंद रहेंगे. केवल वास्तविक वीआईपी और वीवीआईपी, जिन्हें सरकार की ओर से प्रोटोकॉल सूची में शामिल किया गया, उन्हीं को विशेष दर्शन की अनुमति होगी. आम भक्तों को लाइन में लगकर ही बाबा श्याम के दर्शन करने होंगे. प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त जाप्ता लगाया है.
21 तोप की सलामी से जन्म की खुशियां: उधर, नाथद्वारा में पुष्टिमार्गीय वल्लभ सम्प्रदाय की प्रधानपीठ श्रीनाथजी मंदिर में जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जा रही है. शनिवार सुबह 4:45 बजे पंचामृत स्नान व मंगला आरती के दर्शन हुए. इस दौरान कृष्ण स्वरूप श्रीनाथजी को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंचामृत से स्नान कराया व तिलक लगाकर आरती उतारी. दोपहर में श्रीजी के राजभोग के दर्शन होंगे व रात्रि जागरण के दर्शन मध्यरात तक होंगे व रात्रि 12 बजे जन्म की खुशियां 21 तोपों की सलामी दे कर मनाई जाएगी.
विशेष आकर्षण 21 तोप : कृष्ण भंडार के अधिकारी सुधाकर उपाध्याय ने बताया कि नंद राय के घर लालन होने की खुशी में 21 तोपों की सलामी दी जाती है. कहा जाता है कि गांव के मुखिया नंदराय के गांव व आसपास लोगों को यह सूचना मिल जाए कि नंदराय के घर उनके तारणहार का जन्म हो चुका है और लोग इसकी खुशियां मनाना शुरू करें. श्रीनाथजी करीब 350 वर्ष पूर्व मेवाड़ पधारें तब से यह परंपरा हर वर्ष निभाई जाती है. नाथद्वारा को बृज का रूप मानकर यहां आसपास के गांवों में लोग रात 12:00 बजे तोपों की आवाज सुनकर श्रीकृष्ण जन्म की खुशियां मनाते हैं. नाथद्वारा ही नहीं, वरन आसपास के गांवों और शहरों से लोग श्रीनाथजी के दर्शनार्थ आते हैं. रात 12:00 बजे होने वाले आयोजन को देखने बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं. रात 12:00 बजे मंदिर की छतरी से बिगुल बजाकर श्रीकृष्ण जन्म की सूचना देते हैं. बिगुल बजने के साथ ही इक्कीस तोपों की सलामी दी जाती है.
श्रीनाथजी की हवेली में उत्सव की धूम: उपाध्याय ने बताया कि जन्माष्टमी पर प्रभु के सेवा क्रम में तिलकायत राकेश महाराज व युवराज गोस्वामी विशाल बावा ने मंगला दर्शन में प्रातः श्रीजी प्रभु को दूध, दही, घी, शक्कर व शहद से भव्य पंचामृत स्नान कराया व प्रभु की आरती उतारी. श्रीजी प्रभु का विशेष शृंगार किया जाएगा. इसमें प्रभु को दोहरा शृंगार, चाकदार केसरी वस्त्र, श्री मस्तक पर मोर चंद्रिका का अद्भुत शृंगार धराया जाएगा. श्रीजी प्रभु के जन्मोत्सव पर शृंगार दर्शन में मंदिर के पंड्या परेश नागर श्रीजी प्रभु के सम्मुख प्रभु की जन्म पत्रिका का वाचन करेंगे. दोपहर में प्रभु को राजभोग आरोगाया जाएगा. श्रीनाथ बेंड व श्रीनाथ गार्ड श्रीजी प्रभु की सेवा में गोवर्धन पूजा चौक में पहुंचकर सलामी देंगे व श्रीनाथ बैंड मधुर स्वर लहरियां बिखेरेगा.
नंद उत्सव पर दूध दही की होली: रविवार सुबह 7:30 से 11:00 बजे तक नंदोत्सव मनाया जाएगा. प्रभु श्रीनाथजी ओर लालन को सोने के पालने में झुलाएंगे. झूलते लालन के दर्शन करवाएंगे. जन्मोत्सव की खुशी में ग्वाल बाल दूध दही से होली खेल कर खुशियां मनाएंगे. मंदिर में दर्शन करने आने वाले सभी लोगों संग ग्वाल बाल हल्दी केसर युक्त दूध दही से होली खेलेंगे. इसकी तैयारियां कर ली गई.
बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु: आम दिनों में श्रीनाथजी मंदिर में करीब 5 से 10 हजार लोग दर्शन करने आते हैं, लेकिन जन्माष्ठमी पर लगभग 50 से 60 हजार लोगों के आने की संभावना है. इसके लिए तैयारियां की गई. जिला कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा ने बताया कि जन्माष्टमी पर भारी संख्या में बाहर से दर्शनार्थी आते हैं. ऐसे में कई लोगों को ठहरने के लिए होटल, धर्मशाला में जगह नहीं मिल पाती. इस वर्ष नगर पालिका को अपने सामुदायिक भवनों में लोगों के ठहरे की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं. इमरजेंसी की स्थिति के लिए मेडिकल टीमों व दमकल की गाड़ियों का प्रबंध किया है. पूरे प्रशासन को अलर्ट पर रखा है.
यह रहेगा श्रीनाथजी के दर्शनों का समय: मंदिर मंडल सीईओ रक्षा पारिख ने बताया कि जन्माष्टमी पर श्रीनाथजी के दर्शनों का समय निम्न प्रकार से रहेगा—
- मंगला (पंचामृत) दर्शन-प्रातः 4.45 बजे
- शृंगार-प्रातः 09.30 बजे से लगभग एक घंटा तक
- राजभोग दर्शन- दोपहर 12.30 बजे से लगभग डेढ़ घंटे तक
- भोग-आरती दर्शन शाम 07.30 बजे से लगभग डेढ़ घंटे तक
- जागरण-दर्शन रात 09.30 बजे से लगभग तीन घंटे तक
रविवार को नंदोत्सव पर दर्शनों का समय
- केसर युक्त दही, छाछ छिड़काव-सुबह 07.30 से 11.00 तक
- मंगला/शृंगार-दोपहर 2.15 बजे से आधा घंटे तक
- राजभोग-दोपहर 02.15 बजे से लगभग एक घंटा तक
- उत्थापन रात्रि 07.00 से लगभग आधा घंटा व भोग-आरती रात्रि 08.00 बजे से लगभग एक घंटा
- नोट- सेवा-पूजा परम्परा एवं विधि-विधान से होने के कारण किसी भी दर्शन के समय में परिवर्तन संभव है.




















