राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के भादरा कस्बे में शनिवार को उस वक्त हंगामेदार माहौल बन गया जब जनसमस्याओं को लेकर उपखंड कार्यालय पहुंचे पूर्व विधायक डॉ. सुरेश चौधरी और एसडीएम कल्पित शिवराण के बीच जोरदार बहसबाजी हो गई। मामला इतना गरमाया कि दोनों के बीच तू-तड़ाक और धमकियों का आदान-प्रदान तक हो गया। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
दरअसल, इलाके में बिजली, पानी और मूलभूत सुविधाओं को लेकर जन चेतना मंच की अगुवाई में एक प्रदर्शन किया जा रहा था। इसी क्रम में पूर्व विधायक अपने समर्थकों के साथ एसडीएम ऑफिस पहुंचे और अधिकारी से बाहर आकर ज्ञापन लेने की मांग करने लगे। लेकिन जब एसडीएम काफी देर तक बाहर नहीं आए, तो विधायक का पारा चढ़ गया और वह गुस्से में अपने समर्थकों के साथ सीधे एसडीएम के चेंबर में जा पहुंचे।
चेंबर में हुई बहस में मामला इस कदर बिगड़ा कि एसडीएम ने पूर्व विधायक से कहा – “तेरे जैसे बहुत देखे हैं,” जिस पर भड़के डॉ. सुरेश चौधरी ने पलटवार करते हुए कहा – “तू मुझे जानता नहीं है, ठीक कर दूंगा।” इसके बाद माहौल पूरी तरह गरमा गया और दोनों के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई। मामले को शांत कराने के लिए कर्मचारियों को बीच-बचाव करना पड़ा।
भीषण गर्मी बनी बहस की वजह
पूर्व विधायक और उनके समर्थक इस बात से नाराज थे कि इतनी गर्मी और उमस में भी अधिकारी बाहर नहीं आए। उनका कहना था कि जब जनता बाहर धूप में खड़ी है तो अधिकारी को बाहर आकर ज्ञापन लेना चाहिए था। लेकिन इसके बजाय SDM ने अंदर से ही जवाब भेजा, जिससे विधायक और प्रदर्शनकारी और भड़क गए।
2003 में बने थे विधायक, अब भी हैं सक्रिय
गौरतलब है कि डॉ. सुरेश चौधरी वर्ष 2003 में भादरा से निर्दलीय विधायक चुने गए थे। इससे पहले 1993 में वे कांग्रेस के टिकट पर भी चुनाव लड़ चुके थे। चौधरी अपनी तेजतर्रार छवि और जनहित मुद्दों पर आक्रामक तेवर के लिए जाने जाते हैं। वर्तमान में वे जन चेतना मंच के माध्यम से लगातार जनसमस्याएं उठाते रहते हैं।
राजनीति बनाम प्रशासन?
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के रिश्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर लोग जनप्रतिनिधि के तेवर को जनहित की लड़ाई बता रहे हैं, वहीं कुछ लोग अधिकारी से इस तरह की भाषा को अनुशासनहीनता कह रहे हैं। वायरल वीडियो में दोनों पक्षों की जुबानी जंग साफ तौर पर सुनी जा सकती है।
अब आगे क्या?
फिलहाल मामला सोशल मीडिया से निकलकर जनता और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन चुका है। अभी तक किसी पक्ष की ओर से आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है, लेकिन पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या जनप्रतिनिधि और अधिकारी एक-दूसरे को धमकाते रहेंगे या मिलकर जनता के मुद्दों का हल निकालेंगे?
वीडियो वायरल होते ही बहस तेज, लेकिन जवाब कौन देगा?
हनुमानगढ़ में मचे इस राजनीतिक घमासान ने फिर से साबित कर दिया है कि जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच सामंजस्य की सख्त जरूरत है। क्योंकि अगर बहस, धमकी और टकराव ही आम हो जाएं, तो समाधान की उम्मीद कौन करेगा?




















