जयपुरः 16 वीं राजस्थान विधानसभा के चौथे सत्र के दूसरे दिन स्मार्ट मीटर को लेकर सदन में जमकर सियासी हंगामा बरपा. सदन की कार्यवाही बुधवार को शुरू तो शांत वातावरण में हुई, लेकिन प्रश्नकाल में स्मार्ट मीटर को लेकर लगे सवाल पर हंगामा शुरू हो गया. विधानसभा अध्यक्ष ने चेतावनी के साथ हंगामा शांत कराने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष सवाल के जवाब पर अड़ा रहा. जब सवाल का संतुष्टिपूर्ण जवाब नहीं मिला तो विपक्ष ने सदन की कार्यवाही से बहिर्गमन कर दिया. इसके बाद सदन में संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने विपक्ष को लेकर सवाल उठाए तो नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार सवाल के जवाब से भाग रही है. चोरों की तरह पीछे से सदन में जवाब दे रही है.’ इस पर सत्ता पक्ष की ओर से उद्योग मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि मैदान छोड़कर विपक्ष भाग रहा है और आरोप हम पर लगा रहा है.
दरअसल, विधानसभा में कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा ने स्मार्ट मीटर को लेकर प्रश्न पूछा था. सवाल था कि क्या आपने नगर निकाय और पंचायत चुनाव को देखकर स्मार्ट मीटर बंद किए हैं? उस कंपनी का क्या होगा, जिसको 14 हजार करोड़ के टेंडर दिए हैं. क्या आप स्मार्ट मीटर स्थायी रूप से खत्म कर रहे हैं या सिर्फ चुनाव तक ही?
इस पर बिजली मंत्री हीरालाल नागर ने जवाब दिया कि पिछली सरकार की कैबिनेट ने 2022 में अनुमोदन किया गया था. मंत्री ने कहा कि आपके कारनामे सामने आने चाहिए, इसलिए मैं जवाब दे रहा हूं. उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से तल्खी से कहा, ‘आपका पूछने का अधिकार है, मेरा जवाब देने का.’ उन्होंने कहा कि केंद्र से मिलने वाली राशि तब तक प्राप्त नहीं कर सकते, जब तक 25 प्रतिशत स्मार्ट मीटर सरकारी कार्यालयों में नहीं लगा देंगे, इसलिए सरकारी कार्यालयों में ये मीटर लगाए जा रहे हैं. नए कनेक्शन पर पेंडेंसी ज्यादा थी, इसलिए पुराने मीटर लगाने के निर्देश दिए गए हैं. इसके बाद रोहित बोहरा ने पूछा कि क्या नगर निगम और पंचायतीराज चुनाव को देखकर ही अधिसूचना निकाली गई? क्या स्मार्ट मीटर चुनाव के बाद फिर से लगेंगे? साथ ही, जिस कंपनी को टेंडर दिए, उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? इस पर मंत्री ने कहा कि जब स्मार्ट मीटरों की पर्याप्त उपलब्धता होगी, तो उन्हें बदला जाएगा. स्थाई रूप से प्रक्रिया को रोका नहीं गया है. विधायक रोहित बोहरा ने एक अन्य प्रश्न पूछा कि क्या स्मार्ट मीटर की योजना भारत सरकार के द्वारा थोपी गई योजना है? मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि थोपी हुई योजना नहीं है, राज्य चाहे तो इसे स्वीकार कर सकता है. उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया कांग्रेस सरकार के समय हुई थी और अगर किसी भ्रष्टाचार की आशंका है तो उन्हें अपने समय की स्थिति देखनी चाहिए.
सदन से किया वॉकआउट: प्रश्नकाल के दौरान सदन में नारेबाजी भी होती रही. विपक्ष ने लगातार आरोप लगाया कि सवाल का जवाब नहीं दिया जा रहा है. सरकार जवाब देने से बच रही है. मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में सदन से वॉकआउट किया. इससे पहले कांग्रेस विधायकों ने वेल में आकर नारेबाजी की.
‘चोर-मैदान छोड़’ की सियासी बयानबाजी: विपक्ष के वॉकआउट के बाद संसदीय कार्य मंत्री पटेल ने कहा कि इन्होंने (कांग्रेस) ने ही स्मार्ट मीटर योजना लागू की और यही बेवजह हंगामा कर रहे हैं. मंत्री का जवाब सुनना नहीं चाहते, बनावटी आंसू बहाकर हंगामा किया और बहिर्गमन कर दिया. यह कांग्रेस की फितरत का हिस्सा है. पटेल के बयान का नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विरोध किया. उन्होंने कहा कि यह परिपाटी गलत है. सदन से जब विपक्ष ने बहिर्गमन किया, उसके बाद चोरों की तरह बात की जा रही है, पीछे से क्यों बोलते हैं? अगर सत्ता पक्ष में सवालों के जवाब का सामना करने की हिम्मत है तो सामने जवाब दें? जब विपक्ष सदन में उपस्थित नहीं है, उस समय इस तरह की बयानबाजी ठीक नहीं. विपक्ष के सामने जवाब देंगे तो पता लग जाएगा कि यह सरकार 2 साल से कैसे चल रही है. इसके बाद सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत खड़े हुए और उन्होंने कहा कि जिस योजना पर कांग्रेस हंगामा खड़ा कर रही है, वह उनकी सरकार में लागू की गई थी. आज जब उनके काले चिट्ठे हमारे मंत्री खोल रहे हैं, तो वे बौखला रहे हैं. इसके बाद उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ खड़े हुए. उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, आप यह बताएं कि जब विपक्ष सदन छोड़कर चला गया, तो यह सदन चुप थोड़े ही रहेगा. हम तो अपनी बात बोल रहे थे. मैदान छोड़कर तो आप ही गए, यदि यहां मौजूद रहते तो आपके सामने ही जवाब आपको मिल जाता है.




















