यूपीएससी सिविल सेवा की परीक्षा में अच्छी रैंक आने के बाद आईपीएस की नौकरी (Sarkari Naukri) मिलती है. इसके बाद उनके कार्य अनुभव के आधार पर अलग-अलग विभागों में प्रमुख बनाया जाता है. अभी हाल ही में भारत सरकार ने सीनियर आईपीएस ऑफिसर पराग जैन (IPS Parag Jain) को देश की बाहरी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) का अगला प्रमुख नियुक्त किया है. वह 1 जुलाई 2025 से इस पद पर कार्यभार संभालेंगे. वे मौजूदा प्रमुख रवि सिन्हा की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है.
MA, MBA की हासिल कर चुके हैं डिग्री
पराग जैन पंजाब कैडर के 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. उन्हें दो साल के निश्चित कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है. केंद्र सरकार की नियुक्ति समिति ने 28 जून को उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी. इंडियन पुलिस सर्विस सिविल लिस्ट 2023 के अनुसार पराग जैन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. उन्होंने इतिहास में पोस्टग्रेजुएट की डिग्री हासिल की हैं. इसके अलावा उन्होंने पब्लिक सर्विस में MBA भी कर चुके हैं.
‘सुपर जासूस’ के नाम से मशहूर, HUMINT और TECHINT में माहिर
खुफिया क्षेत्र में ‘सुपर जासूस’ के रूप में पहचाने जाने वाले जैन को मानव खुफिया (HUMINT) और तकनीकी खुफिया (TECHINT) के बेहतरीन समन्वय के लिए जाना जाता है. अधिकारियों के अनुसार उनका यह स्किल कई बड़े और संवेदनशील ऑपरेशनों में अहम साबित हुआ है.
ऑपरेशन सिंदूर में निभाई बड़ी भूमिका
पराग जैन के सबसे चर्चित योगदानों में से एक रहा है ‘ऑपरेशन सिंदूर’, जिसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए गए थे. हालांकि हमले कुछ ही मिनटों में हुए लेकिन इसके पीछे सालों की तैयारी और नेटवर्किंग थी, जिसे जैन ने बखूबी अंजाम दिया. भारत के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक जम्मू और कश्मीर में उनका जमीनी अनुभव काफी मजबूत रहा है. मौजूदा वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए यह अनुभव उनकी नियुक्ति को और भी महत्वपूर्ण बनाता है.
विदेशी मिशनों में अनुभव, नेशनल इंटेलिजेंस में सशक्त भूमिका
जैन कनाडा और श्रीलंका में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. उन्हें पहले भी केंद्र में DGP रैंक के समकक्ष पदों के लिए नामित किया गया था, जो उनकी खुफिया नेतृत्व की साख को दर्शाता है. वर्ष 2021 में उन्हें पंजाब के DGP के पद पर पदोन्नत किया गया, हालांकि वे उस समय सेंट्रल डेपुटेशन पर थे.




















