जयपुर: राज्य मुख्य निर्वाचन आयुक्त की ओर से ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ को व्यावहारिक नहीं बताए जाने के बाद नगरीय निकाय चुनावों को लेकर एक बार फिर असमंजस की स्थिति बन गई है. इस बीच यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने अभी भी दिसंबर 2025 में राज्य की सभी 309 नगरीय निकायों के एक साथ चुनाव कराए जाने का दावा किया है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कानून में संशोधन करने की आवश्यकता होगी तो वह भी किया जाएगा. हाल ही में पंचायती राज चुनावों को लेकर उच्च न्यायालय का निर्णय आया है, इसमें छह महीने के भीतर इन चुनावों के आयोजन के निर्देश दिए गए हैं. राज्य निर्वाचन आयोग ने हाई कोर्ट के आदेश के तहत अगले दो महीनों में सारी प्रक्रियाएं पूरी कर चुनाव कराने की बात कही है. आयोग ने यह भी दावा किया है कि आगामी 10 दिनों में निकाय और पंचायती राज चुनावों की घोषणा कर दी जाएगी. साथ ही आयोग ने कहा कि संविधान में संशोधन न होने तक ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ के विचार पर अमल करना संभव नहीं है.
इस पर यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि जिस तरह की तैयारियां हैं, उसके मुताबिक छह महीने की अवधि से पहले ही चुनाव करा दिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि सरकार शुरू से ही इसका प्रयास कर रही है कि दिसंबर 2025 में राजस्थान के सभी 309 नगरीय निकायों के चुनाव ‘एक राज्य, एक चुनाव’ के तहत हों. उनका मानना है कि उच्च न्यायालय का यह निर्णय सरकार के रास्ते में कोई बाधा उत्पन्न नहीं करेगा, क्योंकि छह महीने की अवधि फरवरी 2026 में समाप्त होगी, जबकि सरकार दिसंबर 2025 में ही चुनाव कराना चाहती है.
चुनाव आयोग द्वारा ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ को अव्यावहारिक बताए जाने पर मंत्री खर्रा ने कहा कि नगरीय निकायों और पंचायती राज के चुनावों में एक बड़ा अंतर यह है कि नगरीय निकायों का कार्यकाल फरवरी 2026 में समाप्त होगा, जबकि पंचायती राज निकायों के कार्यकाल में काफी अंतर है. इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग की टिप्पणी पर वह अधिक कुछ कहना नहीं चाहते. उन्होंने बताया कि राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले की प्रमाणित प्रति मंगवाई जा रही है. इसका अध्ययन किया जाएगा, कानूनी राय ली जाएगी और यदि कानून में संशोधन की आवश्यकता होगी, तो उसमें संशोधन भी किया जाएगा.




















