कोटा: प्रदेश के मेडिकल डेंटल कॉलेज में नीट यूजी के परिणाम के आधार पर चल रही 85 फीसदी स्टेट कोटा काउंसलिंग में मेरिट लिस्ट जारी कर दी गई है. इसके पहले सीट मैट्रिक्स भी जारी कर दी गई थी. प्रदेश में एनआरआई कोटे में एमबीबीएस के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज की 455 सीटें है, जबकि इसके लिए रजिस्टर्ड 186 कैंडिडेट हुए थे. इनमें से 128 कैंडिडेट ही पात्र माने गए है. इनकी सूची मेडिकल डेंटल काउंसलिंग बोर्ड ने जारी कर दी है. ऐसी स्थिति में सभी 128 एनआरआई कैटेगरी के पात्र कैंडिडेट को एमबीबीएस सीट मिलना तय है. इस कैटेगरी में किसी तरह की वेटिंग नहीं रहेगी.
एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा ने बताया कि काउंसलिंग बोर्ड ने एनआरआई कैटेगिरी में 186 कैंडिडेट्स के दस्तावेज की जांच की थी. इसमें से 128 पात्र मिले है, जबकि 58 कैंडिडेट्स को अपात्र घोषित किया गया है. राजस्थान में एनआरआई कैटेगरी के विद्यार्थियों की चांदी है, क्योंकि रजिस्टर्ड कैंडिडेट से ज्यादा सीट्स यहां पर हैं. पात्र घोषित किए गए 128 कैंडिडेट्स में राजस्थान के हालांकि 51 ही है, जबकि शेष 77 कैंडिडेट दूसरे राज्यों से है. इनमें उत्तर प्रदेश से 25, हरियाणा से 19, पंजाब से 10 और दिल्ली से 7 हैं. इन कैंडिडेट्स में मेल-फीमेल देखा जाए तो 67 गर्ल्स कैंडिडेट हैं, जबकि 61 बॉयज हैं. एनआरआई कैटेगरी की फीस काफी ज्यादा होने के चलते यह सीट्स खाली रहती है, लेकिन काफी नीचे रैंक वाले कैंडिडेट भी इसमें सीट ले लेते हैं.
राजस्थान में एक सीट पर तीन में मुकाबला: मेडिकल डेंटल काउंसिल बोर्ड ने जयपुर काउंसलिंग के राउंड 1 की स्टेट कंबाइंड स्टेट मेरिट सूची जारी की है. यह 625 पेज की मेरिट सूची है, जिसमें 13 हजार 731 कैंडिडेट्स शामिल हैं. इसमें सबसे ऊपर ऑल इंडिया रैंक 245 लाने वाले राजस्थान के कैंडिडेट का नाम है, जबकि टॉप एक हजार ऑल इंडिया रैंक तक वाले महज 18 कैंडिडेट्स हैं. राजस्थान में 85 फीसदी कोटा काउंसलिंग में एमबीबीएस सीट्स की बात की जाए तो 41 मेडिकल कॉलेज में 5418 हैं, जबकि 30 सरकारी कॉलेज की 3618 सीट हैं. इसी प्रकार 11 कॉलेज में 1800 सीट है. एनआरआई सीट्स को निकाल दिया जाए तो 4963 सीट होगी. ऐसे में लगभग 3 कैंडिडेट्स एक सीट के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि एनआरआई कैटेगरी में स्थिति उलट है.
एनआरआई कैटेगरी में है 1.5 करोड़ फीस: सरकारी मेडिकल कॉलेज में 6 लाख रुपए में एमबीबीएस की डिग्री पूरी हो जाएगी, जबकि मैनेजमेंट कोटे में यह फीस 45 लाख रुपए के आसपास है. इसी प्रकार निजी मेडिकल कॉलेज की बात की जाए तो यहां पर स्टेट नेचर की सीट पर 1.10 करोड़ में एमबीबीएस हो रही है. वहीं मैनेजमेंट कोटे की फीस पर यह 1.40 करोड़ के आसपास है, जबकि एनआरआई कोटा में यह फीस सरकारी मेडिकल कॉलेज में 1.5 करोड़ है. इस फीस में हॉस्टल का खर्चा नहीं जोड़ा गया है, इसलिए कई कैंडिडेट अपनी कैटेगरी बदल कर एनआरआई कर सरकारी मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई कर लेते हैं, इसकी सीट्स भी खाली रह जाती है.
हर साल खाली रह जाती है सीट: राजस्थान के पुराने मेडिकल कॉलेज में आरयूएचएस जयपुर, अजमेर, उदयपुर, कोटा और राजमेस सोसायटी के कॉलेज झालावाड़ में ही एनआरआई कोटा की सीट्स है. इनमें 98 सीट है. ऐसे में एनआरआई लिस्ट के टॉप कैंडिडेट्स इन कॉलेज में एडमिशन ले लेते हैं, जबकि शेष 357 सीट एनआरआई सीट्स नए मेडिकल कॉलेज में हैं. यहां पर अधिकांश कैंडिडेट एडमिशन लेने से कतराते हैं. इसके चलते यहां पर सीट्स खाली रहती है. बाद में इन खाली सीटों को मैनेजमेंट कोटे में तब्दील कर भरा जाता है. इसी तरह से इस बार सेंट्रल काउंसलिंग में भी पहले जहां साल 2024 में 1037 कैंडिडेट एनआरआई के जरिए रजिस्टर्ड हुए थे. इस बार नेशनल मेडिकल कमिशन की सख्ती है और एमसीसी ने केटेगिरी बदलने का मौका नहीं दिया था. इससे 2025 में केवल 188 कैंडिडेट ही इस कैटेगरी में रजिस्टर्ड हुए थे. वहां भी सीट खाली रहती है.
किस राज्य से कितने रजिस्टर्ड एनआरआई कैंडिडेट किस
- राजस्थान-51
- उत्तर प्रदेश-25
- हरियाणा-19
- पंजाब-10
- दिल्ली-7
राजस्थान की सरकारी कॉलेज में कितनी सीट:
- अजमेर, कोटा, उदयपुर, सीकर, चित्तौड़गढ़, श्रीगंगानगर, धौलपुर, बूंदी, दौसा, अलवर, करौली, हनुमानगढ़, झुंझुनूं, नागौर, सवाई माधोपुर, बारां व बांसवाड़ा – 15
- सिरोही -14
- बाड़मेर -20
- भीलवाड़ा, डूंगरपुर, पाली, आरयूएचएस जयपुर -23
- चूरू व भरतपुर -22
- झालावाड़ -30




















