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पुष्कर के रंगजी मंदिर में धूमधाम से मनाया नंदोत्सव, हांडी फोड़कर लूटा दही, मलखंब ने किया सबका मन मोह

अजमेर: पुष्कर में दक्षिण शैली से निर्मित दो प्रमुख मंदिर पुराने रंगजी और नए रंगजी का मंदिर है. दोनों मंदिरों की पूजा पद्धति और परंपरा तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर है. दोनों मंदिरों में सोमवार को नंदोत्सव धूमधाम से मनाया गया. भगवान की सवारी निकाली. दोनों मंदिरों में कृष्ण लीला और दही हांडी आयोजन हुआ. मलखंब पर ग्वालों ने चढ़कर इनाम जीता. एक सदी से अधिक समय से दोनों दक्षिण शैली के मंदिरों में नंद उत्सव मनाया जा रहा है. भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे.

तीर्थ नगरी पुष्कर में एक सदी से पुराने रामानुज संप्रदाय के पुराना रंगजी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव रविवार रात मनाया गया. सोमवार शाम नंदोत्सव में बाल गोपाल श्री कृष्ण की लीलाओं को देखने श्रद्धालु पंहुचे. मंदिर में भगवान श्रीरघुनाथजी की सवारी निकाली गई. उसके बाद दही हांडी में बाल गोपाल बने बस्ती के युवाओं ने हांडी तोड़ने के लिए काफी मशक्कत की. जब हांडी टूटी तो दही, मक्खन, फल, मेवे लूटने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ मच गई. ग्वाल बने दो युवक चिकने मलखंब पर चढ़ने का प्रयास करते रहे. अन्य ग्वाल रोकते रहे. आखिर डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद एक ग्वाला मलखंब पर चढ़ने में कामयाब रहा. मलखंब पर लगी झंडी उतारी. झंडी के साथ ग्वाले को इनाम मिल गया.

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मंदिर में आयोजन समिति के पदाधिकारी सत्यनारायण बताते हैं कि रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ. रविवार देर रात भगवान का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया. सोमवार शाम कृष्ण लीला में भगवान किस प्रकार से मक्खन लूटा करते थे. कृष्ण जन्म से अगले दिन नंद उत्सव में कृष्ण लीलाएं हुई.

100 बरस से नंदोत्सव की परंपरा: नए रंग जी के मंदिर की स्थापना 100 बरस पहले हुई थी. तब से नंदोत्सव मनाया जा रहा है. मंदिर के प्रबंधक सत्यनारायण रामावत बताते हैं कि नए रंगजी का मंदिर का नाम श्रीरमा बैकुंठ नाथ मंदिर है. नंदोत्सव की परंपरा झूला उत्सव का ही भाग है. नन्द उत्सव में दही हांडी कार्यक्रम हुआ. बस्ती के युवा कृष्ण और ग्वाल का रूप धरे आए. काफी मशक्कत से ग्वाल बाल और श्री कृष्णा दंडी से मटकी को तोड़ा व दूध मक्खन लूटा. मंदिर में 30 फीट ऊंचा मलखंब है, जिस पर पांच दिन से मुल्तानी मिट्टी, काली चिकनी मिट्टी, सलेस और दाना मेथी का लेप किया. यह लीला स्वंय भगवान के सामने होती है. मंदिर से परिसर में भगवान की सवारी निकाली गई. मलखंब के ऊपर झंडी के साथ नगद इनाम रखा. कृष्ण बने दो युवकों ने मलखंब पर चढ़ने का प्रयास किया. मलखंब पर लगी झंडी उतारने के बाद उत्सव संपन्न हुआ.

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