जयपुर: राजस्थान बीजेपी में नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब लगभग खत्म होने वाला है. पार्टी के जिला और मंडल स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक के कार्यकर्ताओं में इस सूची को लेकर उत्सुकता और उत्साह चरम पर है. सूत्रों के मुताबिक रक्षाबंधन के ठीक बाद, यानी इस महीने के अंत या अगले सप्ताह की शुरुआत में, नई टीम की घोषणा हो सकती है. इसको लेकर जयपुर से लेकर दिल्ली तक कई दौर की चर्चा पूरी हो चुकी है और केंद्रीय नेतृत्व ने भी अधिकांश नामों पर अपनी सहमति जता दी है.
सत्ता और संगठन का मिश्रण: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने खुद इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने सभी वरिष्ठ नेताओं और पूर्व प्रदेश अध्यक्षों से व्यक्तिगत मुलाकात कर उनके सुझाव लिए हैं. माना जा रहा है कि इस बार टीम में सत्ता और संगठन का संतुलन साधा जाएगा. यानी मौजूदा मंत्रियों को भी संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है. राठौड़ ने बयान देते हुए स्पष्ट किया कि भाजपा में सत्ता से संगठन और संगठन से सत्ता में आना-जाना सामान्य प्रक्रिया है. उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता सिपाही की तरह है, जहां भेजा जाएगा वही काम करेगा.
इस बयान ने प्रदेश की सियासी हलचल को और तेज कर दिया है, क्योंकि यह संदेश भी निकल रहा है कि आने वाले समय में मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है. जिन मंत्रियों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा है, उन्हें संगठन में लाकर उनके अनुभव का इस्तेमाल दूसरी दिशा में किया जा सकता है. वहीं, संगठन में सक्रिय और प्रभावी नेताओं को सरकार में भी मौका मिल सकता है.
नई टीम में कौन होगा शामिल?
राजनीतिक विश्लेषक विवेकानंद ने बताया कि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बार की कार्यकारिणी में 33 फीसदी महिलाओं को शामिल करने का प्रयास किया जाएगा. यह भाजपा की राष्ट्रीय स्तर पर घोषित नीति के अनुरूप भी है, जिसमें महिला नेताओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया जाता है.
उपाध्यक्ष पद पर संभावित नाम:
- नाहर सिंह जोधा (बरकरार रह सकते हैं)
- ज्योति मिर्धा (बरकरार रह सकती हैं)
- अनिता कटारा
- विजेंद्र पूनिया
- हरिराम रिणवा (शेखावाटी अंचल से)
महामंत्री पद पर संभावित नाम:
- श्रवण सिंह बगड़ी (बरकरार रह सकते हैं)
- मिथलेश गौतम (प्रमोशन)
- भूपेंद्र सैनी (प्रमोशन)
- अर्चना मीणा (पूर्व सांसद जसकौर मीणा की बेटी, नया चेहरा)
मंत्री पद पर संभावित नाम:
- आईदान सिंह भाटी (बरकरार रह सकते हैं)
- एकता अग्रवाल (विद्यार्थी परिषद से जुड़ी)
- नीलम गुर्जर (दौसा से जिला प्रमुख प्रत्याशी रही)
ये हो सकते हैं बाहर
- चुन्नीलाल गरासिया (वर्तमान में राज्यसभा सांसद)
- सी.आर. चौधरी (वर्तमान में किसान आयोग के अध्यक्ष), दामोदर अग्रवाल (भीलवाड़ा से सांसद)
- ओमप्रकाश भड़ाना (देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष) में होने के चलते प्रदेश टीम से बाहर किया जा सकता है.
- इसके अलावा मौजूदा प्रदेश टीम में 10 से ज्यादा पदाधिकारियों को हटाए जाने की संभावना है.
इन नेताओं को उनके मौजूदा दायित्वों के चलते संगठन से बाहर किया जा सकता है. इसके अलावा, मौजूदा टीम के 10 से अधिक पदाधिकारियों को हटाने की संभावना है, जिससे नए चेहरों के लिए जगह बन सके.
राजनीतिक विश्लेषक विवेकानंद का मानना है कि नई टीम में 50 फीसदी पुराने और 50 फीसदी नए चेहरों का मिश्रण होगा. इससे एक ओर संगठन का अनुभव कायम रहेगा और दूसरी ओर नए चेहरों की ऊर्जा का लाभ मिलेगा. राठौड़ पहले ही गुटबाजी खत्म करने के लिए सभी बड़े नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं और इस फार्मूले को नई टीम में भी अपनाने की योजना है.
2028 की तैयारी अभी से: विवेकानंद का कहना है कि 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा अभी से अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुट गई है. राठौड़ का कार्यकाल फरवरी 2028 तक है, इसलिए संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करना, युवा और जमीनी कार्यकर्ताओं को आगे लाना, आदिवासी और दलित समुदाय को जोड़ना और महिला नेताओं की भागीदारी बढ़ाना उनके एजेंडे में शामिल है. नई कार्यकारिणी के गठन से न केवल भाजपा का आंतरिक ढांचा मजबूत होगा, बल्कि यह आने वाले उपचुनावों और निकाय चुनावों में भी पार्टी को मनोबल बढ़ाने में मदद करेगा.




















