जयपुर : विधानसभा का मानसून सत्र पहले ही दिन हंगामेदार रहा. कांग्रेस ने ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ का नारा लगाते हुए विधानसभा परिसर में धरना दिया. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट सहित कांग्रेस के तमाम विधायक ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ के स्लोगन वाली टी शर्ट पहनकर और हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन करने लगे, हालांकि, आज विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा नहीं पहुंचे.
झालावाड़ के मृतक बच्चों को श्रद्धांजलि नहीं दी : मीडिया से बातचीत में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने शोकाभिव्यक्ति के दौरान झालावाड़ के मृतक बच्चों को श्रद्धांजलि नहीं देने का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि आज सदन में राजनीतिज्ञ और जो बड़े हादसे हुए हैं उनमें मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. जो कश्मीर में आपदा में मारे गए हैं, उत्तराखंड में मारे गए, गुजरात में मारे गए, उन्हें श्रद्धांजलि दी गई, लेकिन झालावाड़ के वो मासूम बच्चे जो अपने माता-पिता से यह कह कर गए थे कि हम स्कूल गए हैं और वापस नहीं आए, उन्हें श्रद्धांजलि नहीं दी गई. उन बच्चों को प्राकृतिक आपदा ने नहीं बल्कि सरकार के सिस्टम ने मारा है. बच्चों के लिए 2 मिनट का मौन तक नहीं रखा गया.
सरकार के पास संवेदना नहीं : जूली ने कहा कि राजस्थान में मंत्री कह चुके हैं कि बाढ़ से कई लोगों की मौत हुई है, जिसके लिए सदन में आवाज उठाते हैं तो माइक बंद कर दिया जाता है. व्यवस्था पर सवाल करना हमारा अधिकार है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मृतक बच्चों के घर नहीं पहुंचे. यहां तक कि विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी भी झालावाड़ गए थे, लेकिन एक अन्य कार्यक्रम में चले गए, लेकिन बच्चों के यहां नहीं गए. यह सरकार पूरी तरह से संवेदनहीन हो चुकी है. चाहे जनता बाढ़ से मरे, बरसात से मरे या प्यासी मरे. इस सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता है. चारों तरफ अतिवृष्टि हो रही है, तबाही का मंजर है, लेकिन सरकार के पास संवेदना नाम की कोई चीज नहीं बची है.
आदर्श नगर के एक मकान में 500 वोट : विधानसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक रफीक खान ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में एक मकान के एड्रेस पर 500 वोट जुड़े हुए हैं, जिनका वेरिफिकेशन करने जाता हूं तो वहां पर केवल पांच लोग मिलते हैं. देश में कोई भी चुनाव हो लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए. कोई फर्जीवाड़ा नहीं होना चाहिए. अगर हम सबूत मांग रहे हैं तो इसमें सरकार को क्या आपत्ति है? अगर हम डिजिटल कॉपी मांगते हैं तो सरकार को इसमें क्या आपत्ति है? जिसके नाम डबल जुड़े हुए हैं उनके नाम हटने चाहिए. अगर एक मकान पर 100 वोट जुड़े हुए हैं और एक मकान पर 500 वोट जुड़े हुए हैं तो क्या उसके बारे में सबूत मांग कर हम गलती कर रहे हैं? वोट चोरी का मामला विधानसभा और संसद में उठाया जा रहा है. सरकार और इलेक्शन कमीशन को चाहिए कि जो गलतियां हुई उसे ठीक करनी चाहिए.




















