बीकानेर : सनातन धर्म में भगवान विष्णु को जगत का पालनहार कहा गया है और एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी जो की श्राद्ध पक्ष में पड़ती है. इस बार यह एकादशी 17 सितंबर को है. आश्विन माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी का विशेष महत्व शास्त्रों में बतलाया गया है. पितृपक्ष के दौरान आने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी कहते हैं. पितृपक्ष के दौरान आने वाली एकादशी की चलते इसका महत्व बढ़ जाता है.
पितृ होते हैं प्रसन्न : बीकानेर के पंडित आनंद व्यास कहते हैं कि हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि हमारे पूर्वज इन दिनों हमें आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी पर आते हैं. इसीलिए आश्विन कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी काफी महत्वपूर्ण होती है. इसे इंदिरा एकादशी कहते हैं.
एकादशी के दिन क्या करें : पंडित आनंद व्यास कहते हैं कि इस बार इंदिरा एकादशी के दिन दिन सबसे पहले पूजा का संकल्प लेना चाहिए और अपने पूर्वजों को याद करना चाहिए. उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष में पड़ने वाली इंदिरा एकादशी का व्रत घर के सभी सदस्य को करना चाहिए. इस दिन घर के सभी सदस्यों को एकादशी का व्रत रखते हुए इसे अपने पूर्वजों की निमित्त अर्पित करना चाहिए.
इन काम से करना चाहिए परहेज : वैसे तो एकादशी तिथि के दिन कपड़े धोने बाल काटने और शेविंग करने के साथ ही घर में पोंछा लगाने से परहेज करना चाहिए. वही एकादशी तिथि के दिन चावल नहीं खाने चाहिए.
कब होगा पारना : आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 16 सितंबर को रात 12 बजकर 23 मिनट से आरंभ हो रही है, जो 17 सितंबर को रात 11 बजकर 40 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदया तिथि के हिसाब से इंदिरा एकादशी का व्रत 17 सितंबर 2025 को रखा जाएगा. इंदिरा एकादशी के दिन पारण 18 सितंबर को सुबह 6 बजकर 7 मिनट से आरंभ होगा, जो 8 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगा.




















