जयपुर: राजस्थान सरकार के संस्कृत शिक्षा विभाग ने नियुक्ति के समय फर्जी निशक्तजन प्रमाण पत्र लगाने वाले चार वरिष्ठ अध्यापकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है. इन शिक्षकों के प्रमाण पत्र एसएमएस अस्पताल की जांच झूठे साबित हुए. इसके बाद विभाग ने इन्हें अपात्र मानते हुए राजकीय सेवा से मुक्त करने का आदेश जारी किया.
संस्कृत शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आदेशानुसार वरिष्ठ अध्यापक ( संस्कृत शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा-2022 में निशक्त जन श्रेणी में चयनित अभ्यर्थियों को दिसंबर 2024 में नियुक्ति दी गई थी. नियुक्ति के बाद इन अभ्यर्थियों की ओर से पेश निशक्तजन प्रमाण पत्र का सत्यापन एसएमएस अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी से करवाया गया. इसमें संस्कृत शिक्षा के चार वरिष्ठ अध्यापक विष्णु कुमार, सुरेंद्र सिंह, लोकेश राठौड़ और संजीव कुमार हैं.
संस्कृत शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि कांग्रेस शासन काल में संस्कृत विभाग में जो लोग नौकरी लगे थे, उसमें कुछ शिक्षक ऐसे थे, जिनके दिव्यांग प्रमाण पत्र फर्जी थे. ऐसी शिकायतें मिलने पर जांच करवाई गई. जांच में पाया गया कि उनके दिव्यांग प्रमाण पत्र फर्जी थे. ऐसे चार लोगों को बर्खास्त कर दिया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच अभी भी जारी है. जिनके पास भी फर्जी प्रमाण पत्र पाए जाएंगे, उन्हें बर्खास्त किया जाएगा. चयन प्रक्रियाओं में गलत तरीकों का इस्तेमाल कर सरकारी सेवा में नियुक्ति प्राप्त करने वालों को सेवा से मुक्त किया जाएगा. भर्ती में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेंगे. सत्यापन के बाद अपात्र पाए गए सभी अभ्यर्थी नौकरी से हटेंगे.




















