जैसलमेर: जिले में ओरण और गोचर भूमि के संरक्षण की मांग लेकर मंगलवार को बड़ा आंदोलन हुआ. वन्यजीव प्रेमी और किसानों ने गजरूप सागर स्वांगिया मंदिर से जिला कलेक्टर कार्यालय तक पांच किलोमीटर लंबा पैदल मार्च निकाला. इसमें बैनर, झंडे और तख्तियां थामे बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. कलेक्टर कार्यालय पहुंच प्रदर्शनकारियों ने जिला कलेक्टर के जरिए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा.
पूर्वजों की परंपरा और संरक्षण का महत्व: वन्यजीव प्रेमी सुमेर सिंह ने बताया कि सैकड़ों वर्ष पूर्व हमारे पूर्वजों ने पशु-पक्षियों और मवेशियों के लिए चारा-पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने को ओरण और गोचर भूमि आरक्षित की थी. यह परंपरा केवल पशुओं के पालन-पोषण तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण जीवन की आत्मा थी. जब भूमि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने का अभियान चला तो तब हमारे पूर्वजों ने इसे गोचर मान विशेष दर्जा नहीं दिलवाया. इसी वजह से यह भूमि सरकारी रिकॉर्ड में सरकारी जमीन के रूप में दर्ज हो गई, जो अनुचित है.
सरकारी नीतियों पर सवाल: प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार लगातार जिले की बेशकीमती भूमि निजी कंपनियों को आवंटित कर रही है. इससे परंपरागत रूप से संरक्षित ओरण और गोचर भूमि तेजी से खत्म हो रही है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह भूमि न केवल स्थानीय पशुधन के लिए आवश्यक बल्कि जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन के लिए भी अहम है.
आंदोलन तेज करने की चेतावनी: वन्यजीव प्रेमी सुमेर सिंह ने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए तो जिले में बड़ा जनांदोलन खड़ा किया जाएगा. आंदोलन केवल जमीन बचाने का नहीं है बल्कि भावी पीढ़ियों को सुरक्षित वातावरण और संसाधन देने की जिम्मेदारी भी है. जैसलमेर में निकाले पैदल मार्च ने स्पष्ट संदेश दिया कि ग्रामीण और वन्यजीव प्रेमी अपनी परंपरा और धरोहर की रक्षा की लड़ाई को तैयार हैं. सरकार से इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर ठोस समाधान चाहते हैं.




















