राजस्थान के भरतपुर के अटल बंध क्षेत्र के कंकड़ वाली कुइया इलाके के रहने वाले गोविंद कुमार सड़क पर ठेला लगाकर पकौड़ी बेचते हैं. उन्होंने 25 सालों तक यही काम करके 7 सदस्यों के अपने परिवार का पालन-पोषण किया. उनके 5 बच्चे पढ़ाई कर रहे थे और वह घर में कमाने वाले इकलौते सदस्य थे. छोटे से कमरे में गुजारा करते हुए उन्होंने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में कोई कमी नहीं आने दी. उनकी बेटी दीपेश कुमारी के IAS अफसर बन जाने के बाद भी उन्होंने ठेला लगाना बंद नहीं किया था.
साल 2021 में यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा पास करने के बाद दीपेश कुमारी अपने छोटे भाई-बहनों के लिए मिसाल बन गईं. यह उनकी अच्छी शख्सियत का ही असर था कि उनकी देखा-देखी उनके भाई बहनों ने भी करियर के लिए ऊंचे सपने देखे और उन्हें हासिल किया. दीपेश कुमारी खुद आईएएस अफसर बन गईं, उनकी एक बहन डॉक्टर बन गई और 2 भाई-बहन एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं. इस पूरे परिवार ने साबित कर दिया कि इरादे मजबूत हों तो कोई भी रुकावट आपके हौसले डगमगा नहीं सकती है.
दीपेश कुमारी 5 भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं. वह बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में हमेशा होशियार रहीं. उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई शिशु आदर्श विद्या मंदिर से की. दीपेश कुमारी ने 10वीं में 98% और 12वीं में 89% अंक हासिल किए थे. इसके बाद उन्होंने जोधपुर के एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया और फिर IIT मुंबई से एमटेक. फिर 1 साल तक निजी कंपनी में नौकरी करने के बाद UPSC परीक्षा की तैयारी के लिए रिजाइन कर दिया.
दीपेश कुमारी साल 2020 में यूपीएससी सीएसई के पहले प्रयास में असफल हो गई थीं. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दोगुनी लगन के साथ तैयारियों में जुट गईं. अपनी 1 साल की नौकरी से इकट्ठा हुई सेविंग से दीपेश कुमारी ने दिल्ली में रहकर यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी की. इस बार उनकी मेहनत रंग लाई. साल 2021 में यूपीएससी परीक्षा के दूसरे अटेंप्ट में उन्होंने ऑल इंडिया 93वीं रैंक हासिल कर ली. इस रैंक के साथ उनका आईएएस में चयन हो गया.
आईएएस ट्रेनिंग पूरी करने के बाद दीपेश कुमारी को झारखंड कैडर अलॉट किया गया है. वह सड़क परिवहन और राजमार्ग (Road Transport and Highway) विभाग में असिस्टेंट सेक्रेटरी के पद पर तैनात हैं.