जयपुर: शिक्षा मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) 2024-25 ने राजस्थान की स्कूल शिक्षा व्यवस्था की स्थिति और उसमें आए बदलावों पर रोशनी डाली है. यह रिपोर्ट उन सभी स्कूलों के आंकड़ों पर आधारित है, जिन्होंने शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में सक्रिय UDISE+ कोड के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज करवाई. इसमें देशभर के 14.71 लाख स्कूल, 1.01 करोड़ शिक्षक और 24.69 करोड़ विद्यार्थी शामिल हैं.
राजस्थान में स्कूल, शिक्षक और विद्यार्थी : रिपोर्ट बताती है कि राजस्थान में स्कूलों की संख्या में उतार-चढ़ाव देखने को मिला. 2022-23 में राज्य में 1,06,670 स्कूल, 7,19,662 शिक्षक और 1.77 करोड़ विद्यार्थी थे. अगले साल 2023-24 में स्कूल बढ़कर 1,07,757 हो गए, शिक्षक 7,75,745 तक पहुंचे, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या घटकर 1.67 करोड़ रह गई. 2024-25 में स्थिति और बदली. इस बार स्कूल घटकर 1,06,302 हो गए, जबकि शिक्षकों की संख्या बढ़कर 7,92,265 हो गई. विद्यार्थी नामांकन एक बार फिर घटा और अब यह 1.63 करोड़ रह गया. यानि शिक्षक बढ़े हैं, लेकिन विद्यार्थी घट रहे हैं. यह शिक्षा नीति के लिए एक अहम संकेत है.
आधार कवरेज में सुधार : विद्यार्थियों को आधार से जोड़ने की प्रक्रिया ने गति पकड़ी है. 2022-23 में जहां केवल 1.02 करोड़ विद्यार्थी आधार से जुड़े थे. वहीं, 2023-24 में यह संख्या 1.07 करोड़ और 2024-25 में 1.38 करोड़ तक पहुंच गई. यह सरकार की योजनाओं को विद्यार्थियों से जोड़ने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिहाज से सकारात्मक कदम माना जा रहा है.
- 2022-23 → 1.02 करोड़ विद्यार्थी.
- 2023-24 → 1.07 करोड़ विद्यार्थी.
- 2024-25 → 1.38 करोड़ विद्यार्थी.
पीने के पानी की सुविधा– अब भी अधूरी तस्वीर : राज्य में पीने के पानी की सुविधा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. 2023-24 में 97.6% स्कूलों में पानी की उपलब्धता थी, जो 2024-25 में बढ़कर 99.2% हो गई. कार्यशील पेयजल की सुविधा भी 90.7% से बढ़कर 98.7% हो गई. मुख्य स्रोतों में नल का पानी 61,481 स्कूलों में, हैंडपंप 30,532 स्कूलों, कुएं 2,857 स्कूलों, पैक्ड वाटर 1,528 स्कूलों और अन्य स्रोत 8,792 स्कूलों में उपलब्ध है. इसके बावजूद राज्य के 842 स्कूल ऐसे हैं, जहां अब भी पीने का पानी उपलब्ध नहीं है.
सरकारी बनाम निजी स्कूल – सुविधाओं का अंतर : रिपोर्ट में सरकारी और निजी स्कूलों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है. कंप्यूटर सुविधा के लिहाज से बात की जाए तो सरकारी स्कूलों में केवल 39.7% में, जबकि निजी स्कूलों में 83.2% में यह सुविधा है. इसी तरह इंटरनेट सुविधा के लिहाज से बात करें तो सरकारी स्कूलों में 64.5% में यह फैसिलिटी है. जबकि निजी स्कूलों में 84 फीसदी तक इस सुविधा का छात्रों का फायदा मिल रहा है. बिजली सुविधा के लिहाज से देखें तो सरकारी स्कूलों में 90.9% प्रतिशत के मुकाबले निजी स्कूलों में 95.8 प्रतिशत में यह सुविधा है. इसी तरह लाइब्रेरी सुविधा को देखें तो सरकारी स्कूलों में 83.6 प्रतिशत और निजी स्कूलों में 77.7% फीसदी में यह सहूलियत है. साथ ही CWSN टॉयलेट (दिव्यांग-अनुकूल) को लेकर सरकारी स्कूलों में केवल 14.2%, जबकि निजी स्कूलों में 41.3% में यह सुविधा मौजूद है.
अन्य बुनियादी सुविधाएं : प्रदेश के स्कूलों में इस रिपोर्ट के मुताबिक अन्य सहूलियतों को लेकर बात की जाए, तो लड़कियों के शौचालय – 94.9 प्रतिशत पर कायम रहे. वहीं, लड़कों के शौचालय – 92.6% से घटकर 92.4% पर आ गए. इसी तरह हैंडवॉश सुविधा – 96.5% से बढ़कर 96.8% तक पहुंच गई है. बाकी सुविधाओं पर गौर करें तो बिजली की उपलब्धता 91.4% से बढ़कर 92.2%, लाइब्रेरी की संख्या 78.6% से बढ़कर 80.4%, खेल मैदान – 83.4% से बढ़कर 83.7%, कंप्यूटर वाले स्कूल – 51.6% से बढ़कर 53.3%, इंटरनेट वाले स्कूल – 68.3% से बढ़कर 69.9% तक पहुंच गए हैं.
नामांकन दर (GER) – प्राथमिक स्तर पर गिरावट : नामांकन दर (Gross Enrollment Ratio – GER) की तस्वीर मिश्रित है. इससे साफ जाहिर है कि छोटे बच्चों का नामांकन घट रहा है, जबकि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर सुधार देखने को मिल रहा है.
- प्राइमरी स्तर (कक्षा 1-5) : 95.1 से घटकर 88.3
- अपर प्राइमरी (कक्षा 6-8) : 90.9 से बढ़कर 92.1
- सेकेंडरी (कक्षा 9-10) : 80.2 से बढ़कर 82.2
- हायर सेकेंडरी (कक्षा 11-12) : 62 से बढ़कर 66.1
ड्रॉपआउट दर में कमी : इस मौजूदा रिपोर्ट में एक सकारात्मक पहलू भी सामने आता है जो जाहिर करता है कि राज्य में ड्रॉपआउट की दर में कमी आई है. प्राइमरी स्तर पर लड़कों की दर 4.6 फीसदी से घटकर 3.9 पर आ गई है. जबकि लड़कियों के ड्रॉपआउट की दर 4.1% से घटकर 3.3% पर मौजूद है. इसी तरह से अपर प्राइमरी और सेकेंडरी स्तर पर भी ड्रॉपआउट के आंकड़ों में कमी देखने को मिली है.
- प्राइमरी स्तर – लड़कों की दर 4.6% से घटकर 3.9%. लड़कियों की 4.1% से घटकर 3.3%.
- अपर प्राइमरी – लड़कों की दर 5.6% से घटकर 3.5%. लड़कियों की 5.9% से घटकर 3.6%.
- सेकेंडरी स्तर – लड़कों की दर 12.3% से घटकर 8.1%, लड़कियों की 11.5% से घटकर 7.1%.
ड्रॉपआउट की इस दर के आंकड़ों को लेकर राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का कहना है कि यह बदलाव राज्य में बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ और अन्य शिक्षा अभियानों की सफलता को दर्शाता है. UDISE+ 2024-25 रिपोर्ट बताती है कि राजस्थान में शिक्षा ढाँचे में कई स्तरों पर सुधार हुआ है. खासतौर से पीने के पानी, बिजली और डिजिटल सुविधाओं में सुधार आया है. वहीं, आधार कवरेज ने भी तेजी पकड़ी है.
विशेषज्ञों की है यह राय : शिक्षा विशेषज्ञ डॉक्टर संजय पाराशर के मुताबिक इस ताजा रिपोर्ट से जाहिर होता है कि प्रदेश में छात्र और शिक्षक अनुपात मौजूदा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. यह एक अनुपात 20 होना चाहिए, ताकि बुनियादी शिक्षा बेहतर बन सके. उनका कहना है कि नई शिक्षा नीति में भी इस बात पर जोर दिया गया है, ताकि अध्ययन और अध्यापन के काम को बेहतर बनाया जा सके. उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था का आधुनिकीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर का मजबूत होना हमारे शैक्षणिक ढांचे को मजबूत बना सकता है.
डॉ. पाराशर इस रिपोर्ट में नजर अंदाज किए गए पहलू पर भी जोड़ देते हैं और कहते हैं कि अगर स्कूलों तक ट्रांसपोर्ट की सुविधा मजबूत होगी, तो फिर नामांकन का स्तर भी बढ़ाया जा सकता है. सरकारी स्कूलों के लिए उनका मशवरा है कि काउंसलिंग के सेशन वक्त वक्त पर आयोजित किए जाने चाहिए, जिसमें खेल और मूल्य आधारित शिक्षा के साथ-साथ अन्य सांस्कृतिक आयाम की भी जानकारी देनी चाहिए.
वहीं, शिक्षा की मीनाक्षी मिश्रा का मानना है कि मौजूदा रिपोर्ट इस बात पर रोशनी डालती है कि अगले 5 साल हमें शिक्षा में किस दिशा में काम करना है और खासतौर पर गिरते नामांकन के आंकड़ों पर विराम लगाना है. उनका कहना है कि सिर्फ गुणवत्ता पर ध्यान देने से फर्क नहीं पड़ेगा. हमें शिक्षा से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर भी गौर करना होगा. डॉक्टर मिश्रा के मुताबिक हमें सिर्फ बच्चों पर ही नहीं, बल्कि शिक्षकों की ट्रेनिंग पर भी ध्यान देने की जरूरत है, ताकि शिक्षा को ज्यादा से ज्यादा तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जा सके. नामांकन और गुणवत्ता के साथ-साथ उनका मानना है कि बुनियादी ढांचे को बेहतर जल्द से जल्द बनाने का वक्त आ चुका है.
शिक्षा मंत्री दिलावर ने क्या कहा ? : राजस्थान के स्कूलों में नामांकन से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े तमाम पहलुओं को लेकर UDISE+ 2024-25 की रिपोर्ट पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि इस साल राजकीय विद्यालयों में 13.5 लाख का नामांकन किया गया है. सरकारी विद्यालय के विद्यार्थी हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि हाल ही में कुंभलगढ़ में आयोजित चिंतन शिविर में शिक्षकों के साथ नामांकन बढ़ाने पर मंथन भी किया गया है. इसके साथ ही जिस विद्यालय में 400 से ज्यादा नामांकन होगा, वहां दो लाख रुपए की राशि फर्नीचर के लिए देने की घोषणा भी की गई है. बाकी पहलुओं पर भी शिक्षा विभाग गंभीरता से काम कर रहा है.




















