बीकानेर में ईडी का बड़ा शिकंजाः विदेशी फंडिंग और हवाला नेटवर्क पर छापेमारी, दुबई-पाकिस्तान-मध्यपूर्व से जुड़े कनेक्शन की जांच
बीकानेर |
रेगिस्तान की शांत ज़मीन पर मंगलवार सुबह उस समय हलचल मच गई जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कई टीमें एक साथ बीकानेर में सक्रिय हुईं। तड़के शुरू हुई इस कार्रवाई को हाल के वर्षों की सबसे बड़ी छापेमारी माना जा रहा है, जिसमें हवाला नेटवर्क और विदेशी फंडिंग के आरोपों की जांच की जा रही है।
एक साथ कई इलाकों में दबिश
सूत्रों के अनुसार ईडी की टीमें, सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस बल के साथ, मुक्ताप्रसाद कॉलोनी, फड़बाजार, धोबी तलाई और सुभाषपुरा सहित तीन से अधिक स्थानों पर एक साथ पहुँचीं। तंग गलियों और भीड़भाड़ वाले बाज़ारों में केंद्रीय बलों की मौजूदगी ने स्थानीय लोगों का ध्यान खींच लिया।
आंखों देखे गवाहों ने बताया कि ईडी अधिकारी दस्तावेज़, लैपटॉप और सील किए हुए बैग लेकर घरों में दाखिल हुए और कई घंटों तक पूछताछ करते रहे। हालांकि आधिकारिक रूप से ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों ने संकेत दिए कि यह कार्रवाई सीमा पार से हो रहे अवैध लेन-देन और हवाला चैनलों को तोड़ने का हिस्सा है।
मुख्य किरदारः धोबी तलाई का सदीक खान
इस पूरे प्रकरण का केंद्र माने जा रहे हैं सदीक खान, जो बीकानेर के धोबी तलाई इलाके के निवासी हैं। सदीक पहले दुबई में रहते थे और वहाँ “दुबई दरबार” नामक चिकन रेस्टोरेंट चलाते थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि दुबई में रहते हुए सदीक ने पाकिस्तान, नेपाल, इराक, सीरिया और सऊदी अरब जैसे देशों में गहरी पकड़ बनाई और बाद में इन्हीं संपर्कों के ज़रिए भारत में हवाला चैनल तैयार किया।
सूत्रों के अनुसार सदीक लंबे समय से संदेह के घेरे में थे, क्योंकि उनके खातों में संदिग्ध पैसों का लेन-देन हो रहा था और बीकानेर में उनकी गतिविधियां तेजी से बढ़ रही थीं। दिलचस्प बात यह भी है कि सदीक ने दो शादियाँ कीं, जिनमें से दूसरी शादी ईरान में की गई। एजेंसियां यह पड़ताल कर रही हैं कि क्या उनकी अंतरराष्ट्रीय निजी रिश्तेदारियाँ ही हवाला तंत्र को मजबूत करने में सहायक बनीं।
मदरसे पर उठे सवाल
सदीक खान का एक और विवादास्पद पहलू धोबी तलाई में चलाया जाने वाला उनका मदरसा है। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इस मदरसे को धार्मिक शिक्षा के नाम पर विदेशी फंडिंग की चैनलिंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। कुछ सूत्रों का दावा है कि यहाँ युवाओं को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता था, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मदरसे में बाहर से आने-जाने वालों की संख्या बढ़ गई थी। अब यह जांच का विषय है कि मदरसे के नाम पर आने वाले चंदे का इस्तेमाल कहीं गैर-कानूनी कामों के लिए तो नहीं हो रहा था।
स्थानीय कारोबारी के नाम का खुलासा
जांच का दायरा बढ़ाते हुए ईडी ने बीकानेर के एक अग्रवाल समाज के कारोबारी को भी शक के घेरे में लिया है। सूत्रों ने बताया कि उसका नाम हवाला लेन-देन में सामने आया है और यह देखा जा रहा है कि क्या उसकी वैध कारोबारी गतिविधियों के आड़ में अवैध लेन-देन हो रहा था।
फिलिस्तीन समर्थक गुटों पर भी निगरानी
ईडी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि यह नेटवर्क केवल हवाला और विदेशी फंडिंग तक सीमित नहीं है। सूत्रों का कहना है कि बीकानेर में सक्रिय कुछ फिलिस्तीन समर्थक गुटों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है। इन गुटों की फंडिंग चैनलों और सदीक खान के नेटवर्क में कोई संबंध है या नहीं, इसकी गहन पड़ताल की जा रही है।
पुराने हवाला मामलों से जुड़ाव
सूत्रों का यह भी दावा है कि बीकानेर का यह मामला किसी एक नेटवर्क तक सीमित नहीं बल्कि पहले उजागर हुए हवाला मामलों से जुड़ा हुआ हो सकता है। एजेंसियों को शक है कि यह नेटवर्क राजस्थान, दिल्ली और अन्य राज्यों तक फैला हुआ है और इसकी जड़ें विदेशों से जुड़ी हुई हैं। चूंकि बीकानेर पाकिस्तान की सीमा से सटा इलाका है, इसलिए यह मामला और भी संवेदनशील माना जा रहा है।
शहर में हलचल और अफवाहों का दौर
सीआरपीएफ और पुलिस की भारी तैनाती से पूरे शहर में हलचल मच गई। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर तरह-तरह की अफवाहें फैल गईं-कहीं इसे आतंकी फंडिंग का मामला बताया गया तो कहीं इसे अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट से जोड़कर देखा गया।
फड़बाजार के एक दुकानदार ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “हमने बीकानेर में इतनी बड़ी कार्रवाई कभी नहीं देखी। हर गली में पुलिस और सीआरपीएफ तैनात है। लोग डरे हुए भी हैं और जानने के लिए उत्सुक भी।”
ईडी और सुरक्षा एजेंसियों की चुप्पी
फिलहाल ईडी और पुलिस ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। जयपुर से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कार्रवाई अभी जारी है और मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं की जाएगी। लेकिन जिस पैमाने पर कार्रवाई की गई है, उससे यह स्पष्ट है कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
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राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान के रेगिस्तानी जिले लंबे समय से स्मगलिंग, अवैध लेन-देन और सीमा पार खुफिया गतिविधियों के लिए संवेदनशील रहे हैं। अगर मौजूदा मामले में विदेशी फंडिंग, हवाला चैनल और उग्रपंथी गुटों का कनेक्शन साबित होता है, तो यह एक बड़ा सुरक्षा संकट साबित हो सकता है।
फिलहाल, बीकानेर शहर इस कार्रवाई से हिल गया है। आम लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि आने वाले दिनों में ईडी की जांच से क्या राज़ सामने आते हैं और क्या यह केवल स्थानीय हवाला नेटवर्क का मामला है या फिर एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय जाल, जिसकी परतें भारत से लेकर विदेशों तक फैली हुई हैं।




















