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कृष्ण भक्ति में डूबी छोटी काशी, जन्माष्टमी महापर्व पर उमड़ा आस्था का सैलाब, गोविंद देवजी का 900 किलो पंचामृत से अभिषेक

जयपुर : गुलाबी नगरी शनिवार को पूरी तरह कृष्णमय हो उठी. जन्माष्टमी महापर्व पर मंदिरों में भक्ति का महासागर उमड़ा और गलियां-चौराहे राधा-कृष्ण के जयकारों से गूंज उठे. आराध्य श्री गोविंद देवजी मंदिर से लेकर पुरानी बस्ती के गोपीनाथजी और गुप्त वृंदावन धाम में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. घड़ी में रात के 12:00 बजने के साथ ही 31 तोपों की गर्जना के साथ भगवान का प्राकट्य हुआ और यहां करीब 900 किलो सामग्री से ठाकुर जी का पंचामृत अभिषेक किया गया. दिनभर में करीब 10 लाख भक्तों ने ठाकुरजी के दर्शन किए.

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गोविंद देवजी मंदिर : शनिवार को तड़के सुबह 4:30 बजे मंगला झांकी के साथ पट खुलते ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. ठाकुरजी को विशेष पीतांबर धारण कराए गए. आधी रात को कृष्ण जन्म की घोषणा 31 तोपों की गर्जना और शंखनाद के साथ हुई. इसके बाद ठाकुरजी का 900 किलो पंचामृत ( दूध, दही, घी, शहद और बूरा) से अभिषेक किया गया. इसके बाद ठाकुर जी को भोग में पंजीरी लड्डू, खिरसा और रबड़ी कुल्हड़ अर्पित किया। इस दौरान मंदिर परिसर भक्ति गीतों, वेदपाठ और राधा-कृष्ण वेशभूषा में झूमते कलाकारों से सराबोर रहा.

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गोपीनाथजी मंदिर : पुरानी बस्ती स्थित गोपीनाथजी मंदिर में इस वर्ष जन्माष्टमी का आकर्षण ठाकुरजी का फूल बंगला बना, जिसे वृंदावन शैली में तैयार किया गया था. इसके लिए विशेष फूल कोलकाता से मंगाए गए थे. मंदिर महंत सिद्धार्थ गोस्वामी ने ठाकुरजी को इस अवसर पर 4 लाख की लग्जरी घड़ी धारण कराई, जो भक्तों के लिए कौतूहल का विषय बनी रही. रविवार को नंदोत्सव पर भी ठाकुरजी को झूले में विराजमान कर विशेष भोग अर्पित किए जाएंगे.

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गुप्त वृंदावन धाम : उधर, गुप्त वृंदावन धाम में इस बार का शृंगार विशेष रहा. ठाकुर जी की पोशाक वृंदावन से मंगाई गई, जिस पर बारीक जरदोजी का काम किया गया. जबकि पूरे धाम को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया. कर्नाटक से आए सेवंती फूलों से कृष्ण-बलराम का पुष्प अलंकरण किया गया. मंगला आरती में ठाकुरजी को नवरत्न धारण कराए गए और भक्तों ने ठाकुर जी की भजनों के साथ आराधना की.

छोटी काशी में उमड़ा आस्था का सैलाब : जन्माष्टमी पर जयपुर के तमाम कृष्ण मंदिर आस्था और उत्सव के रंगों में रचे-बसे नजर आए. मन्दिरों के अलावा शहरभर में भजन संध्याएं, झांकियां और सामूहिक प्रसाद वितरण हुआ. भक्त राधा-कृष्ण की वेशभूषा में झूमते रहे और बच्चे गोपाल स्वरूप में आकर्षण का केंद्र बने. हर तरफ उल्लास का वातावरण रहा, मानो पूरा शहर एक स्वर में कह रहा हो – नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की.

बूंदी के मंदिर में भक्ति रस की बहार : भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बूंदी की धरती पर आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम बन गया. पूरे जिले में जन्माष्टमी पर्व पर मंदिरों में गूंजते भजन, आकर्षक झांकियां, सजीव सजावट और उमड़ा जनसैलाब देखने लायक था. जैसे-जैसे रात गहराती गई, श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिरों की ओर बढ़ती गई। ठीक रात 12 बजे जब मंदिरों के पट खोले गए, तभी समूचा वातावरण “नंद के आनंद भयो… जय कन्हैयालाल की” के जयकारों से गूंज उठा. ऐसा लगा मानो सम्पूर्ण बूंदी कृष्ण जन्म की गवाही दे रहा हो. भक्तों ने हाथ जोड़कर कान्हा की आराधना की और माखन-मिश्री व पंचामृत का प्रसाद ग्रहण किया.

रंगनाथ मंदिर में उमड़ी भीड़ : नाहर का चौहटा स्थित भगवान रंगनाथ मंदिर में भव्य भजन संध्या का आयोजन हुआ। सैकड़ों दीपों की रोशनी में गूंजते भजन और नृत्य करते श्रद्धालु मानो ब्रज की रासलीला का दृश्य जीवंत कर रहे थे. शहर के प्रमुख मंदिरों पुरानी कोतवाली राव भावसिंहजी, गोपाललाल मंदिर, चारभुजा मंदिर सहित गली-मोहल्लों में सजी झांकियों ने भक्तों का मन मोह लिया.

जिलेभर में जन्माष्टमी पर्व धूमधाम से मनाया गया। मंदिरों में घंटियों की गूंज और जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा. इसी क्रम में शहर के नैनवा रोड गेट न 6 पर देर रात आयोजित भव्य आयोजन ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया. खासतौर से मटकी फोड़ प्रतियोगिता ने पूरे माहौल को रोमांच और उत्साह से भर दिया. युवाओं की टोली ने ऊंचाई पर लटकी दही-हांडी तक पहुंचने के लिए मानव पिरामिड बनाना शुरू किया। जैसे ही पिरामिड पूरा हुआ और मटकी टूटी, तालियों की गड़गड़ाहट और “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की” के गगनभेदी जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा.

झाकियां सजाई गई : सवाई माधोपुर में भी श्री कृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी का पर्व बड़े अनोखे अंदाज में आयोजित हुआ. शहर के विभिन्न मंदिरों में छोटे छोटे बच्चों ने भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं की सजीव झाकियां सजाई. इन सजीव झाकियों को देखने के लिए शहर कई जगहों से हजारों लोग पहुंचे. जन्माष्ट्मी के दिन शहर सहित मुख्यालय के सभी मंदिरों में भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव की सजीव झाकियां सजाई जाती है. रात में भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के समय 12:00 बजे सभी मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की गई उसके बाद प्रसाद वितरण का कार्यक्रम किया गया.

बाड़मेर में कृष्ण जन्मोत्सव की धूम : भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव शनिवार को सरहदी जिले बाड़मेर में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. जिसमें युवाओं और बालिकाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. शहर के विभिन्न गली-मोहल्लों में दही हंडी फोड़ कार्यक्रम आयोजित किए गए. इन कार्यक्रमों में युवाओं का जबरदस्त उत्साह नजर आया , लेकिन इस बार बालिकाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और दहीहंडी फोड़ने में अपना दमखम दिखाया.

शहर के आजाद चौक में शिक्षा कोचिंग और जाटियों का पुराना वास इलाके में टीम जोगेश सराफ ओर इसके अलावा विभिन्न इलाकों में भव्य दहीहंडी फोड़ कार्यक्रम आयोजित किए गए. देर रात तक इन कार्यक्रमों को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी रही. इधर मंदिरों में भी कृष्ण जन्मोत्सव की धूम रही. मुकुंद जी मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, बालाजी मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में विशेष आयोजन हुए. रात 12:00 बजे, जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ, तो मंदिरों में ‘ नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की ‘ के जयकारे गूंजे.

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