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Bhilwara : राजस्थान ललित कला अकादमी की 66वीं वार्षिक प्रदर्शनी में चमकेगी भीलवाड़ा की कलाकार दीपिका पाराशर

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Bhilwara : राजस्थान ललित कला अकादमी की 66वीं वार्षिक प्रदर्शनी में चमकेगी भीलवाड़ा की कलाकार दीपिका पाराशर

पाराशर की दो उत्कृष्ट कलाकृतियों का हुआ चयन, प्रदेश से कुल 64 कलाकृतियों का किया चयन

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भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर द्वारा आयोजित 66वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी में भीलवाड़ा की प्रतिभाशाली कलाकार दीपिका पाराशर की दो उत्कृष्ट कलाकृतियों का चयन हुआ है। इस प्रतिष्ठित प्रदर्शनी के लिए प्रदेशभर से कुल 64 कलाकृतियों का चयन किया गया है, जिनमें दीपिका की कृतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

प्रदर्शनी में चयनित दीपिका की पहली पेंटिंग ‘अनंत की ओर’ तथा दूसरी कृति ‘प्रकृति का द्वैत’ है। दोनों ड्राइंग्स का आकार 4 फीट गुणा 3 फीट है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी दीपिका की कलाकृतियां देश के अनेक प्रमुख शहरों में प्रदर्शित हो चुकी हैं और उन्हें कला जगत में सराहना मिलती रही है।

Bhilwara : राजस्थान ललित कला अकादमी की 66वीं वार्षिक प्रदर्शनी में चमकेगी भीलवाड़ा की कलाकार दीपिका पाराशर

अनंत की ओर’ कृति प्रकृति की गहराई, निरंतरता और जीवन के प्रवाह को सशक्त रूप में अभिव्यक्त करती है। पत्तियों जैसी बनावट वाले रूप जीवन, विकास और संरक्षण के प्रतीक हैं, जो केंद्र से उठती एक ऊर्जा धारा से जुड़े हुए प्रतीत होते हैं। नीचे की लहरदार संरचनाएँ धरती की परतों अथवा जल की गति का आभास कराती हैं। बारीक रेखांकन और सघन टेक्सचर इस चित्र में धैर्य, संतुलन तथा प्रकृति से मानव के गहरे संबंध की अनुभूति कराते हैं। वहीं दूसरी कृति ‘प्रकृति का द्वैत’ एक वृक्ष के माध्यम से जीवन के दो पक्षों को दर्शाती है। एक ओर व्यवस्थित पत्तियाँ अनुशासन, चेतना और विकास का प्रतीक हैं,

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तो दूसरी ओर गहरे शेड्स और बिखरी बनावट प्रकृति के रहस्यमय एवं भावनात्मक पक्ष को उजागर करती है। केंद्र में स्थित तना संतुलन का प्रतीक बनकर दोनों पहलुओं को जोड़ता है। ऊपर तैरते बादल और नीचे जल की परतें जीवन के परिवर्तन, प्रवाह और निरंतरता को अभिव्यक्त करती हैं। यह संपूर्ण रचना मन, प्रकृति और आत्मा के बीच अद्भुत सामंजस्य स्थापित करती है। दीपिका पाराशर की इस उपलब्धि पर कला प्रेमियों और शहरवासियों ने हर्ष व्यक्त किया है। यह चयन न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि भीलवाड़ा के कला जगत के लिए भी गौरव का विषय है

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