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बागडे का बड़ा दावा: इंदिरा गांधी ने 11 साल में 51 सरकारों को किया बर्खास्त

जयपुर: भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 11 साल के कार्यकाल में 51 सरकारों को बर्खास्त किया गया था, जो संविधान के अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग था. ये कहना है प्रदेश के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे का. विश्व लोकतंत्र दिवस के अवसर पर जयपुर में आयोजित भारतीय युवा संसद के 28वें राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान राज्यपाल ने ये बात कही.

इस दौरान उन्होंने एक किताब का जिक्र करते हुए कहा कि 1952 में हुए पहले चुनाव में भीमराव अंबेडकर 14000 वोट से हार गए थे, जबकि 78000 वोट रिजेक्ट किए गए थे. इसकी जांच भी नहीं हुई, लेकिन पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लेडी माउंटबेटन को पत्र लिखकर बताया था कि बॉम्बे स्टेट में कांग्रेस को अच्छी सफलता मिली और बाबा साहब को भी दूर कर दिया है.

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अंबेडकर के चुनाव हारने पर नेहरू ने लिखा था लेडी माउंटबेटन को पत्र : विश्व लोकतंत्र दिवस के अवसर पर शुरू हुई तीन दिवसीय भारतीय युवा संसद का प्रदेश के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने शुभारंभ किया. यहां तीन दिनों में विभिन्न सत्रों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर युवा प्रतिनिधि विचार विमर्श करेंगे इस अधिवेशन में 25 राज्यों के प्रतिनिधि और 15 से अधिक विदेशी युवा पर्यवेक्षक शामिल हो रहे हैं.

इस दौरान अपनी अभिभाषण में राज्यपाल ने इतिहास से जुड़े कई अनकहे पहलुओं को युवाओं के बीच रखा. उन्होंने बताया कि 1952 में हुए पहले इलेक्शन में बाबा साहब अंबेडकर मुंबई में इलेक्शन लड़ रहे थे। जिसमें वो 14000 वोट से हार गए थे। लेकिन 78000 वोट रिजेक्ट हो गए थे। उस वक्त बाबा साहब को अपनी जीत का भरोसा था और उन्होंने गड़बड़ी की आशंका व्यक्त करते हुए जांच की मांग भी की थी, लेकिन उसकी जांच तक नहीं हुई. यही नहीं, पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लेडी एडविना माउंटबेटन को चिट्ठी लिखकर ये जानकारी दी थी कि बॉम्बे स्टेट में कांग्रेस को अच्छी सफलता मिली और बाबा साहब को भी दूर कर दिए हैं. ऐसे में ये घटना कहीं ना कहीं संविधान के खिलाफ नजर आती है.

मौलाना आजाद चुनाव हार गए थे : वहीं, राज्यपाल ने एक किताब का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में रामपुर विधानसभा क्षेत्र से मौलाना आजाद चुनाव लड़ रहे थे और हार चुके थे. तब वहां गोविंद बल्लभ पंत मुख्यमंत्री थे. पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें फोन कर कहा था कि यदि मौलाना आजाद हार गए, तो तुम्हारा मुख्यमंत्री पद भी जाएगा और तब हारे हुए मौलाना आजाद को विजयी घोषित किया गया. इस तरह लोकतंत्र नहीं चलता. कुछ लोगों को लगता है कि वो ही सब करेंगे, उन्हें ही आगे जाना है. ये मानसिकता लोकतंत्र में नहीं रहनी चाहिए. लोकतंत्र में जो लोग करेंगे, उसे सम्मान देना होगा. कभी हार होती है, कभी जीत होती है, लेकिन इसमें जो गड़बड़ी करते हैं, वो लोकतंत्र और संविधान के लिए खतरा हैं.

इंदिरा गांधी ने किया अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग : इस दौरान उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 356 का जिक्र करते हुए बताया कि जो राज्य सरकार शासन चलाने में असमर्थ होती है या लोकहित में सरकार नहीं चल रही, तो उसे बर्खास्त करने की पावर राष्ट्रपति के पास होती है, लेकिन इसका उपयोग तभी करना होता है जब राज्य में कोई गड़बड़ी हुई हो. हालांकि, इस अनुच्छेद का उपयोग देश में विपक्ष या विरोध वाली सरकार को बर्खास्त करने के लिए किया गया. पहली बार 1959 में केरल सरकार को बर्खास्त किया गया था.

उस वक्त कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रही इंदिरा गांधी के आग्रह पर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रपति को बोलकर सरकार बर्खास्त करवाई थी और इसका केवल एक कारण था, क्योंकि वो विरोधी दल की सरकार थी. तब से लेकर 1985 तक कई सरकारें बर्खास्त करवाई गईं. ये इतिहास में दर्ज है कि इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए 11 साल में 51 सरकारों को बर्खास्त किया गया. हर-चार महीने में एक सरकार को बर्खास्त कर दिया जाता था. इस तरह अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग किया गया. ये संविधान बचाने की नहीं, बल्कि संविधान को न मानने की बात है.

लिखित नहीं पर मन में देश हित, वही लोग मानते हैं संविधान : बाबा साहब अंबेडकर ने बोला था कि संविधान अच्छा रहा और पालन करने वाले अच्छे नहीं रहे, तो संविधान का कुछ उपयोग नहीं. यदि संविधान अच्छा नहीं और पालन करने वाले अच्छे रहे, तो भी संविधान मजबूत होता है. इसका संदर्भ यही है कि जो लिखित है, उसे तो मानना पड़ता है, लेकिन जो लिखित नहीं, पर देश हित में जो हमारे मन में है, दिल में है, परंपरा में है, उसे मानना भी सही होता है. जो ये मानते हैं, वही लोग संविधान को भी मानते हैं और लोकतंत्र को भी मानते हैं.

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र : इससे पहले राज्यपाल ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र इसलिए है कि ये समानता, न्याय और उदात्त जीवन मूल्यों से जुड़ा है. उन्होंने सही शिक्षा के जरिए लोकतंत्र को मजबूत किए जाने का आह्वान किया. इसके लिए उन्होंने विद्यालयों और महाविद्यालयों में बौद्धिक और शारीरिक क्षमता बढ़ाते हुए प्रतिभा संपन्न युवाओं की संख्या बढ़ाए जाने पर जोर दिया. वहीं, उन्होंने कहा कि सुशासन में एआई का प्रयोग साक्ष्य आधारित निर्णय लेने, प्रक्रियाओं में तेजी लाने और नागरिक सुविधाओं में बेहतरी के लिए तो ठीक है, लेकिन इसका सावधानी से उपयोग होगा तभी तकनीक की सार्थकता है. एआई मानवीय गरिमा और जीवन मूल्यों पर हावी नहीं हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए. इस दौरान राज्यपाल ने लोकतंत्र वैचारिकी पुस्तक का लोकार्पण भी किया.

भारतीय युवा संसद के शुभारंभ सत्र में राज्यपाल के अलावा कर्नाटक के पूर्व सांसद बसवराज पाटिल भी मौजूद रहे, जिन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि आज देश को जितने दूध की जरूरत है उसमें तीन चौथाई दूध नकली मिल रहा है. गायों की संख्या घट रही है. मिट्टी, पानी, अन्न, हवा ठीक नहीं, तो इंसान कैसे ठीक बनेगा. ये एक गंभीर समस्या देश के सामने है. कार्यक्रम में जयपुर ग्रेटर नगर निगम की महापौर सौम्या गुर्जर भी मौजूद रहीं, जिन्होंने युवाओं के समक्ष हाल ही के दिनों में जयपुर की ओर से बनाए गए विश्व रिकॉर्ड्स का जिक्र किया. साथ ही बताया कि जन भागीदारी से जयपुर बड़ी छलांग लगाते हुए आज स्वच्छ सर्वेक्षण में 16वें पायदान पर आ गया है.

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