क्षेत्र के सबसे बड़े गाँव मोमासर के ग्रामीण आज भी सड़क सुविधा से वंचित, ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, एक माह का दिया अल्टीमेटम।
श्रीडूंगरगढ़ उपखंड का सबसे बड़ा गाँव मोमासर आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। पिछले 15 वर्षों से आडसर से मोमासर होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग के जोरावरपुरा फांटा तक की मुख्य सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। हालात यह है कि बरसात के दिनों में गाँव का संपर्क पूरी तरह कट जाता है। गाँव में स्थित राजकीय महाविद्यालय और राजकीय अस्पताल, जो लगभग 20 किलोमीटर क्षेत्र के विद्यार्थियों और मरीजों को कवर करते हैं, वहाँ पहुँचना ग्रामीणों के लिए दूभर हो गया है। एम्बुलेंस सेवाएँ भी समय पर नहीं पहुँच पाती, जिससे मरीजों और गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
ग्रामीणों ने बीकानेर जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंच कर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यदि 30 दिनों में सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ तो ग्रामीण स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे पर अनिश्चितकालीन जाम करने को बाध्य होंगे।
मोमासर के युवा नेता बीरबल पूनिया ने कहा कि “मोमासर जैसे बड़े गाँव को सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित रखना सरकार की लापरवाही को दर्शाता है। अब ग्रामीण और युवा एकजुट होकर अपनी हक की लड़ाई लड़ेंगे। यदि समय पर काम शुरू नहीं हुआ तो हम चुप नहीं बैठेंगे।”
सड़क निर्माण संघर्ष समिति में गहरा आक्रोश, पहुंचे नेता भी।
CPIM के जिला सचिव सुंदर बेनीवाल, RLP के विवेक मचरा, कांग्रेश के प्रदेश सचिव रामनिवास कुकना, महिला कांग्रेस की प्रदेश सचिव नीरू चौधरी, SFI नेता गौरव टाडा ने अपने विचार रखें और सरकार ओर स्थानीय प्रशासन को घेरा, बताया लापरवाह।
इस मौके पर गोपाल गोदारा, केशराराम गोदारा, हुलास मेघवाल, धन्नाराम गोदारा, सांवरमल बरोड़, विजयपाल भम्मू, परहलाद भाम्मु, ओमप्रकाश भाम्मू, राकेश भाम्मू, लक्ष्मण पूनियां, गोपी गोदारा, गोपाल सारण, टोडाराम भामू, भैराराम धेतरवाल, नारायण सिंह, शंकर गोदारा, परभूराम गोदारा, दुलाराम पूनियां, रामप्रताप गोदारा सहित अनेक ग्रामीण शामिल रहे।




















