पाली: यह कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है. पाली जिले के मंडिया रोड स्थित शेखों की ढाणी में रहने वाली 25 वर्षीय अफसाना ने पिछले छह माह में आठ बार सांप के काटने के बाद भी मौत को मात दी. हर बार जहरीले सांप के डसने के बावजूद अफसाना का जीवन बचना स्थानीय लोगों के बीच हैरानी और चर्चा का विषय बना है. रविवार दोपहर अफसाना घर के बाहर कपड़े सुखाने गई, तभी आठवीं बार सांप ने काट लिया. घर के पड़ोस में रहने वाले फिरोज ने तुरंत उसे बांगड़ अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज किया गया.
अफसाना के परिजन बताते हैं कि यह घटनाओं का सिलसिला बीते छह माह से चल रहा है. बांगड़ अस्पताल की डॉक्टर रिद्धि अग्रावत ने बताया कि घरवालों ने इसे स्नेक बाइट का मामला बताया. इसके बाद महिला को इंजेक्शन लगाकर स्नेक बाइटिंग के आधार पर इलाज किया गया.
कब-कब हुई घटनाएं: अफसाना के पति मुश्ताक खान ने बताया कि पहली बार 20 मार्च को अफसाना को सांप ने काटा. इसके बाद 18 अप्रैल, 25 मई और फिर जून और जुलाई में तीन बार सांप ने डसा. सबसे गंभीर स्थिति 2 सितंबर को बनी, जब अफसाना को सातवीं बार सांप ने डसा. तब हालत बिगड़ने पर जोधपुर एम्स में भर्ती कराना पड़ा. इस दौरान डॉक्टरों ने उसकी जान बचाने के लिए तीन बार आईसीयू में रखा. एक बार हालत इतनी नाज़ुक हो गई कि उसे ट्रॉमा सेंटर से हायर सेंटर तक रैफर करना पड़ा.
डॉक्टरों की राय: चिकित्सकों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को बार-बार एक ही प्रजाति का सांप काटे तो उसके शरीर में स्वाभाविक रूप से एंटीबॉडीज बनने लगती हैं. ये एंटीबॉडीज भविष्य में उसी प्रकार के सांप के काटने पर जहर के असर को कम करती है. यही कारण हो सकता है कि बार-बार सांप के डसने के बाद भी अफसाना की जान बचती रही. विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि दुनिया भर में पाए जाने वाले करीब 70 प्रतिशत सांपों की प्रजातियां विषैली नहीं होती. ऐसे में जहरीले और गैर-जहरीले सांप में अंतर समझना जरूरी है.
स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय: अफसाना का मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना है. लोग इसे किसी चमत्कार से जोड़ रहे हैं तो डॉक्टर इसे विज्ञान और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता का उदाहरण मानते हैं. पीड़िता अफसाना ने बताया कि उन्हें बार-बार सांप काटते हैं, हर बार लगता है कि अब शायद नहीं बच पाऊंगी, लेकिन भगवान और डॉक्टरों की दुआ से अब तक जिंदगी बची हुई है. अफसाना के पति मुश्ताक खान ने कहा कि हमारे लिए यह समय बहुत कठिन रहा. बार-बार अस्पताल ले जाना पड़ा. कभी पाली तो कभी जोधपुर, लेकिन अफसाना की हिम्मत और डॉक्टरों के इलाज ने आज उसे हमारे बीच जिंदा रखा है.




















