अगर आपको भी लगता है कि IVF बच्चे नैचुरली जन्मे बच्चों से कम हेल्दी होते हैं, तो आपको डॉ. महिमा की बात जरूर सुननी चाहिए। उन्होंने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है, जो कि लोगों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है।
आजकल कई कपल्स नैचुरली प्रेग्नेंट न हो पाने की वजह से IVF जैसी तकनीक का सहारा लेते हैं। लेकिन इसके बारे में लोगों में अभी भी सही जानकारी कम ही है। इसी वजह से समाज में इसके प्रति कई तरह की गलत धारणाएं भी बन जाती हैं। ऐसी ही एक आम धारणा यह है कि IVF से पैदा हुए बच्चे नैचुरली कंसीव हुए बच्चों से अलग होते हैं या फिर कम हेल्दी होते हैं। लेकिन क्या सच में ऐसा होता है? आइए, जानते हैं इस सवाल का जवाब।
एक पॉडकास्ट बातचीत में गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. महिमा ने कहा कि उन्हें तो लगता है कि IVF तकनीक से जन्मे बच्चे बहुत ही शरारती और इंटेलिजेंट होते हैं। इतने सारे एग्स में से केवल एक चुने गए एम्ब्रियो से ही बच्चा बनता है। एक्सपर्ट आगे कहती हैं कि अगर मैं सीरियस होकर बात करूं तो IVF और नैचुरली कंसीव हुए बच्चों में फिजिकली और मेंटली किसी भी रूप में कोई अंतर नहीं होता। इसीलिए लोग कोई भी गलतफहमी न पालें।
कला साहित्य संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित राजस्थान संस्कृत अकादमी
क्या दोबारा IVF कराने पर फिर से पूरा खर्चा करना पड़ता है?
इसी पॉडकास्ट में जब डॉक्टर महिमा से पूछा गया कि क्या दोबारा IVF कराने पर फिर से पूरा खर्चा करना पड़ता है, तो उन्होंने बताया कि IVF एक बहुत ही व्यक्तिगत ट्रीटमेंट है और हर मरीज का अनुभव अलग होता है। एक्सपर्ट आगे बताती हैं कि हर महिला की बॉडी और हार्मोनल रिस्पॉन्स एक जैसा नहीं होता।
क्या आप बेबी प्लान कर रही हैं ?
एक्सपर्ट कहती हैं कि किसी की बॉडी में ज्यादा एग्स बन जाते हैं, जिसे हाइपर स्टिमुलेशन कहा जाता है, वहीं किसी की बॉडी में अपेक्षित संख्या में एग्स नहीं बनते।
ट्रीटमेंट में करना पड़ता है बदलाव
डॉक्टर बताती हैं कि इसी कारण अलग-अलग साइकल में इंजेक्शन की डोज और ट्रीटमेंट में बदलाव करना पड़ता है, ताकि हर मरीज को सबसे बेहतर IVF ट्रीटमेंट का सक्सेस रेट मिल सके।एक्सपर्ट ने यह भी कहा कि किसी मरीज को यह गारंटी देना कि तीन या चार साइकल में वह प्रेग्नेंट हो जाएगी, संभव नहीं है। ।




















