दौसा : श्मशान भूमि को लेकर विवाद के बाद ग्रामीण महिला का शव लेकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए. सिकराय उपखंड के रामेडा गांव में योगी समाज की महिला लोहड़ी देवी की मौत के बाद समाज के लोग पारंपरिक विधि से अंतिम संस्कार (समाधि) करने के लिए श्मशान भूमि पर पहुंचे, लेकिन इसी भूमि को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है. वहीं, इस मामले में सिकराय एसडीएम नवनीत कुमार ने कहा कि मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया जाएगा और ग्रामीणों की समस्या का समाधान किया जाएगा.
आरोप है कि प्रशासन की ओर से इस भूमि को खाली कराने का दबाव बनाया जा रहा है. गांव के लोग श्मशान भूमि को बचाने की मांग लेकर मृतका का शव कार में रखकर दौसा कलेक्ट्रेट पहुंच गए. कलेक्ट्रेट परिसर में अचानक शव लेकर पहुंचे ग्रामीणों को देखकर प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया.
गाड़ी की निगरानी में जुटे पुलिसकर्मी : जैसे ही पुलिस को इसकी जानकारी लगी, तुरंत मौके पर कोतवाल सुधीर कुमार उपाध्याय और सदर थाना प्रभारी रविंद्र चौधरी तैनात कर दिए गए. हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए कई थानों की पुलिस कलेक्ट्रेट के बाहर तैनात की गई. स्थिति गंभीर होती देख प्रशासन ने मानपुर डीएसपी दीपक मीणा को भी मौके पर बुलाया. वहीं, ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा.
ग्रामीण रामजीवन योगी ने आरोप लगाया कि सिकराय एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी पद का दुरुपयोग करते हुए योगी समाज की श्मशान भूमि की जमीन छीनने का प्रयास कर रहे हैं. ग्रामीणों के मुताबिक प्रशासन की ओर से नोटिस जारी कर इस भूमि को खाली कराने के आदेश दिए गए हैं. उपखंड प्रशासन शमशान भूमि में कुछ लोगों का कब्जा मान रहा है, जबकि यहां ऐसा कुछ नहीं है.
उनका कहना है कि यह भूमि उनकी परंपरागत श्मशान भूमि है, जहां वर्षों से समाधि स्वरूप अंतिम संस्कार होते आ रहे हैं. समाज की मान्यता है कि मृतक का न तो दाह संस्कार होता है और न ही दफनाया जाता है, बल्कि गड्ढा खोदकर शव को समाधि की मुद्रा में बैठाकर वहीं समाधि दी जाती है. ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि अगर यह भूमि छीन ली गई तो आगे समाज कहां अपने मृतकों का संस्कार करेगा? ज्ञापन सौंपने और पुलिस व अधिकारियों से लंबी समझाइश के बाद ग्रामीण शव को वापस गांव ले गए.




















