अजमेर : वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब देश भर से राजनेताओं से लेकर धर्म गुरुओं की प्रतिक्रिया भी सामने आ रही है. ऐसे में अजमेर शरीफ दरगाह से भी एक बयान सामने आया है. हजरत ख्वाजा गरीब नवाज रहमतुल्लाह अलैहि की दरगाह के दीवान सैय्यद जैनुल आबेदिन अली खान के उत्तराधिकारी व ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन सैय्यद नसीरुद्दीन चिश्ती ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है.
गुमराह करने वालों के लिए करारा जवाब : दरगाह दीवान के पुत्र व उत्तराधिकारी सैय्यद नसरुद्दीन चिश्ती ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इस कानून का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और उनकी आय का सही इस्तेमाल करना है. यह फैसला मुस्लिम समुदाय को गुमराह करने वालों के लिए करारा जवाब है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि पूरा अधिनियम स्टे नहीं हुआ है, बल्कि केवल कुछ प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगी है. केंद्र सरकार ने भी माना कि वक्फ संपत्तियों में भ्रष्टाचार और लूट जैसी समस्याएं हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए आदेश दिया है कि जब तक अपील का निपटारा नहीं होता, संपत्तियों को डिस्पोज नहीं किया जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 की उन धाराओं पर रोक लगाई है, जिनमें वक्फ बनाने के लिए व्यक्ति को पांच साल तक मुस्लिम होना जरूरी था और कलेक्टर को संदिग्ध जमीन पर रोक का अधिकार दिया गया था. साथ ही ‘वक्फ बाय यूजर’ संपत्तियों को डिनोटिफाई नहीं किया जाएगा. चिश्ती ने कहा कि मोदी हुकूमत ने मुसलमानों के हक में वक्फ कानून बनाया है. ऐसे में वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार, गड़बड़ी पर रोक भी लगेगी. इसी तरह अब जनता को भी समझ आ जाएगा कि उन्हें जो लोग वक्फ कानून को लेकर गुमराह कर रहे थे वो गलत थे. केंद्र सरकार जो वक्फ कानून लाई है वो यतीम, गरीब और विधवाओं के हक में है. उन्हें नए वक्फ कानून से फायदा पहुंचेगा. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से केंद्र सरकार को स्पोर्ट मिला है.




















