उदयपुर: शहर का फील्ड क्लब परिसर रविवार को अनूठे संगम का गवाह बना. यहां गुजराती और मेवाड़ी संस्कृति के समागम ने आनंद की ऐसी हिलोरे उठाई कि हर कोई मन की गहराई तक भीग गया. मौका था, गुजरात और राजस्थान के बीच सांस्कृतिक आदान प्रदान के लिए हुए वाइब्रेंट गुजरात कल्चरल प्रोग्राम 2025 का. गुजरात सरकार के ट्यूरिज्म कॉर्पोरेशन ऑफ गुजरात लिमिटेड की मेजबानी में हुए पहले और अनूठे कार्यक्रम का उद्घाटन पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने किया.
लोक संस्कृति ने बांधा समां: कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग परंपरागत पोशाकों में पहुंचे. किसी ने गुजरात के लोक जीवन को दर्शाती चनिया चोली और केडियू व चोर्ना धारण किया तो कुछ लोग राजपूताना के गौरव का प्रतिनिधित्व करते धोती-कुर्ता और मेवाड़ी पाग या मारवाड़ी साफे में आए. गुजरात के परंपरागत लोक गीतों और लोक नृत्य की धुनों पर थिरकते कदम एक भारत-श्रेष्ठ भारत का दिग्दर्शन कराते से प्रतीत हुए. शुरू में आकर्षक पारंपरिक गुजराती लोक प्रदर्शन जैसे तलवार रास, गोफ गुंथन और मणियारो रास की प्रस्तुति ने मंत्रमुग्ध कर दिया. फिर राजस्थान की घूमर ने पूरे परिसर को सांस्कृतिक समागम का स्थल बना दिया.पार्श्व गायक पार्थिव गोहिल ने गुजराती लोकगीतों की प्रस्तुति दी. इस दौरान गुजराती व्यंजनों की स्टॉल्स सजाई गई. लोगों ने खमण-ढोकला, फाफड़ा समेत कई व्यंजनों का लुत्फ उठाया.
सांस्कृतिक विरासत को मिलेगी मजबूती: राज्यपाल कटारिया ने कहा कि उदयपुर जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगर में वाइब्रेंट गुजरात कल्चरल प्रोग्राम गर्व का विषय है. उदयपुर और गुजरात अपने आप में अद्भुत हैं. ऐसे कार्यक्रम हमारी संयुक्त सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत करेंगे. भारत को पर्यटन के क्षेत्र में वैश्विक मानचित्र पर अधिक मजबूती से स्थापित करेंगे. कलाकारों के माध्यम से दोनों राज्यों को जोड़ने का प्रयास किया गया. यह विविधता ही हमें दुनिया के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करती है. आज का कार्यक्रम संदेश देता है कि पर्यटन सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता का माध्यम भी है. वहीं गुजरात के पर्यटन मंत्री मुलुभाई बेरा ने कहा कि राजस्थान और गुजरात का रिश्ता बहुत गहरा है. खानपान, रहन-सहन एवं परंपराओं में इसकी झलक मिलती है. आयोजन दोनों राज्यों के बीच के अटूट संबंध को और भी गहरा करेगा.
ये भी थे मौजूद: राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया, विधायक ताराचंद जैन, गुजरात के पर्यटन सचिव राजेंद्र कुमार, गुजरात पर्यटन निगम के प्रबंध निदेशक प्रभव जोशी, पूर्व मंत्री हरीश राजानी और समाजसेवी गजपालसिंह मौजूद थे.




















