जयपुर: झालावाड़ के पिपलोदा गांव में स्कूल की छत गिरने से सात बच्चों की मौत के मामले में परिजनों को न्याय की मांग को लेकर युवा नेता नरेश मीणा और कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे राजेंद्र गुढ़ा ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. दोनों नेता अपने समर्थकों और बच्चों के परिजनों के साथ जयपुर में शहीद स्मारक के बाहर धरने पर बैठ गए. उनका कहना था कि हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों के परिजनों को न्याय मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. नरेश मीणा ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर निशाना साधा, जबकि राजेंद्र गुढ़ा का कहना था कि झालावाड़ में झूठे आरोप लगाकर नरेश मीणा को जेल में डाला गया. कार्रवाई तो उन पर होनी चाहिए थी, जो स्कूल की छत गिरने के मामले में जिम्मेदार थे.
नरेश मीणा ने कहा कि झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने के बाद वह लोगों को न्याय दिलाने गए थे, लेकिन उन्हें जेल में डाल दिया गया. आज 50 दिन होने के बाद भी परिजनों को न्याय नहीं मिला. इसके चलते बच्चों के परिजन आज जयपुर आए हैं. अब वे परिजनों के साथ शहीद स्मारक के बाहर धरने पर बैठे हैं. सरकार से न्याय की मांग कर रहे हैं. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से उन्होंने बच्चों के परिजनों के लिए न्याय की मांग की है.
…तो वसुंधरा राजे कर दें मदद: उन्होंने कहा कि कोई भी झालावाड़ नहीं जाना चाहता. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ही नहीं जाने दिया. हमने तो सुना था कि सीएम भजनलाल शर्मा झालावाड़ जा रहे थे, लेकिन नहीं गए. वे बोले, ‘हम भी वसुंधरा राजे से यही अपील कर रहे हैं कि आप ही परिजनों की मदद कर दीजिए. सरकार किसी कारण से परिजनों की मदद नहीं कर रही तो वसुंधरा राजे को अपने स्तर पर मदद करनी चाहिए. हम इतनी ही मांग कर रहे हैं.’
न्याय मांगने वाले को ही जेल भेज दिया: पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने कहा कि वह और नरेश मीणा बच्चों के परिजनों को न्याय दिलाने झालावाड़ गए थे. उस समय सरासर झूठा आरोप लगाकर नरेश मीणा को जेल में डाल दिया गया. हादसे के बाद स्कूल बनाने वाले ठेकेदार, इंजीनियरों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी, जबकि न्याय मांगने गए नरेश मीणा को जेल में डाल दिया गया. उस समय आरोप लगाया गया कि परिजनों ने उनके खिलाफ शिकायत दी थी, जबकि परिजन तो उनके साथ बैठे हैं.
पड़ोस की घटनाओं से सीख ले सरकार: पूर्व मंत्री गुढ़ा ने कहा कि नेपाल में 19 बच्चों की मौत के बाद संसद जला दी गई. राष्ट्रपति भवन जला दिया गया. मंत्रियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पड़ोसी देश की हवा यहां नहीं आएगी? क्या बांग्लादेश और श्रीलंका की हवा यहां नहीं आएगी? यहां का नौजवान अन्याय के खिलाफ खड़ा नहीं होगा क्या? क्या यहां भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ क्रांति नहीं होगी?




















