भरतपुर: इस बार दीपावली का त्योहार खास होगा. तिथियों के अद्भुत संयोग ने पारंपरिक पांच दिवसीय दीपोत्सव को छह दिन का बना दिया. 18 अक्टूबर शनिवार को धनतेरस और धन्वंतरि जयंती से शुरू होकर 23 अक्टूबर गुरुवार को भाई दूज तक यह त्योहार चलेगा. इस बार दीपावली पूजन 21 अक्टूबर मंगलवार को करना ही श्रेष्ठ रहेगा, क्योंकि प्रदोष व्यापनी अमावस्या उसी दिन है.
धनतेरस और धन्वंतरि जयंती से शुरुआत: पंडित मनु मुद्गल ने बताया कि 18 अक्टूबर को प्रदोष व्यापनी तिथि में धनतेरस मनाई जाएगी. इस दिन विशेष रूप से धन्वंतरि जयंती मनाई जाएगी. प्रदोष व्यापनी तिथि में धन्वंतरि देवता का पूजन, नए बर्तन या सामान की खरीद, धन और समृद्धि के लिए अत्यंत शुभ फलदायी रहेगी. उन्होंने बताया कि 20 अक्टूबर को रूप चतुर्दशी मनाई जाएगी. इस दिन घरों की साफ-सफाई और खुद का शृंगार किया जाता है. शाम को चौमुखा दीपक जलाकर दीपदान किया जाता है. इसे रूप सौंदर्य और आरोग्य प्रदान करने वाला माना जाता है.
पूजन 21 अक्टूबर को श्रेष्ठ: पंडित मुद्गल ने कहा कि 20 अक्टूबर को दोपहर 3:45 बजे से अमावस्या तिथि लगेगी, लेकिन प्रदोष व्यापनी अमावस्या 21 अक्टूबर को रहेगी. इसी कारण दीपावली पूजन 21 अक्टूबर को करना श्रेष्ठ और शुभ रहेगा. निर्णय सिंधु ग्रंथ के अनुसार प्रदोष व्यापनी अमावस्या में ही महालक्ष्मी का पूजन करना चाहिए. इस दिन को कालरात्रि भी कहते हैं. रात्रि में महालक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा, दीपदान और पितरों का स्मरण करने से अखंड लक्ष्मी की प्राप्ति होती है. गणेशजी बुद्धि के दाता हैं, इसलिए पहले उनका पूजन और तत्पश्चात महालक्ष्मी पूजन करना आवश्यक है. इस दिन नवीन वस्त्र धारण कर पूजा करने से घर-परिवार में आरोग्य, सुख और समृद्धि का वास होता है.
गोवर्धन पूजा और अन्नकूट: उन्होंने बताया कि 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट मनाया जाएगा. यह दिन गिरिराजजी को समर्पित है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की आराधना कर अन्नकूट का भोग लगाया जाता है. यह कृषि प्रधान जीवन और प्रकृति के प्रति आभार जताने का प्रतीक है.
भाई दूज 23 को: दीपोत्सव 23 अक्टूबर को भाई दूज के साथ संपन्न होगा. बहनें अपने भाइयों के घर जाकर तिलक करेंगी. मिष्ठान अर्पित करेंगी. उनकी दीर्घायु की कामना करेंगी. यह दिन भाई-बहन के स्नेह और सौहार्द का प्रतीक है. पंडित मनु मुद्गल ने कहा कि इस बार तिथि संयोग के चलते दीपोत्सव छह दिन चलेगा. शनिवार से गुरुवार तक यह शृंखला भक्तों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी मानी जाएगी.




















