कोटा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र उत्तर प्रदेश के वाराणसी में नई शिक्षा नीति (NEP) में सुधार की मांग को लेकर कॉलेज शिक्षकों का एक बड़ा विरोध प्रदर्शन होना है. इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कोटा से भी पांच कॉलेज शिक्षक जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने सख्ती करते हुए उन्हें नहीं जाने दिया. पुलिस इन शिक्षकों को ले जा रहे राजस्थान यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (रुक्टा) के अध्यक्ष और अखिल भारतीय विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संगठन महासंघ (एआईएफयूसीटीओ) के जोनल सचिव डॉ. रघुराज परिहार के कुन्हाड़ी हाउसिंग बोर्ड स्थित घर पर पहुंची और उन्हें थाने ले आई. उन्हें कई घंटों से थाने में बैठा रखा है. डॉ. परिहार गवर्नमेंट साइंस कॉलेज, कोटा में रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर हैं. डॉ. परिहार का कहना है कि उनके घर पर पुलिस जीप और कुछ पुलिसकर्मी सुबह 8:00 बजे पहुंचे थे. वे स्टेशन जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उसके पहले ही रोक लिया गया.
इस बारे में जब कुन्हाड़ी थानाधिकारी अरविंद भारद्वाज से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि वे फिलहाल कोर्ट में हैं. इसी तरह ड्यूटी ऑफिसर एएसआई लटूर लाल ने भी कोर्ट में होने की बात कही और वे कुछ भी कहने से बच रहे हैं. डॉ. परिहार ने बताया कि इस वजह से उनकी ट्रेन छूट गई है. उनके अलावा जो अन्य चार साथी वाराणसी जा रहे थे, वे भी नहीं जा सके क्योंकि सभी की ट्रेन निकल गई थी. पुलिस ने उन्हें भी जाने से रोक दिया था. इनमें बारां जिले के सीसवाली कॉलेज से धर्मराज मीणा व रवि नागर, बूंदी से सुनील मीणा व जेडीबी कॉलेज से धर्म सिंह शामिल हैं.
डॉ. परिहार का यह भी कहना था कि उन्हें थाने लाने का कारण भी नहीं बताया जा रहा है. पुलिस केवल यह कह रही है कि उनकी जान को खतरा है, जबकि उन्हें ऐसा कोई खतरा महसूस नहीं हो रहा था. डॉ. परिहार के अनुसार अखिल भारतीय विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ (एआईएफयूसीटीओ) की तरफ से वाराणसी में नई शिक्षा नीति में सुधार को लेकर एक बैठक होनी थी. इसमें देशभर के शिक्षाविद और संगठन से जुड़े लोग शामिल हो रहे हैं. तीन दिन तक चलने वाली इस बैठक से पहले 13 अगस्त को धरना-प्रदर्शन की योजना थी.
डॉ. परिहार ने बताया, ‘हमें शुक्रवार सुबह 9:15 बजे कोटा से ओखा वाराणसी ट्रेन से जाना था, लेकिन ट्रेन छूट गई. पुलिस ने थाने में रोके रखा और दूसरों को भी जाने से रोक दिया. मुझे अभी भी यहां बैठाए रखा है. कोई कारण भी नहीं बता रहे. पुलिस वाले केवल यह कह रहे हैं कि खुफिया एजेंसियों और उच्चाधिकारियों के कहने पर यह कार्रवाई की गई है.’
कॉलेज शिक्षकों की प्रमुख मांगें: डॉ. परिहार ने बताया कि इस आन्दोलन में उनकी प्रमुख मांगों में भारत में नई पेंशन स्कीम की जगह ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करना, कॉलेज शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु एक समान 65 वर्ष करने, नई शिक्षा नीति 2020 को निरस्त करने, यूजीसी ड्राफ्ट विनिमय 2024 और 2025 को वापस लेने, पीएचडी व एमफिल के इंक्रीमेंट, 8 वें वेतन संशोधन के समय की पेंशन विसंगति को दूर करने, पीएचडी को एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पदोन्नति से अलग करने और शिक्षा बजट को 10 फीसदी तक बढ़ाने की है. इसके अलावा राजस्थान के 374 राजसेस कॉलेजों के समायोजन, राजस्थान के राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालय शिक्षकों को पेंशन परिलाभ, पारदर्शी स्थानांतरण नीति, सातवें वेतनमान के प्रथम 1 वर्ष का वास्तविक भुगतान करने, पुस्तकालय अध्यक्ष व ? शारीरिक शिक्षकों को अन्य शिक्षकों की तरह वेतनमान की मांग भी शामिल है.




















