जयपुर : बायतु से कांग्रेस विधायक और मध्य प्रदेश के प्रभारी हरीश चौधरी ने ईटीवी भारत से विशेष बातचीत में चुनाव आयोग की निष्पक्षता, राजस्थान विधानसभा सत्र के गतिरोध और मध्य प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति पर अपनी राय दी. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता उस दिन खत्म हो गई थी जब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को हटाकर उनकी जगह एक कैबिनेट मंत्री को कमेटी में शामिल किया गया था.
वोट चोरी और आंदोलन का सवाल: हरीश चौधरी ने कहा कि यह केवल कांग्रेस का आंदोलन नहीं है, यह देश में हर न्यायप्रिय, संविधानप्रिय और लोकतंत्रप्रिय व्यक्ति का आंदोलन है. वोट का अधिकार लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण बुनियाद है, और अगर यह अधिकार ही छीन लिया जाता है तो हमारे अन्य अधिकारों को कौन बचा पाएगा? मैं सभी से अपील करता हूं कि यह कांग्रेस का आंदोलन नहीं है, यह देश का आंदोलन है और सभी को इसमें शामिल होना चाहिए.
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल: विधायक हरीश चौधरी ने कहा कि यह चुनाव आयोग के अस्तित्व पर बहुत बड़ा सवाल है, चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है, यह तो उसी दिन तय हो गया था जब चुनाव आयुक्त का चयन करने वाली तीन सदस्य कमेटी जिसमें प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस होते हैं, चीफ जस्टिस को हटाकर भारत सरकार के एक मंत्री को उसमें शामिल करने के लिए कानून बदलकर उसमें प्रावधान किया गया. उस दिन ही चुनाव आयोग की निष्पक्षता खत्म हो गई थी और जो आशंका व्यक्त की जा रही थी वो अब धरातल पर हम हकीकत में होते देख रहे हैं.
चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं रहेगा तो चुनाव कैसे होंगे, आज लोकतंत्र की परिभाषा में सबसे महत्वपूर्ण आधार है कि निष्पक्ष तौर पर मतदाता सरकार को चुने लेकिन आज भारत में क्या हो रहा है, सरकार मतदाताओं को चुन रही है. यह किसी भी लिहाज से लोकतंत्र नहीं है. इस संदर्भ में राहुल गांधी ने बेंगलुरु की एक विधानसभा की सच्चाई पूरी दुनिया के सामने रखी है. सच्चाई की जांच की जगह चुनाव आयोग ने जिस तरह से प्रेस कॉन्फ्रेंस की, उसका चेहरा पूरी दुनिया ने देखा है. वो दुर्भाग्यपूर्ण है, जिस तरह की भाषा का उन्होंने उपयोग किया है. अगर कोई खामी सामने आती है तो उस पर संज्ञान लेना चाहिए लेकिन उल्टे चुनाव आयुक्त तो एफिडेविट मांग रहा है यह कृत्य चुनाव आयोग का नहीं होना चाहिए था.
राजस्थान विधानसभा का गतिरोध : राजस्थान विधानसभा में विपक्ष बहस में हर समय भाग लेना चाहता है लेकिन सत्ता पक्ष इस तरह की स्थिति पैदा कर देता है, थर्ड स्टेज में आकर विपक्षी सदस्यों को बोलने से रोक दिया जाता है. अगर सत्ता पक्ष इस तरह की व्यवस्था करें कि थर्ड स्टेज में विपक्ष को बोलने का अधिकार नहीं है, तो फिर क्या करेंगे.परंपराओं और नियमों के अनुसार थर्ड स्टेज पर बोलने की व्यवस्था है लेकिन हमारे नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को सवाल उठाने नहीं दिया गया. सदन की परंपरा रही है कि सदन के नेता और नेता प्रतिपक्ष किसी भी परिस्थिति में खड़े होकर बोलते हैं तो उनको सुना जाता है यह परंपरा रही है, लेकिन इस सत्र में हमने क्या-क्या होते हुए नहीं देखा है. संसदीय कार्य मंत्री के कृत्य को पूरा प्रदेश देख चुका है, संसदीय कार्य मंत्री ने ऑन रिकॉर्ड विधानसभा अध्यक्ष के साथ जो व्यवहार किया वो ठीक नहीं है, विधानसभा स्पीकर भी अपने पद की गरिमा नहीं रख पाए तो विपक्ष की गरिमा कैसे रखेंगे.
कैमरे से जासूसी के आरोप: विधानसभा परिसर और सदन में यूट्यूब के जरिए कार्यवाही के सीधे प्रसारण के संदर्भ में कैमरे लगे हुए हैं लेकिन कई कैमरे ऐसे भी लगे हुए हैं जब सदन की कार्यवाही नहीं चलती है तब कौन सदस्य आपस में क्या बात कर रहे हैं, आपस में किस तरह की चर्चा कर रहे हैं, उन तमाम बातों को रिकॉर्ड करने के लिए कैमरे लगाए गए हैं. यह न्याय संगत नहीं है.
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर सवाल : धनखड़ के मुद्दे पर हरीश चौधरी ने कहा कि जगदीप धनखड़ राजस्थान के हैं, उन्होंने इस्तीफा क्यों दिया यह किसी को नहीं पता है, जो उन्होंने अपने इस्तीफा की चिट्ठी में बात रखी है कि स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है वो आधारहीन लगती है. चूंकि उन्होंने उस दिन राज्यसभा में दिनभर काम किया था. उनका स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक था, अभी भी उनका स्वास्थ्य ठीक है. उन्हें कोई तकलीफ नहीं है, लेकिन देश के अंदर संवैधानिक पदों और संस्थाओं पर जिस तरह से प्रहार किया जा रहा है उनको कमजोर किया जा रहा है, ये ठीक नहीं है. उपराष्ट्रपति के संवैधानिक पद तक तो पहुंच चुके हैं अब केवल राष्ट्रपति का पद बचा हुआ है.
मध्य प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में आएगी? : हरीश चौधरी ने कहा कि हमने मध्य प्रदेश में एक मजबूत संगठन का आधार रखा है. संगठन सृजन अभियान के जरिए हाल ही में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की गई है. भविष्य में निचले स्तर तक भी हम संगठन को मजबूत करेंगे और मजबूत संगठन के माध्यम से हम साल 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में चुनाव जीतकर बहुमत की सरकार बनाएंगे.




















