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भारत पर लगाया टैरिफ ट्रंप के लिए बना मुश्किल, न संभल रहा न टल रहा मुद्दा

भारत के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त टैरिफ नीति अब उन्हीं के लिए गले की हड्डी बनती दिख रही है. इस फैसले को लेकर अमेरिका में गहरी नाराज़गी उभर कर सामने आ रही है. ट्रंप की आलोचना अब उनके अपने देश के लोग भी कर रहे हैं, जिनमें एक प्रमुख नाम पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन का है. उन्होंने भारत पर लगाए गए प्रतिबंधों को “अत्यधिक और निरर्थक” बताया है. बोल्टन का साफ कहना है कि भारत ने न तो किसी अंतरराष्ट्रीय नियम का उल्लंघन किया और न ही किसी प्रतिबंध को तोड़ा. फिर भी जिस तरह से ट्रंप प्रशासन ने पूरे भारतीय व्यापार को निशाना बनाया, वह अमेरिका की विदेश नीति के लिए खतरनाक और उलटा असर डालने वाला साबित हो सकता है.

बोल्टन ने ट्रंप की नीति को बताया ‘विफल’

जॉन बोल्टन ने टाइम्स रेडियो को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए मजबूर करने वाले हालातों के लिए अमेरिका भी जिम्मेदार है. जब ईरान पर प्रतिबंध लगाए गए थे, तब अमेरिका ने सहयोगी देशों को छूट दी और वैकल्पिक स्रोत भी सुझाए थे. लेकिन भारत के मामले में ऐसी कोई पहल नहीं की गई. उन्होंने कहा, हम भारत को रूसी ऊर्जा पर निर्भर होने से रोक सकते थे, लेकिन हमने वो मौका गंवा दिया. बोल्टन ने माना कि ट्रंप की नीति ने भारत को रूस के और करीब धकेल दिया है. इससे अमेरिका और भारत के बीच वर्षों की मेहनत से बने रणनीतिक रिश्तों को नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा, ट्रंप ने संपूर्ण भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रतिबंध लगाकर हमारे अपने हितों को ही चोट पहुंचाई है.

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रूस से एनर्जी खरीद पर भारत ने नहीं तोड़े कोई नियम

बोल्टन ने यह स्पष्ट किया कि भारत ने रूसी तेल और गैस की खरीद में किसी भी तरह के अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन नहीं किया. उन्होंने बताया कि भारतीय कंपनियां यूरोपीय यूनियन की तय सीमा से कम कीमत पर रूसी तेल खरीदती हैं, उसे रिफाइन कर वैश्विक बाजार में बेचती हैंऔर यह पूरी तरह वैध है. उनका कहना है कि यह अमेरिका और यूरोपीय देशों की कमजोरी रही कि वे रूसी तेल की बिक्री को संतुलित रूप से कम करना चाहते थे, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें न बढ़ें. इस रणनीति ने भारत को लाभ उठाने का अवसर दिया, लेकिन यह कोई गैरकानूनी कदम नहीं था.

अमेरिकी नीतियों की कीमत चुकानी पड़ सकती है

बोल्टन ने चेतावनी दी कि ट्रंप की गलत रणनीति का खामियाजा भविष्य में अमेरिका को उठाना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि रूस और चीन के बढ़ते गठजोड़ के बीच भारत को संतुलन बनाकर रखना बेहद जरूरी है. यदि भारत रूस की ओर और ज्यादा झुकता है तो यह अमेरिका के दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को नुकसान पहुंचा सकता है. उन्होंने दो टूक कहा कि हमने भारत को समझाने का मौका गंवाया और अब वही भारत रूसी ऊर्जा पर ज्यादा निर्भर हो गया है. इस गलती की हमें आने वाले वर्षों में बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है.

अब ट्रंप ने भारत को बताया ‘अच्छा दोस्त’

भारत की कड़ी प्रतिक्रिया और अमेरिका में उठते विरोध के बीच अब डोनाल्ड ट्रंप का रुख भी बदलता नजर आ रहा है. अपनी पहले की सख्ती से पीछे हटते हुए ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अच्छा दोस्त बताया है. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है, और वे खुद मोदी से मिलने के इच्छुक हैं. ट्रंप ने यह भी कहा कि दोनों देश आपसी व्यापारिक बाधाओं को दूर करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. उनके इस बदले हुए लहजे से साफ है कि अमेरिका के भीतर बढ़ती आलोचना और भारत की ओर से मिले सख्त जवाबों ने ट्रंप को अपने रुख में नरमी लाने पर मजबूर कर दिया है.

 

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