सीकर : नीमकाथाना पाटन इलाके में मंगलवार शाम खदान में बड़ा हादसा हो गया. दरअसल, रायपुर मोड़ स्थित कृष्ण माइंस में काम कर रहे 6 श्रमिकों पर अचानक ऊपरी हिस्से से भारी-भरकम पत्थर और मलबा गिर पड़ा. इस दर्दनाक हादसे में दो श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल है. मृतकों में से एक का शव देर रात करीब 12 बजे बाद बरामद किया गया.
पाटन थानाधिकारी विक्रम सिंह ने बताया कि घटना शाम करीब 5 बजे हुई. हादसे के बाद खदान में मौजूद लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी. पुलिस टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू कराया. मलबे में दबे मजदूरों के साथ खनन कार्य में लगी पोकलेन मशीन, एक डंपर और अन्य मशीनें भी दब गईं. एक मजदूर का शव देर रात करीब 12 बजे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद निकाला जा सका. इस दौरान नीमकाथाना एसडीएम राजवीर सिंह और खान विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची.
हादसा कैसे हुआ : मामले के अनुसार मंगलवार शाम करीब 5 बजे रायपुर मोड़ स्थित खदान में चार पोकलेन मशीनें और एक डंपर के साथ मजदूर काम कर रहे थे. उस समय कुल 6 श्रमिक खदान में मौजूद थे. काम के दौरान ही अचानक ऊपरी हिस्से में मिट्टी और भारी पत्थरों का बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया. देखते ही देखते खदान का माहौल चीख-पुकार और दहशत से भर गया. मलबे में पोकलेन ऑपरेटर सुरेंद्र हरिजन (35) पुत्र अमर सिंह निवासी जाफरपुर, बिजनौर, उत्तर प्रदेश, लक्ष्मण सिंह राजपूत (45) पुत्र पाबूदान निवासी बारीवाला, गणेश्वर और नीतीश यादव (28) निवासी बिहार दब गए. श्रमिक के साथ ही दो पोकलेन मशीनें और एक डंपर भी दब गए.
मैं नीचे पोकलेन से पत्थर भर रहा था. लक्ष्मण सिंह गाड़ी में पत्थर डलवा रहा था और मेरा चचेरा भाई सुरेंद्र दूसरी मशीन चला रहा था. अचानक कई टन वजनी पत्थर लुढ़ककर नीचे गिरे और सब कुछ मलबे में दब गया. मैं मशीन के अंदर ही छुप गया और किसी तरह बच पाया. जब बाहर निकला तो देखा कि लक्ष्मण और सुरेंद्र दब चुके थे. नीतीश गंभीर घायल था जिसे तुरंत बाहर निकाल लिया गया.
घटना की सूचना मिलते ही पाटन पुलिस थाना अधिकारी विक्रम सिंह मय जाप्ते मौके पर पहुंचे. ग्रामीणों और पुलिस ने राहत व बचाव कार्य शुरू किया. बड़ी मात्रा में मलबा हटाने के लिए जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद ली गई. रेस्क्यू दल ने सबसे पहले लक्ष्मण सिंह राजपूत और नीतीश यादव को बाहर निकाला. लक्ष्मण सिंह को बचाया नहीं जा सका और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया. नीतीश को गंभीर हालत में नीमकाथाना अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है. वहीं, सुरेंद्र हरिजन मशीन सहित पत्थरों के नीचे दबा रहा. लगातार प्रयासों के बाद देर रात करीब 12 बजे उसका शव मलबे से बाहर निकाला गया. शवों को पाटन अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है.
खदान हादसे की जांच के आदेश दे दिए गए हैं. नियमानुसार गहराई से तहकीकात की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी.
स्थानीय मजदूरों और ग्रामीणों ने खदान प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया. उनका कहना है कि सोमवार रात को भी पहाड़ का हिस्सा दरका था, लेकिन प्रबंधन ने सुरक्षा इंतजाम नहीं बढ़ाए. खदान में न तो सुरक्षा दीवार बनाई गई थी और न ही मलबा हटाने की उचित व्यवस्था की गई. ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले ही सुरक्षा उपाय किए जाते तो मजदूरों की जान बच सकती थी.
विभाग अपने स्तर पर अलग से जांच करा रहा है. यदि सुरक्षा मानकों में कमी पाई गई तो जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होगी. बरसात के दिनों में खनन की स्वीकृति दी जाती है, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से नियमों का पालन अनिवार्य होता है.
हादसे की सूचना के बाद मृतकों के गांवों में मातम पसरा है. लक्ष्मण सिंह राजपूत गणेश्वर के बारीवाला गांव का रहने वाला था और वह लंबे समय से खदानों में काम कर रहा था. सुरेंद्र हरिजन यूपी के बिजनौर जिले का निवासी था और अपने परिवार का पेट पालने के लिए राजस्थान आया हुआ था. वहीं, घायल नीतीश यादव बिहार का रहने वाला है और मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा है.




















