भगवान गणेश जी को “विघ्नहर्ता” और “सिद्धि विनायक” कहा जाता है। उनकी कथा बहुत प्रेरणादायक और ज्ञान से भरी है।
🌟 जन्म कथा :
एक बार माता पार्वती स्नान के लिए जा रही थीं। उन्होंने अपने शरीर के उबटन (हल्दी-चंदन के लेप) से एक सुंदर बालक की रचना की और उसमें प्राण फूँक दिए।
वही बालक गणेश जी बने।
पार्वती जी ने गणेश जी से कहा — “बेटा, जब तक मैं स्नान कर रही हूँ, इस द्वार की रक्षा करना।”
इतना कहकर माता भीतर चली गईं।
🌟 शिव जी का आगमन :
इसी दौरान भगवान शिव वहाँ आए। गणेश जी ने उन्हें रोक दिया और कहा —
“माता के आदेश के बिना आप अंदर नहीं जा सकते।”
शिव जी को यह बात नागवार गुज़री। उन्होंने कहा —
“मैं स्वयं पार्वती का पति हूँ, मुझे कौन रोक सकता है?”
लेकिन गणेश जी अपनी माँ के आदेश पर अडिग रहे।
🌟 युद्ध और सिर काटना :
शिव जी ने अपने गणों को आदेश दिया कि इस बालक को हटाओ।
परंतु गणेश जी ने अकेले ही सबको पराजित कर दिया।
अंत में स्वयं शिव जी क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से गणेश जी का सिर काट देते हैं।
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🌟 पार्वती का शोक और उपाय :
जब माता पार्वती बाहर आईं और यह दृश्य देखा, तो वे रो पड़ीं और शिव जी से कहा —
“आपने मेरे पुत्र को मार डाला, यदि इसे जीवित नहीं किया गया तो मैं सृष्टि का नाश कर दूँगी।”
शिव जी ने सभी देवताओं को बुलाया और समाधान खोजा गया।
🌟 हाथी का सिर :
देवताओं ने उत्तर दिशा में पहला प्राणी खोजा — वह हाथी था।
उसका सिर काटकर गणेश जी के धड़ पर लगाया गया और शिव जी ने उन्हें पुनर्जीवित किया।
तभी से वे गजमुख (हाथी-मुख वाले) कहलाए।
🌟 आशीर्वाद :
सभी देवताओं ने उन्हें आशीर्वाद दिया —
“गणेश जी की पूजा सबसे पहले होगी। वे विघ्नहर्ता कहलाएँगे और उनकी आराधना से सभी कार्य सफल होंगे।”
🙏 इसीलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत श्री गणेश जी के स्मरण और पूजन से होती है।




















