पंचायत चुनाव के सुगबुगाहट से वर्तमान पंचायत जनप्रतिनिधियों की धड़कनें तेज होने लगी हैं, तो संभावित उम्मीदवारों ने अभी से ताल ठोकना शुरू कर दिया है।
अपनी कुर्सी बचाकर रखने के लिए वर्तमान पंचायत जनप्रतिनिधियों जहां ग्रामीणों से नजदीकियां बढ़ा रहे हैं और जनसेवा के किए कार्यों का खूब बखान कर रहे हैं। वहीं, पुराने चेहरे व सम्भावित नए उम्मीदवार भी गांव के गलियारों में चहलकदमी तेज कर लोगों से मिल जूल कर अपनी दावेदारी की वजह गिना रहे हैं।
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फिलहाल गांवों की राजनीति के जरिए भविष्य तलाशने वालों में हलचल तेज हो गई है। मुख्य धारा से कटे गांव अब सियासी धूरी बन गए है। पंचायतों की राजनीति के रसूखदार राजनीतिक गोटी बिछाने में जुट गए है। दूसरी तरफ मतदाताओं का कहना है कि वे गांवों की अनदेखी या गांवों से दूर रहकर ग्रामीण राजनीति करने वालों से पांच साल का हिसाब मांगेंगे




















