जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पंचायत चुनाव समय पर कराने को लेकर निर्देश दिए हैं. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद कांग्रेस, बीजेपी पर हमलावर है. इस पर पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने मंगलवार को कहा कि न्यायालय के फैसले की समीक्षा करेंगे. कोर्ट का आदेश सर्वमान्य है. इसके साथ ही दिलावर ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हार का डर बीजेपी को नहीं, बल्कि कांग्रेस को होना चाहिए, क्योंकि जनता ने उपचुनाव में उन्हें धूल चटा दी थी. जिस पार्टी को 2023 के बाद हर बार उपचुनाव में मिली हो, वह इस तरह की बयानबाजी ना ही करे तो बेहतर है.
दिलावर ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि न्यायालय का आदेश सर्वमान्य होता है. उसका अध्ययन किया जाएगा. आदेश की समीक्षा होगी. न्यायालय के आदेश के अनुसार ही आगे काम किया जाएगा. जहां तक कांग्रेस के आरोपों का सवाल है, तो कांग्रेस के लोग कुछ बोलते ही रहते हैं. इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि जनता के हितों को देखते हुए पंचायत चुनाव होंगे. दिलावर ने कहा कि आने वाले पंचायत और निकाय चुनाव में जनता भाजपा पर विश्वास जताएगी. उन्होंने दावा किया कि जनता कांग्रेस को फिर से नकार देगी और भाजपा पर अपना भरोसा जताएगी.
वन स्टेट वन इलेक्शन की दिशा में हो रहा काम: दिलावर ने कहा कि वन स्टेट वन इलेक्शन को लेकर भी मंथन चल रहा है. मंत्रिमंडल की सब-कमेटी लगातार इस पर काम कर रही है. कमेटी सुझाव ले रही है और उस पर आ रही आपत्तियों पर भी चर्चा कर रही है. एक साथ सभी चुनाव हों, इस पर विचार चल रहा है. वन स्टेट वन इलेक्शन होगा और कांग्रेस की किसी तरह की गलतफहमी दूर हो जाएगी. विधानसभा सत्र के समय कांग्रेस की तरफ से उठाए जाने वाले मुद्दों पर दिलावर ने कहा कि सवालों का मुकाबला करना आता है. इससे पहले भी जब भी कांग्रेस ने किसी तरह के मुद्दे उठाए, हमने उसका मजबूती से जवाब दिया है.
हाईकोर्ट ने दिखाई थी सख्ती: बता दें कि राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों में हो रही देरी पर सख्त टिप्पणी की थी. अदालत ने कहा था कि परिसीमन (सीमांकन) की आड़ में चुनाव को बार-बार टालना संविधान की भावना के खिलाफ है. पंचायतें लोकतंत्र की निचली इकाई हैं, जिन्हें लंबे समय तक प्रशासकों के हवाले नहीं छोड़ा जा सकता. हाईकोर्ट के जस्टिस अनूप ढंड ने महावीर प्रसाद और अन्य 16 याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी दी थी. अदालत ने स्पष्ट कहा कि जिन पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, वहां अधिकतम छह महीने के भीतर चुनाव होना अनिवार्य है.
कांग्रेस भी दिखा रही है आंखें! उधर, पंचायत और निकाय चुनावों में हो रही देरी पर कांग्रेस लगातार भाजपा को आंखें दिखा रही है. पूर्व सीएम अशोक गहलोत और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित कांग्रेस के तमाम नेता लगातार पंचायत और निकाय चुनाव के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने तो यहां तक कह दिया था कि बीजेपी हार के डर से पंचायत और निकाय चुनाव में समय आगे बढ़ा रही है. उन्होंने कहा था कि मौजूदा सरकार के कामकाज से अब जनता ऊब चुकी है, सरकार पर अब जनता का भरोसा नहीं रहा और इसका असर आने वाले पंचायत और निकाय चुनाव में दिखाई देगा. जनता के बीच बढ़ता आक्रोश सरकार को दिखाई दे रहा है, इसलिए वह चुनाव में देरी कर रही है.




















