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छात्रों को शोध और पढ़ाई का अनुभव मिलेगा एक साथ, विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी भी होगी दूर

जयपुर : राजस्थान विश्वविद्यालय में शोध और पढ़ाई का अनुभव अब साथ-साथ मिलेगा. यूनिवर्सिटी की एकेडमिक काउंसिल ने तय किया है कि पीडीएफ (post-doctoral fellowship), एसआरएफ और जेआरएफ में पंजीकृत शोधार्थियों को शोध कार्य के दौरान ही हर सप्ताह 6 से 10 कक्षाओं का अध्यापन कार्य सौंपा जाएगा, जिससे वे पढ़ाने का अनुभव भी अर्जित करेंगे और विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी भी दूर होगी. साथ ही, पीएचडी प्रवेश अब नेट और समकक्ष परीक्षाओं के आधार पर होंगे, जिससे सैकड़ों छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा और शोध कार्यों को नई गति मिलेगी.

राजस्थान विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल ने यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) की ओर से पीएचडी प्रवेश के संबंध में जारी नए नियमों को विश्वविद्यालय में लागू करने पर मोहर लगा दी है. नए नियमों के अनुसार पीएचडी प्रवेश परीक्षा के स्थान पर अब सीधे राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) और अन्य समकक्ष परीक्षाओं के आधार पर पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश हो सकेगा. इससे पहले पीएचडी प्रवेश परीक्षा का आयोजन गत वर्ष फरवरी 2024 में कराया गया था. अब विश्वविद्यालय में नए नियमों को लागू कर जल्द ही पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो सकेगी, जिससे सैकड़ों शोधार्थियों को फेलोशिप प्राप्त हो सकेगी. साथ ही विश्वविद्यालय में शोध कार्यों को बढ़ावा मिलेगा.

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विश्वविद्यालय कुलगुरु प्रोफेसर अल्पना कटेजा ने बताया कि एकेडमिक काउंसिल रिसर्च के दौरान सुपरवाइजर चेंज करने संबंधी प्रस्ताव पर भी मुहर लगा दी है. इसके अलावा यूजीसी विनियम 2018 के अनुसार विश्वविद्यालय में शिक्षकों के चयन और सीएएस के तहत पदोन्नति के नियमों को एडॉप्शन किया गया है. इससे विश्वविद्यालय में रिक्त पदों पर नियुक्ति के साथ ही लगभग 400 कार्यरत शिक्षकों की लम्बित पदोन्नति प्रक्रिया का मार्ग भी प्रशस्त हो सकेगा.

एकेडमिक काउंसिल की ओर से विद्यार्थी को मल्टीपल डिसेबिलिटी के कारण RPWD Act, 2016 के तहत होम साइंस कोर्स और प्रेक्टिकल सब्जेक्ट के लिए विशिष्ट सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए करिकुलम स्टडी बोर्ड की ओर से की गई सिफारिशों का अनुमोदन किया गया. इसके साथ ही विश्वविद्यालय में शैक्षणिक व्यवस्था में गुणात्मक सुधार की दिशा में विभिन्न संस्थानों से किए गए एमओयू का अनुमोदन किया गया, जिनमें श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, भारत मौसम विज्ञान विभाग, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड व वासोल एनर्जीज से किए गए एमओयू शामिल हैं. इससे विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को अधिक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ ही उनमें रोजगारोन्मुखी कौशल संवर्धन सम्भव हो सकेगा.

प्रोफेसर कटेजा ने बताया कि एकेडमिक काउंसिल की ओर से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार नए अध्यादेशों को विश्वविद्यालय में लागू किए जाने सहित कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विचार-विमर्श किया गया है. विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों में रोजगारोन्मुख कौशल संवर्धन के लिए सेंटर फॉर रिसर्च इन स्कीम्स एंड पॉलिसीज (CRISP) की ओर से अनुशंसित अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री और डिप्लोमा प्रोग्राम (AEDP) को मान्यता प्रदान की गई. वहीं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के तहत विश्वविद्यालय के यूजी और पीजी स्तर के स्वयंपाठी सहित सभी वार्षिक पाठ्यक्रमों को सेमेस्टर प्रणाली और चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (CBCS) से रिप्लेस किया जा रहा है. सेमेस्टर पद्धति में अब वर्ष में दो बार सेमेस्टर परीक्षाएं और मिड टर्म परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी. सतत मूल्यांकन के अन्तर्गत विद्यार्थियों को कम से कम 40 प्रतिशत प्राप्तांक अर्जित करना अनिवार्य होगा.

साथ ही भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के पीजी पाठ्यक्रमों में स्टडी वेब्स ऑफ एक्टिव लर्निंग फॉर यंग एस्पायरिंग माइंड्स (Study Webs of Active-Learning for Young Aspiring Minds) के कोर्सेज को इलेक्टिव कोर्स (Elective Course) के रूप में चयन करने का प्रावधान किया गया है. पिछले शैक्षणिक सत्र में राजस्थान सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (R-CAT) और टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (TCS) के साथ एमओयू किए गए थे. इन एमओयू के तहत R-CAT के Industry Ready Courses और TCS के Industry Honour Courses (IHC) ऑनलाइन पाठ्यक्रम सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराए जाएंगे. एकेडमिक काउंसिल की ओर से इन पाठ्यक्रमों को मान्यता प्रदान की गई और विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की ओर से इन पाठ्यक्रमों का चयन किए जाने की स्थिति में उनको एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC) में क्रेडिट बेनिफिट भी दिया जाएगा.

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