जयपुर : 15 अगस्त 1947 की वो सुबह जब सूरज ने आजादी की नई किरण के साथ भारत को रोशन किया. लाखों लोगों की शहादत और बलिदान के बाद मिली आजादी को लेकर देश भर में जश्न मनाया जा रहा था. त्याग और बलिदान का प्रतीक भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लहराया जा रहा था, ऐसा ही एक नजर उस दिन जयपुर शहर में भी देखने को मिला था. जब जयपुर की हृदयस्थली कहे जाने वाले बड़ी चौपड़ पर एक बड़ा मंच लगाया गया था और हजारों लोग बड़ी चौपड़ के आसपास खड़े होकर उस पल का इंतजार कर रहे थे जब देश का तिरंगा झंडा लहराने वाला था.
जयपुर प्रजामंडल से जुड़े टीकाराम पालीवाल ने तिरंगा झंडा फहराया था. तिरंगा झंडा फहराने के साथ ही बड़ी चौपड़ और आसपास का इलाका वंदे मातरम के नारों से गूंज उठा. बड़ी चौपड़ जो रियासत काल में सिर्फ व्यापार और मेलों के लिए जानी जाती थी उस दिन तिरंगे झंडे के लिए जानी गई. झंडारोहण के बाद टीकाराम पालीवाल ने कहा था कि ये झंडा सिर्फ एक कपड़ा नहीं, यह हर भारतीय की कुर्बानी सपना और हाथ में बाल का प्रतीक है.
जयपुर के लोगों ने उस दिन मिठाइयां बांटी, ढोल नगाड़े बजाए गए. प्रभात फेरियां और झांकियां निकाली. जयपुर वासियों ने पहली बार खुद को गुलाम नहीं बल्कि आजाद महसूस किया. 15 अगस्त की पूर्व संध्या को जयपुर शहर में उस दिन घरों और बाजारों में घी के दीए जलाए गए थे और लोग उस सुबह का इंतजार कर रहे थे जब आजादी मिलने वाली थी और लोग उस आजादी में सांस लेने के लिए आतुर थे. बड़ी चौपड़ पर आज भी हर साल 15 अगस्त को झंडारोहण होता है. जयपुर प्रजामंडल से जुड़े और बड़ी चौपड़ पर आजाद भारत का पहला तिरंगा फहराने वाले टीकाराम पालीवाल बाद में राजस्थान के चौथे मुख्यमंत्री बने थे. जयपुर रियासत के प्रधानमंत्री भी हुए थे झंडारोहण में शामिल.
प्रसिद्ध शिक्षाविद और जयपुर के इतिहास पर बारीकी से नजर रखने वाले सुनील शर्मा का कहना है कि 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता सेनानी बाबा हरिश्चंद्र शर्मा ने प्रभात फेरी निकाली थी. बड़ी चौपड़ पर पूर्व दिशा पर एक मंच लगाया गया क्योंकि जयपुर प्रजा मंडल के प्रमुख नेता हीरालाल शास्त्री और जयपुर के तत्कालीन महाराजा मानसिंह द्वितीय दोनों ही जयपुर में नहीं थे, जिस पर प्रजामंडल के दूसरे शीर्ष नेता टीकाराम पालीवाल ने बड़ी चौपड़ पर झंडा रोहण किया. महाराजा मानसिंह द्वितीय की अनुपस्थिति में उनके प्रधान झंडारोहण कार्यक्रम में शरीक हुए थे. उसके बाद तमाम लोग गोविंद देव जी मंदिर गए और वहां जाकर भगवान से देश की समृद्धि और की प्रार्थना की. 15 अगस्त की शाम को बाबा हरिश्चंद्र शर्मा के नेतृत्व में एक मशाल जुलूस भी निकाला गया था.
सुनील शर्मा ने कहा कि उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी आचार्य पुरुषोत्तम भी इस विशाल जुलूस में शामिल हुए थे. क्योंकि वे 1940 से ही आजादी के आंदोलन से जुड़े हुए थे. सुनील शर्मा ने कहा कि सोहनलाल दूगड़ ने दलितों के लिए अपने घर पर भोज का आयोजन किया तो वहीं नगर परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष गुलाब जी कासलीवाल ने पूरे शहर में घी के दीपक जलाए थे. उस दिन जयपुर में दीपावली पर्व जैसा नजारा देखने को मिला था.




















