जोधपुर : एमबीबीएस और मेडिकल यूजी कोर्सेज के बाद में मेडिकोज में स्पेशलाइजेशन हासिल करने का क्रेज साल दर साल परवान पर चढ़ता जा रहा है. नीट पीजी के रजिस्ट्रेशन में पिछले 12 सालों में करीब 2.5 गुना तक बढ़ोतरी हो गई है. वर्ष 2013 में 95,673 मेडिकोज ने नीट पीजी के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया था, वहीं वर्ष 2025 में रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 2,42,680 तक पहुंच गया. इसका एक कारण जहां एमबीबीएस की सीटें बढ़ना है, वहीं दूसरा कारण मेडिकोज विशेषज्ञता हासिल करने में ज्यादा फोकस करने लगे हैं.
पूर्व में एमबीबीएस के बाद मेडिकल ऑफिसर की सरकारी नौकरी पर फोकस था, लेकिन अब एमडी, एमएस डिग्री के बाद इस ओर रुख किया जा रहा है. डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के पीएसएम विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अफजल हाकिम का कहना है कि पहले पीजी की सीमित सीटें से कॉम्पिटिशन ज्यादा था, इसलिए बहुत ज्यादा रजिस्ट्रेशन नहीं होते थे. एक दशक में पीजी की सीटें बढ़ने के साथ मेडिकोज स्पेशलाइजेशन बनने के लिए मेहनत करते हैं.
2.5 गुना बढ़ गया रजिस्ट्रेशन : उन्होंने बताया कि पिछले 12 सालों में रजिस्ट्रेशन में 153.70% यानी करीब 2.5 गुना वृद्धि हो गई है. वर्ष 2017 के बाद में रजिस्ट्रेशन के आंकड़े प्रति वर्ष 5 से लेकर 17 प्रतिशत तक बढ़े हैं. नीट पीजी में वर्ष 2013 में 95,673 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था, लेकिन अगले वर्ष 2014 में 24.5% की गिरावट (72,208) हो गई. इसके बाद में 2015 में 9.7% की वृद्धि होकर 79,237 रजिस्ट्रेशन हुए, लेकिन 2016 में केवल 0.8% का सुधार होकर 79,872 रजिस्ट्रेशन हुए.
2017 में एक लाख पार हुई संख्या : 2017 में अचानक से ही नीट पीजी के 52.1% रजिस्ट्रेशन बढ़े. इस साल 1,21,441 मेडिकोज ने रजिस्ट्रेशन करवाया. 2018 में 10.8% (134,582), 2019 में 7.6% (148,713), 2020 में 12.4% (167,102) और 2021 में 5.0% (175,415) की वृद्धि हुई. कोविड-19 के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में नए अवसरों के चलते मेडिकोज का स्पेशलाइजेशन में आकर्षण भी बढ़ता गया.
2025 में रिकॉर्ड 2.42 लाख रजिस्ट्रेशन हुए : पिछले चार वर्षों में नीट पीजी में लगातार आंकड़े बढ़ने के साथ ही वर्ष 2025 में नया कीर्तिमान स्थापित होकर रिकॉर्ड 2.42 लाख रजिस्ट्रेशन हुए हैं. 2024 में 9.5% बढ़ोतरी से 2,28,757 रजिस्ट्रेशन हुए थे. 2025 में वर्ष 2014 के मुकाबले 6.1% की शानदार बढ़ोतरी होकर 2,42,680 रजिस्ट्रेशन हो गए. वर्ष 2025 में नया रिकॉर्ड कायम हुआ है.
रेडियोलॉजी, मेडिसिन के लिए सर्वाधिक मारामारी : पीजी करने में सबसे ज्यादा एमबीबीएस रेडियोलोजी और मेडिसिन डिपार्टमेंट के लिए संघर्ष करते हैं. इसकी एक वजह यह है कि मेडिसिन में एचडी करने के बाद सुपर स्पेशलिटी के रास्ते खुल जाते हैं. इससे कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेषज्ञ के लिए डीएम करने की अहर्ता मिल जाती है. रेडियोलॉजी में पीजी सबसे बड़ी पसंद है. खास तौर से इसमें पीजी करने के बाद निजी क्षेत्र में डॉक्टर्स काम करते हैं. इसके बाद सर्जरी का नंबर आता है, इसमें पीजी के बाद कार्डियक सर्जन, न्यूरोसर्जन, गैस्ट्रो सर्जन बन सकते हैं.




















