जयपुर: चुनाव में तथाकथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के दावे के बाद अब राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्रीय चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के खुलासे के बाद उनसे शपथ पत्र मांगा जा रहा है, जबकि शपथ पत्र तो चुनाव आयोग को देना चाहिए कि चुनाव में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है. वे बोले, राहुल गांधी संवैधानिक पद पर हैं. उन्होंने संविधान की शपथ ली है. अब वे चुनाव आयोग को शपथ पत्र देंगे? शपथ पत्र तो चुनाव आयोग को देना चाहिए कि हमने जांच करवा ली है. कोई गड़बड़ी नहीं है. अशोक गहलोत ने यह भी दावा किया है कि राहुल गांधी के खुलासे के बाद राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार के चुनाव आयोग की वेबसाइट बंद हो गई हैं. उन्होंने केंद्र सरकार पर संस्थाओं का दुरूपयोग करने का भी आरोप लगाया है.
बनी रहनी चाहिए संस्थाओं की विश्वसनीयता: अशोक गहलोत ने शुक्रवार को जयपुर में पत्रकारों से बातचीत में कहा, संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनी रहनी चाहिए. चाहे, ईडी हो, सीबीआई हो या चुनाव आयोग हो. चुनाव आयोग के साथ तो देश में लोकतंत्र का भविष्य जुड़ा हुआ है. राहुल गांधी ने जो मामला उठाया और इसे एटम बम बताया है. एटम बम का असर एक ही जगह होता है, लेकिन इसका असर देश के 140 करोड़ लोगों पर पड़ रहा है. अगर ऐसे काम होगा तो लोकतंत्र कहां रहेगा.
राहुल गांधी ने किया देश को सचेत: राहुल गांधी ने देशवासियों को सचेत किया है. गहलोत बोले, ‘राहुल गांधी ने गुरुवार को जो प्रेजेंटेशन दिया था. वह मामूली नहीं है. यह एक मैसेज है कि कैसे लीकेज हो रहा है या विश्वसनीयता कम हो रही है.’ उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की साख कम हो रही है. यह दुर्भाग्यजनक है. दूसरे देशों के चुनाव अधिकारी हमारे यहां ट्रैनिंग लेते थे. क्या आज वह साख बची है. चुनाव आयोग के SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट क्या कमेंट कर रहा है. यह दुनिया देख रही है.
नियुक्ति प्रक्रिया बदलने के बाद ही होने लगा संदेह: अशोक गहलोत बोले, मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़ा कानून बदलने के लिए जिस तरह खेल हुआ और 4-6 दिन में नया कानून बन गया. पहले प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करते थे. फिर चीफ जस्टिस को हटाकर गृहमंत्री अमित शाह को लगाया गया. इसके बाद से ही चुनाव आयोग को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा होने लगा और चुनाव आयोग का रवैया भी बदला हुआ है.
उन्होंने आजादी की लड़ाई में अंगुली तक नहीं कटाई: अशोक गहलोत ने आरएसएस और भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा, उनसे क्या उम्मीद की जाए. उन्होंने तो आजादी की लड़ाई में भी अंगुली तक नहीं कटाई. उनका संविधान में भरोसा नहीं है. उन्हें कोई चिंता नहीं है कि चुनाव आयोग क्या कर रहा है. आयोग तो वही कर रहा है. जो भाजपा चाहती है. उन्होंने कहा, आजादी के बाद जब संविधान बना तो पहले दिन से ही महिला-पुरुष, हर जाति-धर्म के लोगों को एक वोट का अधिकार मिला, जबकि बड़ी-बड़ी बातें करने वाले अमेरिका को इसमें 150 साल लग गए. भारत में महात्मा गांधी और कांग्रेस का नेतृत्व था.
दुनिया में अकेला पड़ा देश: अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारत पर टैरिफ लगाने से जुड़े सवाल पर कहा, जब समस्या आती है तो चारों तरफ से आती है. ट्रंप के मामले में यह कहावत लागू हो गई है. कभी किसी देश की हिम्मत नहीं होती थी कि वह सरकार या हिंदुस्तान के बारे में ऐसी सोच रखे. हिंदुस्तान ने अमेरिका को उस समय भी करारा जवाब दिया था. जब अमेरिका का सातवां बेड़ा आ गया था. अब हम चारों तरफ से घिर रहे हैं. ऑपरेशन सिंदूर हुआ तो चीन-पाकिस्तान एक हो गए. तुर्किए भी उनके साथ आ गया. अमेरिका भी डायरेक्ट-इनडायरेक्ट उनके साथ ही था. रूस हमारा मित्र था. वह भी चुप था. अब ट्रंप की हिम्मत हो रही है कि 25 फीसदी टैरिफ की धमकी दी. फिर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का कहा. अब कह रहे हैं कि वह कुछ भी कर सकते हैं.
हम कन्हैयालाल के हत्यारों को सजा दिलवाते: उदयपुर के कन्हैयालाल हत्याकांड को लेकर गहलोत ने कहा कि उस समय जो हुआ तो हमारा प्रयास था कि प्रदेश में तनाव का माहौल नहीं बने. इसके लिए हमने स्टेप उठाए और दो-तीन घंटे में हत्यारों को पकड़ लिया. उनके बच्चों को नौकरी दी और पहली बार किसी को 50 लाख का मुआवजा मिला. उसी रात यह केस हमारी पुलिस से एनआईए ने ले लिया. उसके बाद यह हालात यह हैं कि तीन साल से कोर्ट में बयान ही हो रहे हैं. हमारे हाथ में होता तो हम 6-8 महीने में हत्यारों को सजा दिलवा देते. अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि हत्यारों का संबंध भाजपा से है. आखिर क्या कारण है कि इस मामले को डाउन प्ले किया गया.




















