जयपुर : सेना पर टिप्पणी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी से दो टूक शब्दों में सवाल पूछा कि आपको कैसे पता चीन ने भारत की जमीन हड़प ली है? सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर आप सच्चे भारतीय हैं तो सेना के बारे में आपको ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट की ओर से की गई टिप्पणी के बाद सियासी बयान बाजी तेज हो गई है. राज्यसभा सांसद और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला. मंगलवार को दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए राठौड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से बार-बार फटकार मिलना यह दर्शाता है कि राहुल गांधी बिना तथ्य के, गैर-जिम्मेदाराना और राष्ट्रविरोधी बयानबाजी करते रहे हैं. विशेषकर भारतीय सेना के संदर्भ में. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट की फटकार राष्ट्रविरोधी मानसिकता का परिणाम है.
आश्चर्य और शर्मनाक बात : मदन राठौड़ ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक जैसे देश की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी राहुल गांधी ने सेना की नीयत और कार्यशैली पर सवाल उठाए. जब सेना ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया तो राहुल गांधी और उनकी टीम ने यह पूछना शुरू कर दिया कि ‘क्या सबूत हैं’? क्या ये सब उन्होंने जाकर खुद देखा था? उन्होंने आरोप लगाया कि जब गलवान में हमारी सेना चीन की आर्मी को अपनी वीरता का प्रराक्रम दिखा रही थी तब राहुल गांधी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सेना को लेकर अपमानजनक बातें कह रहे थे, यह आश्चर्य और शर्मनाक बात है. राठौड़ ने कहा कि 1962 में जब देश के प्रधानमंत्री नेहरू थे, तब चीन ने जमीन हड़पी थी. आज जब हमारी सेना पूरी मजबूती से खड़ी है तब भी राहुल गांधी कहते हैं कि 2000 वर्ग किलोमीटर जमीन चीन ने ले ली. सुप्रीम कोर्ट ने भी यही सवाल किया – क्या आपके पास कोई तथ्य हैं?
माफीनामा बताना अज्ञानता : राठौड़ ने सावरकर पर दिए गए राहुल गांधी के बयानों की भी तीखी आलोचना करते हुए कहा कि सावरकर जैसे क्रांतिकारी, जिन्होंने तीन बार कालापानी की सजा भुगती, उनके त्याग और बलिदान का अपमान राहुल गांधी ने किया. अंग्रेजों को लिखे पत्रों की भाषा को माफीनामा बताना अज्ञानता है. महात्मा गांधी तक ने ‘योर्स ओबिडियेंट सर्वेंट’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया था तो क्या गांधी ने माफी मांगी थी, नहीं ? वह उस समय की औपचारिक शैली थी, न कि कोई माफीनामा. मदन राठौड़ ने प्रधानमंत्री मोदी के सरनेम पर दिए गए बयान को जातिगत अपमान की श्रेणी में बताते हुए कहा कि विपक्षी नेता एक ओबीसी समुदाय को जान बूझकर निशाना बना रहे है. इसी कारण माफी मांगनी पड़ी और न्यायालय की कार्रवाई का सामना भी करना पड़ा.
देश में समानता और न्याय की दिशा में : गृहमंत्री अमित शाह के कार्यकाल को लेकर राठौड़ ने कहा कि यह अब तक का सबसे प्रभावशाली कार्यकाल रहा है. अमित शाह ने अनुच्छेद 370 और 35A जैसे ऐतिहासिक फैसले लेकर जम्मू-कश्मीर को मुख्यधारा से जोड़ा. वहीं, नागरिकता संशोधन कानून के तहत पाकिस्तान और अन्य देशों से प्रताड़ित होकर आए हिंदुओं को नागरिकता दी गई. राठौड़ ने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड लाकर देश में समानता और न्याय की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं. अमित शाह का योगदान न केवल उल्लेखनीय है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अनुकरणीय भी रहेगा.




















