भरतपुर : महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में इस बार बेटियों का दबदबा देखने को मिला. 49 मेडलिस्ट में 31 छात्राएं रहीं, जबकि 40 हजार से अधिक विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं. समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने विद्यार्थियों को सफलता के मंत्र दिए और शिक्षा को जीवन का वटवृक्ष बताते हुए समाज हित में योगदान देने का आह्वान किया. वहीं, उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने विद्यार्थियों से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान की अपील की.
49 विद्यार्थियों को पदक, 40 हजार से अधिक को डिग्रियां : शहर के यूआईटी ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ और उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कुल 49 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए, जिनमें 31 छात्राएं शामिल थीं. इस अवसर पर 40,324 विद्यार्थियों को डिग्रियां वितरित की गईं. बेटियों की अधिक भागीदारी पर विशेष रूप से खुशी जताई गई और इसे बेटियों की बढ़ती शैक्षणिक उपलब्धियों का प्रमाण बताया गया.
राज्यपाल ने शिक्षा और संस्कृति पर दिया जोर : समारोह के अध्यक्ष राज्यपाल ने समारोह में संबोधित करते हुए कहा कि महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय को नवीन शिक्षा, नवाचार और शैक्षणिक गुणवत्ता में विशिष्ट पहचान बनानी चाहिए. उन्होंने महाराजा सूरजमल के शौर्य और ऐतिहासिक उपलब्धियों को याद किया, जिसमें दिल्ली के किले से चित्तौड़गढ़ किले का दरवाजा उखाड़कर लोहागढ़ लाने का उल्लेख भी शामिल था.
राज्यपाल ने भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धति और संस्कृति को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश में शिक्षा प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति को मिटाने के हजारों प्रयास हुए, लेकिन वह आज भी जीवित है. उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में यदि कुछ कमाना है तो पहले विद्या कमाओ, बाकी सब कुछ अपने आप मिल जाएगा. शिक्षा एक बीज है जो जीवन को निरंतर निखारता है और इसे वटवृक्ष की तरह मजबूत बनाता है. डिग्री और पदक महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जीवन में ऐसा कार्य करो जिसे समाज हमेशा याद रखे.
उपमुख्यमंत्री बैरवा ने गिनाई उपलब्धियां : उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालयों को चाहिए कि वे उत्कृष्ट ग्रंथों का हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद कर आमजन तक पहुंचाएं. ज्ञान से बढ़कर कोई दृष्टि नहीं होती और विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देना चाहिए. बेटियों की सफलता पर उन्होंने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि अवसर मिलने पर वे अधिक उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं. उच्च शिक्षा में बेटियों के नामांकन में वृद्धि पर उन्होंने प्रसन्नता जताई. डॉ. बैरवा ने बताया कि बीते डेढ़ साल में राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए 71 नए राजकीय महाविद्यालयों की स्थापना की है, 143 महाविद्यालयों के भवनों का निर्माण कराया है और 32,907 स्कूटियों का वितरण किया है.




















