जयपुर: बीते 24 घंटे में पूर्वी राजस्थान में कुछ स्थानों पर मेघगर्जन के साथ हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई और कहीं-कहीं पर भारी से अतिभारी वर्षा दर्ज की गई. पश्चिमी राजस्थान में कहीं-कहीं पर मेघगर्जन के साथ हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई. राज्य में सर्वाधिक वर्षा पिलानी में 136.4 मिलीमीटर दर्ज की गई. राज्य में सर्वाधिक अधिकतम तापमान श्रीगंगानगर में 39.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. राज्य में निम्नतम न्यूनतम तापमान सिरोही में 21.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.
कहां कितनी बारिश: पूर्वी राजस्थान के पिलानी (झुंझुनू) में सर्वाधिक 14 सेमी वर्षा दर्ज की गई. इसके बाद बहादुरपुर (अलवर) में 11 सेमी, मण्डावर (अलवर), अलवर तहसील में 10-10 सेमी, चिड़ावा (झुंझुनू) 9 सेमी, रामगढ़ (अलवर) 7 सेमी, बुहाना (झुंझुनू ) और खंडार (सवाईमाधोपुर) में 6-6 सेमी वर्षा हुई. उदयपुर, डूंगरपुर, सीकर, टोंक, भरतपुर, बांसवाड़ा, दौसा और जयपुर जिलों में भी 1 से 5 सेमी तक की वर्षा दर्ज की गई. पश्चिमी राजस्थान में भी कुछ स्थानों पर हल्की वर्षा देखने को मिली. हनुमानगढ़ के भादरा में 3 सेमी, चूरू के राजगढ़/सादुलपुर में 1 सेमी और श्रीगंगानगर के सादुलशहर सीनियर में 1 सेमी वर्षा दर्ज की गई. इसके अलावा कहीं-कहीं हल्की फुहारे भी पड़ी. राज्यभर में मानसून की यह सक्रियता किसानों के लिए राहत की खबर लेकर आई है. इससे खरीफ की फसलों की बुवाई को गति मिलेगी और जल स्रोतों में भी बढ़ोतरी की संभावना है.
27 से 30 जुलाई तक भारी बरसात का अलर्ट: मौसम केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बना साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम अगले 24 से 36 घंटों में तीव्र होकर लो-प्रेशर सिस्टम में बदल सकता है. यह सिस्टम पूर्वी भारत की ओर बढ़ेगा, जिसका असर राजस्थान पर 27 से 30 जुलाई के बीच दिखाई देगा. इस दौरान कोटा संभाग में कहीं-कहीं अतिभारी वर्षा, जबकि भरतपुर, जयपुर और उदयपुर संभागों में भारी वर्षा की संभावना है. पूर्वी राजस्थान के जिलों अलवर, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और टोंक में भी तीव्र वर्षा की चेतावनी जारी की गई है. मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार आज राज्य के छह जिलों में हल्की से मध्यम और कहीं-कहीं तेज बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है, हालांकि, 24 और 25 जुलाई को प्रदेश में मौसम ज्यादातर शुष्क रहेगा, कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है.
प्रदेश के 181 बांध लबालब: जलसंसाधन विभाग के अनुसार बारिश के चलते कई बांधों में जलस्तर बढ़ा है. प्रदेश के 181 बांध पूरी तरह भर चुके हैं, जबकि एक दर्जन से अधिक बांध 90 फीसदी से अधिक भराव क्षमता पर हैं. साथ ही बड़ी खबर यह है कि स्थानीय नदियां जैसे जोधपुर की लूनी नदी और झुंझुनू की कटली नदी रिचार्ज हो गई है. रिपोर्ट के अनुसार राज्य के लगभग 30 से अधिक बांधों के गेट खोल दिए गए. छोटे और मध्यम बांधों में से 44 बांध पूरी तरह भरे, जबकि 408 आंशिक रूप से भरे हुए हैं.
बीसलपुर पूर्ण भराव से 10 सेंटीमीटर दूर: जयपुर, अजमेर और टोंक की जीवनरेखा माने जाने वाले बीसलपुर बांध के गेट कभी भी खोले जा सकते हैं. बीसलपुर बांध अपनी भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर के मुकाबले 98% यानी 315.40 आरएल मीटर पहुंच गया है. एडिशनल चीफ इंजीनियर देवी सिंह बेनीवाल ने कहा कि पिछले 10 घंटे में बांध में 3 सेन्टीमीटर पानी की आवक हुई है. पिछले तीनों दिनों से बरसात नहीं होने से त्रिवेणी नदी में भी उफान कम हुआ है. आज सुबह त्रिवेणी नदी का जलस्तर 2.90 मीटर के उफान पर दर्ज किया गया है. बांध में पूर्ण भराव क्षमता का 10 सेंटीमीटर पानी शेष रहा है. उधर, जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने स्पष्ट किया कि अभी बांध के गेट खोलने का कोई फैसला नहीं हुआ है. मंत्री रावत ने कहा कि जल प्रबंधन समय और आवश्यकता के अनुसार किया जाएगा.
नोनेरा बांध में जल संग्रहण शुरू: पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) की प्रमुख कड़ी माने जाने वाले नोनेरा बांध में जल संग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है. जानकारी के अनुसार PKC-ERCP रामजल सेतु परियोजना के तहत स्थित नोनेरा बेराज में देर रात सभी 27 गेट बंद कर जल भराव शुरू किया गया. जल संसाधन विभाग के आर.के. जैमिनी ने बताया कि यह बांध ERCP योजना का ‘हार्ट’ है. इसमें जल संग्रह शुरू होना योजना के क्रियान्वयन की दिशा में एक बड़ा कदम है. विभाग ने आमजन से कालीसिंध नदी और जल भराव क्षेत्र से दूर रहने की अपील की है, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके. नोनेरा में जलभराव की यह प्रक्रिया आगामी दिनों में ERCP के माध्यम से कई जिलों को सिंचाई और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगी.
पांचना बांध से नियंत्रित निकासी जारी: करौली जिले के पांचना बांध से मानसून सत्र के दौरान पानी की निकासी का क्रम जारी है. जल संसाधन विभाग ने मंगलवार को गेट नंबर 3 और 4 को 6 इंच तक खोलकर लगभग 1333 क्यूसेक पानी की निकासी की. वर्तमान में बांध का जलस्तर 258.25 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि इसका अधिकतम गेज स्तर 258.62 मीटर है. विभाग के अनुसार इस मानसून सीजन में अब तक कुल 1650 क्यूसेक पानी की निकासी की जा चुकी है. जल संसाधन विभाग के अधिकारी लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त पानी को नियंत्रित रूप से छोड़ा जा सके और निचले इलाकों में जलभराव जैसी स्थिति उत्पन्न न हो.
जवाई बांध में भी पानी की आवक: मारवाड़ के प्रमुख जवाई बांध का जलस्तर बुधवार को 33.5 फीट पहुंचा, जो इसकी कुल क्षमता 61.25 फीट का हिस्सा है. वर्तमान जल भंडारण 2249.25 एमसीएफटी है. यहां सेई बांध से बेड़ा नदी के जरिए पानी की आवक जारी है. इसका गेज 3.50 मीटर (10.93 फीट) है. जवाई बांध की कुल क्षमता 7327.50 एमसीएफटी है. बारिश जारी रही तो जलस्तर और तेजी से बढ़ सकता है.
छापरवाड़ा बांध भी छलका: राजधानी जयपुर के पास छापरवाड़ा बांध एक बार फिर से चर्चा में है. पिछले 30 वर्षों में यह दूसरी बार है, जब बांध लबालब भरकर छलक पड़ा है. वर्ष 1995 के बाद पहली बार 2023 में बांध पर पानी की चादर चली थी. अब एक बार फिर 2025 में यह दृश्य देखने को मिला है. 17 फीट गेज तक पानी भरने के बाद छापरवाड़ा बांध से पानी की चादर चल पड़ी, जिससे न केवल सिंचाई के पानी की वर्षों पुरानी कमी दूर हुई, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों और शहरवासियों में भी खुशी की लहर दौड़ गई.
जयसमंद और माही बांध को अभी और पानी जरूरत: इधर, सलूंबर स्थित जयसमंद और बांसवाड़ा स्थित माही बांध को अभी और अधिक पानी की जरूरत है. जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार इस मौसम में इन दोनों बांधों के जलस्तर में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है. मानसून की शुरुआत में ये बांध क्रमशः केवल 30 से 34 फीसदी ही भरे थे.




















